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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने केरल दौरे के दौरान एक मिसाल पेश की. उन्होंने एर्नाकुलम के कलेक्टर (2001-2004) रहने के दौरान अपने गनर रहे साबू वर्गीस को अपनी सुरक्षा में तैनात करने का विशेष अनुरोध किया. 20 साल बाद मिले ज्ञानेश कुमार ने साबू को भाई बताया और उनके परिवार को दिल्ली आने का न्योता दिया. विदाई के समय साबू ने उन्हें पुरानी पारिवारिक यादों वाली एक तस्वीर भी भेंट की.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने डीजीपी से डिमांड रखी.
राजनीति और चुनाव की गहमागहमी के बीच केरल से एक ऐसी मानवीय कहानी सामने आई जिसने सबका दिल जीत लिया है. भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार हाल ही में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने कोच्चि पहुंचे थे. प्रोटोकॉल और सुरक्षा के तामझाम के बीच उन्होंने एक ऐसी विशेष मांग रखी जिसने सुरक्षा अधिकारियों को भी हैरान कर दिया. उन्होंने अपने 20 साल पुराने गनर साबू वर्गीस को अपनी सुरक्षा में तैनात करने का अनुरोध किया. ज्ञानेश कुमार और साबू वर्गीस का यह रिश्ता तब शुरू हुआ था जब कुमार 2001 से 2004 के बीच एर्नाकुलम के जिला कलेक्टर (DM) के रूप में तैनात थे. अधिकारियों के अनुसार साबू वर्गीस ने उस दौरान उनके गनर के रूप में सेवा दी थी.
कैसे हुई थी शुरुआत?
साल 2002 में साबू मूल गनर की छुट्टी के दौरान अस्थायी रूप से कलेक्टर की सुरक्षा टीम में शामिल हुए थे. लेकिन साबू के काम और व्यवहार से ज्ञानेश कुमार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने नियमित गनर के लौटने के बाद भी साबू को अपनी टीम में बने रहने को कहा. यह साथ साल 2004 तक बना रहा, जब तक कुमार का तबादला नहीं हो गया.
आयोग के अध्यक्ष की खास फरमाइश
5 से 7 मार्च तक कोच्चि दौरे पर रहे CEC ने खुद पुलिस महानिदेशक (DGP) से अनुरोध किया कि साबू वर्गीस को उनकी सुरक्षा ड्यूटी में लगाया जाए. वर्तमान में साबू एयरपोर्ट पर संपर्क अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. दौरे के दौरान एक भावुक पल तब आया जब ज्ञानेश कुमार ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने साबू का परिचय देते हुए कहा कि “मैं साबू को अपने भाई की तरह मानता हूं. यह सुनकर साबू की आंखें नम हो गईं. साबू ने विदाई के समय CEC को उनकी एर्नाकुलम तैनाती के दौरान की एक पुरानी पारिवारिक फोटो भेंट की जिसे देखकर यादें ताजा हो गईं.
पुरानी जगहों का दौरा और दिल्ली का न्योता
अपने प्रवास के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन स्थानों का भी दौरा किया जिनका निर्माण या नवीनीकरण उनके जिला कलेक्टर के कार्यकाल के दौरान हुआ था. उन्होंने साबू और उनके परिवार को दिल्ली आने का न्योता दिया और वादा किया कि अगली बार जब वे केरल आएंगे तो अपने पोते-पोतियों को भी साबू से मिलवाने लाएंगे.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
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