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पश्चिम एशिया में जंग और ईरान पर हमलों के बीच भारत चिंतित है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद में भारतीयों की सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर बयान देंगे. महंगाई की चिंता भी बढ़ी है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर सोमवार को संसद में ईरान मुद्दे पर जवाब देंगे.
पश्चिम एशिया में छिड़ी भीषण जंग और ईरान पर हो रहे चौतरफा हमलों के बीच भारत की चिंताएं अब चरम पर हैं. इस संकट का भारत पर क्या और कितना असर होगा, इस पर सरकार कल पूरी जानकारी देगी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर संसद के दोनों सदनों में बयान देंगे. राज्यसभा में सुबह 11 बजे और लोकसभा में दोपहर 12 बजे होने वाला यह संबोधन न केवल कूटनीतिक लिहाज से अहम है, बल्कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा और करोड़ों भारतीयों के भविष्य से जुड़ा है. सरकार का यह बयान ऐसे समय में आ रहा है जब विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है.
जयशंकर के सामने तीन बड़ी चुनौतियां
विदेश मंत्री जब संसद में खड़े होंगे, तो दुनिया की नजरें भारत के स्टैंड पर होंगी. रणनीतिक एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि जयशंकर के बयान में तीन मुख्य बिंदुओं पर फोकस रहेगा.
- भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं. युद्ध के कारण कई देशों में उड़ानें रद्द हैं और लोग फंसे हुए हैं. सरकार को बताना होगा कि क्या ‘ऑपरेशन राहत’ जैसा कोई बड़ा रेस्क्यू मिशन शुरू करने की तैयारी है?
- ऊर्जा सुरक्षा : भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी युद्धग्रस्त क्षेत्र से आता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण सप्लाई चेन टूटने का खतरा है. जयशंकर बताएंगे कि भारत के पास तेल का कितना बैकअप है.
- कूटनीतिक संतुलन: भारत के इजरायल और ईरान, दोनों के साथ गहरे संबंध हैं. हाल ही में पीएम मोदी की इजरायल यात्रा और उसके तुरंत बाद ईरान पर हुए हमलों ने भारत को एक मुश्किल स्थिति में डाल दिया है. क्या भारत इस जंग में मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा या अपनी ‘प्रिंसिपल्ड न्यूट्रलिटी’ (सिद्धांतिक तटस्थता) पर कायम रहेगा?
‘रसोई तक पहुंच गई है जंग’
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इस मुद्दे पर राज्यसभा में नियम 267 के तहत चर्चा का नोटिस दिया है. उनका कहना है कि यह केवल विदेश नीति का मामला नहीं है, बल्कि भारत के हर घर के बजट से जुड़ा मुद्दा है. संजय सिंह ने सीधे तौर पर सरकार से सवाल किया है कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण जो तेल और गैस के दाम बढ़ रहे हैं, उससे जनता को कैसे बचाया जाएगा? उन्होंने कहा, गैस सिलेंडर के दाम जिस तेजी से बढ़े हैं, उसने साफ कर दिया है कि महंगाई का बोझ जनता के कंधों पर आने वाला है. सरकार को संसद में बताना चाहिए कि अर्थव्यवस्था को इस झटके से बचाने के लिए क्या तैयारी है?
महंगाई की पहली दस्तक
रिपोर्ट्स बताती हैं कि युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा का उछाल आया है. भारत में एलपीजी (LPG) की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में जयशंकर का बयान यह साफ करेगा कि क्या सरकार तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेष फंड या रणनीति बना रही है.
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