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Agriculture News: किसानों के लिए सिंचाई पर होने वाला भारी भरकम खर्च अब मुनाफे में बदल सकता है. भारतीय और जापानी तकनीक के मेल से तैयार किया गया ‘फसल अमृत’ एक ऐसा जैविक उत्पाद है, जो मिट्टी की नमी को सोखकर उसे लंबे समय तक बरकरार रखता है. डीजल की बढ़ती कीमतों और बार-बार इंजन रेंट पर लेने की समस्या से परेशान किसानों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है. महज 320 रुपये प्रति किलो की लागत वाला यह उत्पाद न केवल पानी की बचत करता है, बल्कि एक सीजन में दो से तीन सिंचाई की जरूरत को भी खत्म कर देता है.
बहराइच: खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लागत को कम करना और मुनाफे को बढ़ाना होता है. किसानों की खेती का एक बड़ा हिस्सा सिंचाई के खर्च में निकल जाता है. फसलों की जरूरत के हिसाब से किसानों को बार-बार इंजन रेंट पर लेना पड़ता है या अपने इंजन में महंगा डीजल डालना पड़ता है. ऐसे में बहराइच के किसानों के लिए ‘फसल अमृत’ नाम का एक जैविक उत्पाद उम्मीद की नई किरण बनकर आया है. यह खास पदार्थ मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखने की क्षमता रखता है, जिससे सिंचाई के फेरे कम हो जाते हैं और सीधे तौर पर किसान की जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होता है.
‘फसल अमृत’ को भारतीय और जापानी तकनीक के मेल से खास तौर पर किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यह एक उच्च गुणवत्ता वाला जैविक उत्पाद है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत इसका इस्तेमाल करना है. किसान भाई इसे अपनी नियमित उर्वरक खाद या गोबर की खाद में मिलाकर आसानी से खेत की मिट्टी में डाल सकते हैं. यह न केवल पानी की बचत करता है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखता है. ग्रीष्म ऋतु (गर्मियों) की फसलों के लिए यह उत्पाद रामबाण साबित हो रहा है क्योंकि उस समय धूप के कारण नमी जल्दी खत्म हो जाती है.
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कैसे काम करता है ‘फसल अमृत’ और क्या है इस्तेमाल की विधि?
खेतों में इसका इस्तेमाल करना बेहद आसान है. एक बीघा खेत के लिए मात्र 1 किलोग्राम ‘फसल अमृत’ पर्याप्त होता है. बुवाई से पहले इसे खाद में मिलाकर खेत में डाल दिया जाता है. जब खेत में पहली सिंचाई की जाती है, तो इस उत्पाद में मौजूद छोटे-छोटे कण पानी को सोखकर अपने अंदर जमा कर लेते हैं. जैसे-जैसे मिट्टी सूखने लगती है, ये कण धीरे-धीरे नमी छोड़ते रहते हैं. जानकारों के अनुसार, यह उत्पाद एक सीजन में दो से तीन सिंचाई कम करने की क्षमता रखता है. एक अनुमान के मुताबिक, प्रति एकड़ सिंचाई पर आने वाला दो से ढाई हजार का खर्च इससे काफी कम हो जाता है.
कीमत और कहां से खरीदें?
इस खास ‘फसल अमृत’ की कीमत की बात करें तो यह लगभग 320 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से उपलब्ध है, जो एक बीघे के लिए काफी है. वहीं, एक एकड़ खेत के लिए लगभग 1500 से 1600 रुपये तक का खर्च आता है. जो किसान भाई इसे अधिक मात्रा में खरीदते हैं, उन्हें विशेष डिस्काउंट भी दिया जाता है. बहराइच के किसान इसे स्थानीय स्तर पर ‘किसान उद्यमी महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी’ (FPC) के फार्म रिसोर्स सेंटर से प्राप्त कर सकते हैं. यह केंद्र बहराइच शहर में केडिया हॉस्पिटल के पास स्थित है, जहां से किसान अपनी जरूरत के अनुसार इसे खरीद सकते हैं.
खेती में बचत और मिट्टी की सेहत
‘फसल अमृत’ न केवल आर्थिक बचत का जरिया है, बल्कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी एक सस्टेनेबल कदम है. गिरते भूजल स्तर के बीच पानी की बचत करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है. इस जैविक उत्पाद के इस्तेमाल से न केवल सिंचाई की संख्या कम होती है, बल्कि मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्व भी सुरक्षित रहते हैं. बहराइच के अनुभवी किसान अब इसे अपनी पारंपरिक खेती का हिस्सा बना रहे हैं ताकि कम से कम लागत में अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सके और खेती को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सके.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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