जंगल-नदी के बीच बसा अनोखा गांव, जहां के बच्चों ने पूरे देश में बजाया डंका, हर घर से निकल रहे डॉक्टर और अफसर

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Bahraich Unique village: लखीमपुर खीरी के एक गांव की कहानी काफी अनोखी है. यहां के कई युवक एमबीबीएस डॉक्टर बनकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल बहराइच, झांसी, लखनऊ समेत देश के अलग-अलग राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं. हाल ही में इस गांव के एक बेटे ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी पास कर इतिहास रच दिया है. आइए जानते हैं इस गांव की पूरी कहानी.

बहराइच: जिले के किनारे लखीमपुर बॉर्डर पर बसा हुआ एक गांव, जहां ना कोई अच्छा विद्यालय है, ना कोई अच्छी मार्केट और ना ही कोई खास सुख-सुविधाएं. लेकिन यहां के बच्चे आज यूपी समेत पूरे भारत में झंडे गाड़ रहे हैं. यहां के कई युवक एमबीबीएस डॉक्टर बनकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल बहराइच, झांसी, लखनऊ समेत देश के अलग-अलग राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं. हाल ही में इस गांव के एक बेटे ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी पास कर इतिहास रच दिया है. आइए जानते हैं इस गांव की पूरी कहानी.

बहराइच मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर
बहराइच जिले की तहसीलों में से एक तहसील मिहीपुरवा, विधानसभा बलहा है, जहां की आधी आबादी बीहड़ इलाकों में निवास करती है. यहां सुख-सुविधाओं के नाम पर बहुत कम संसाधन हैं. बस जंगल, नदी और सकरी सड़कें ही यहां की पहचान हैं. इसी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम उर्रा है. उर्रा गांव में कई छोटे-छोटे पुरवे हैं और इन पुरवों से कोई एमबीबीएस डॉक्टर बना है तो कोई अधिकारी.

गांव के होनहारों ने बना दी अलग पहचान
एक समय ऐसा था जब बहराइच में रहने वाले लोग भी इस गांव को तो छोड़िए, इस गांव का नाम तक नहीं जानते थे. लेकिन आज इस गांव की चर्चा पूरे जनपद में होती है. वजह यह है कि यहां के कई युवक बहराइच मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बतौर एमबीबीएस डॉक्टर कार्यरत हैं. इतना ही नहीं, झांसी और लखनऊ में भी इस गांव के डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं. कुल मिलाकर इस गांव ने पूरे यूपी समेत देश को दर्जनों कुशल डॉक्टर दिए हैं. वैसे तो इस गांव के पढ़े-लिखे बच्चे अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत हैं, फिर चाहे वह पत्रकार हों या व्यापारी.

बहराइच का उर्रा ग्राम
बहराइच जिले का उर्रा ग्राम अपनी ऐतिहासिक महत्ता और कृषि आधारित जीवन शैली के लिए जाना जाता रहा है. 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां की जनसंख्या लगभग 10 हजार से अधिक थी. यह क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण परिवेश, खेती और स्थानीय व्यापार “उर्रा बाजार” के लिए प्रसिद्ध है.

यह गांव बहराइच जिले की मिहीपुरवा तहसील के अंतर्गत आता है और भारत-नेपाल सीमा के पास होने के कारण भी महत्वपूर्ण माना जाता है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उर्रा गांव की साक्षरता दर उत्तर प्रदेश के औसत से कम, लगभग 40.38% थी. इसमें पुरुष साक्षरता 47.85% और महिला साक्षरता 32.08% दर्ज की गई थी.

ग्राम की भौगोलिक स्थिति
यह गांव लखीमपुर खीरी और बहराइच की सीमा के पास स्थित होने के कारण भौगोलिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है. सीमा पर स्थित जालिम नगर पुल दोनों जिलों की सीमा तय करता है. जालिम नगर पुल का कुछ हिस्सा लखीमपुर जिले में आता है तो कुछ हिस्सा बहराइच जिले में पड़ता है. यहां बहराइच पुलिस प्रशासन की जालिम नगर पुलिस चौकी भी स्थापित है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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