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देश में बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में जबरदस्त तेजी आई है. ऐसे में आरबीआई अब वैसे ग्राहकों को मुआवजा देने जा रही है, जिनके साथ 50000 रुपये तक साइबर फ्रॉड हुआ है. लेकिन इसके लिए आरबीआई ने ग्राहकों के लिए कुछ शर्तें भी जारी की है, जिसको पूरा किए वगैर ग्राहक मुआवजा के हकदार नहीं होंगे. जानें आरबीआई ने किस तरह के लोगों के लिए मुआवजा देने का ऐलान किया है.
आरबीआई अब साइबर ठगी के शिकार लोगों को मुआवजा देगा.
नई दिल्ली. देश में ऑनलाइन ठगी के शिकार हुए लोगों को अब आरबीआई यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया मुआवजा देने जा रहा है. देश में बीते कुछ सालों में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले में भी तेजी आई है. ऐसे में आरबीआई कुछ शर्तों के साथ 65 प्रतिशत साइबर ठगी के शिकार लोगों को मुआवजा देगा. आरबीआई एक नया प्रस्ताव लेकर आई है, जिससे ग्राहकों को काफी राहत मिल सकती है. दरअसल आरबीआई वैसे लोगों को मुआवजा देगा, जिनके साथ 25000 से लेकर 50 हजार रुपये तक ठगी हुआ है. यह राहत फिलहाल छोटे स्तर के डिजिटल बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में लागू किया जा रहा है.
आरबीआई ने हाल ही में इस प्रस्ताव का मसौदा जारी किया है. इसके पहले आऱबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बीते छह फरवरी को मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक में इसका ऐलान किया था. नया प्रस्ताव 1 जुलाई 2026 को या इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर लागू होगा. आरबीआई ने इस मसौदे पर छह अप्रैल 2026 तक आम लोगों से राय मांगी है.
क्या है आरबीआई का यह प्रस्ताव
आरबीआई के इस प्रस्ताव के मुताबकि यह सुविधा फिलहाल उन मामलों में लोगी होगी, जहां ठगी के कुल नुकसान 50000 रुपये तक हो. अगर किसी व्यक्ति का नुकसान इससे ज्यादा होता है तो मुआवजा नहीं मिलेगा. लेकिन उन ग्राहकों की परेशानियों को आरबीआई अपने स्तर पर हल करने की कोशिश करेगी. आरबीआई के नए दिशा निर्देश के तहत ग्राहकों को कुल नुकसान के 85 प्रतिशत या 25 हजार रुपये में जो कम होगा, वह रकम बतौर मुआवजा मिलेगी.
आरबीआई क्यों राहत दे रही है?
आरबीआई ने मुताबिक देश में हाल के दिनों में साइबर ठगी के मामले में तेजी आई है. आरबीआई ने कहा है कि ज्यादातर बैंकिंग ठगी के मामले 50000 रुपये से कम होता है. यह साइबर ठगी के कुल मामलों में लगभग 65 प्रतिशत है. इसलिए छोटे खाताधारकों को राहत देने के लिए आरबीआई ने यह योजना लेकर आई है. इससे लोगों के नुकसान की भरपाई हो सकेगी.
मुआवजा पाने की क्या है शर्तें?
- अगर आपके साथ साइबर ठगी या बैंक फ्रॉड होता है तो आपको शिकायत पांच दिनों के अंदर बैंक में दर्ज करानी होगी.
- इसके साथ ही शिकायत नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करनी होगी.
- बैंक एक निश्चित समय सीमा के अंदर जांच करेगा कि वाकई यह साइबर फ्रॉड है या कुछ और. बैंक जांच करेगा कि यह वास्तविक में धोखाधड़ी है या ग्राहकों की पैसा ऐठने की चाल?
- अगर बैंक शिकायत सही पाता है तो ग्राहकों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर उनके अकाउंट में मुआवजा दिया जाएगा
कुलमिलाकर साइबर ठगी या वित्तीय धोखाधड़ी होने पर आपको तुरंत 1930 नंबर पर डायल करना ही होगा. इसके साथ ही cybercrime.gov.in पर साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट दर्ज करानी होगी. आप जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी. इसके अलावा अपने साथ हुए फ्रॉड के बारे में बैंक पांच दिन के अंदर सूचित करें और स्थानीय पुलिस स्टेशन में साइबर सेल के पास एफआईआर दर्ज कराएं. शिकायत करते समय ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक खाता संख्या, ठग का मोबाइल नंबर या यूजरनेम और घटना की पूरी जानकारी स्क्रीनशॉट के साथ जमा कराएं.
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