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Negative Parenting Effects : हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा चाहते हैं. हम उनकी शिक्षा, खान-पान और सुख-सुविधाओं के लिए दिन-रात एक कर देते हैं. लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि बच्चों से बात करते समय आपके मुंह से निकलने वाले निगेटिव शब्द उनके कोमल मन पर क्या असर डाल रहे हैं? अनजाने में कहे गए कड़वे शब्द और बार-बार की गई आलोचना उनके भविष्य के लिए ‘धीमे जहर’ का काम कर सकती है. हालिया रिसर्च और मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में कुछ ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जो हर पेरेंट को सोचने पर मजबूर कर देंगे.
70% तक गिर जाता है आत्मविश्वास
रिसर्च के अनुसार, यदि बच्चा बचपन में लगातार नकारात्मक बातें सुनता है, तो बड़े होने पर उसका आत्म-सम्मान (Self-esteem) 70 प्रतिशत तक कम हो सकता है. जब हम बच्चों से कहते हैं- “तुमसे कुछ नहीं होगा”, “तुम कभी कुछ नहीं कर सकते” या “देखो वो कितना होशियार है और तुम कितने बुद्धू हो”- तो ये शब्द उनके दिमाग में गहरे तक बैठ जाते हैं. धीरे-धीरे उनके मन में एक ‘परमानेंट हार’ वाली सोच विकसित हो जाती है. उन्हें लगने लगता है कि वे वाकई किसी काम के नहीं हैं. यही हीन भावना (Inferiority Complex) उन्हें जीवन की चुनौतियों से लड़ने के बजाय पीछे हटना सिखा देती है.
शरीर में 300% तक बढ़ जाता है स्ट्रेस हार्मोन्स
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बार-बार की जाने वाली टोक-टाक और नकारात्मक कमेंट्स बच्चों के शरीर में स्ट्रेस हार्मोन्स (Stress Hormones) के स्तर को 300 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं. जब बच्चा हर समय डरा हुआ या तनाव में रहता है, तो इसका सीधा असर उसके स्वभाव पर पड़ता है:
- चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना.
- डरपोक स्वभाव: नई चीजों को आज़माने से घबराना.
- सामाजिक अलगाव: लोगों से मिलने-जुलने में हिचक महसूस करना.
शब्दों में है बड़ी ताकत-
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1.गलती पर सुधारें, व्यक्तित्व पर हमला न करें: अगर बच्चे से कोई कांच का गिलास टूट जाए, तो उसे “तुम हमेशा नुकसान करते हो” कहने के बजाय कहें “बेटा, संभलकर उठाओ, अगली बार ध्यान रखना.”
2.प्रशंसा में कंजूसी न करें: छोटी-छोटी उपलब्धियों पर भी उनकी सराहना करें. इससे उनका डोपामाइन (खुशी वाला हार्मोन) बढ़ता है.
3.सुनने की आदत डालें: बोलने से पहले यह सुनें कि बच्चा क्या कहना चाहता है. संवाद को एकतरफा न रखें.
4.सकारात्मक विकल्पों का चुनाव: “वहां मत गिरो” कहने के बजाय “यहां आराम से चलो” कहें. आपके वाक्यों की बनावट ही उनके सोचने का तरीका बदल देगी.
आज से ही अपने शब्दों को लेकर जागरूक बनें. याद रखें, आपका एक सकारात्मक वाक्य आपके बच्चे को आसमान छूने की ताकत दे सकता है. बचपन अनमोल है, इसे कड़वाहट से नहीं, बल्कि प्यार और प्रोत्साहन की खाद से सींचें.
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