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अरहर की फसल अब अपने सबसे अहम दौर में है, जहां खेतों में पीले फूलों की चादर बिछ गई है और फलियां बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. यह वह समय है जब किसानों को सिंचाई और कीट प्रबंधन में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. इस अवस्था पर सही देख-रेख न होने से पैदावार में 30% से 40% तक की गिरावट आ सकती है. लोकल 18 से कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान कहते हैं कि इस अवस्था में ‘फली छेदक’ अरहर किसानों का सबसे बड़ा दुश्मन है. जब फलियां बन रही हों, तब 2% यूरिया या N.P.K. (13:00:45) का पत्तियों पर छिड़काव फायदेमंद है.
अरहर में फूल आने और फलियां बनने के दौरान मिट्टी में नमी का होना जरूरी है. यदि इस समय खेत में सूखा पड़ता है, तो फूल समय से पहले गिर सकते हैं और फलियों में दाने छोटे रह जाते हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि पानी का ठहराव भी नुकसानदेह है. हल्की सिंचाई करें ताकि जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन और नमी मिलती रहे, जिससे दानों का भराव अच्छा हो.
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान के मुताबिक, इस अवस्था में ‘फली छेदक’ (Pod Borer) सबसे बड़ा दुश्मन होता है. यह कीट फूलों को खा जाता है और फलियों में छेद कर दानों को नष्ट कर देता है. इसकी निगरानी के लिए खेतों में ‘फेरोमोन ट्रैप’ लगाएं. अगर प्रकोप अधिक दिखे, तो विशेषज्ञ की सलाह पर इमामेक्टिन बेंजोएट या स्पिनोसैड जैसी कीटनाशकों का छिड़काव शाम के समय करें जब मधुमक्खियों की सक्रियता कम हो.
बेहतर उपज के लिए पौधों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है. जब फलियां बन रही हों, तब 2% यूरिया या N.P.K. (13:00:45) का पत्तियों पर छिड़काव (Foliar Spray) करना बहुत फायदेमंद साबित होता है. यह छिड़काव पौधों को मजबूती देता है और दानों की चमक व वजन बढ़ाने में मदद करता है. सल्फर का प्रयोग भी दानों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है.
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अक्सर तापमान में उतार-चढ़ाव या पोषक तत्वों की कमी के कारण अरहर के फूल झड़ने लगते हैं. इसे रोकने के लिए ‘प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर’ जैसे कि अल्फा नैफ्थाइल एसिटिक एसिड का प्रयोग किया जा सकता है. इसकी सही मात्रा फूलों को गिरने से बचाती है और अधिक से अधिक फूलों को फलियों में बदलने में मदद करती है, जिससे अंतिम उत्पादन बढ़ता है.
अरहर के खेतों में मधुमक्खियां और दूसरे कीट परागण की क्रिया में मदद करते हैं, जो फली बनने के लिए आवश्यक है. तेज रसायनों के अंधाधुंध छिड़काव से ये मित्र कीट मर सकते हैं. कोशिश करें कि नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग करें. यह शत्रु कीटों को तो रोकता है लेकिन पर्यावरण और मित्र कीटों के लिए सुरक्षित रहता है.
फली बनते समय खेत में खरपतवार नहीं होने चाहिए, क्योंकि वे मुख्य फसल के हिस्से का पोषण चुरा लेते हैं. खेत के आसपास उगी झाड़ियों को साफ रखें क्योंकि वे कीटों के छिपने का स्थान बनती हैं. खेत की नियमित निगरानी करें और यदि कोई पौधा बीमार या पीला दिखाई दे, तो उसे उखाड़कर नष्ट कर दें ताकि संक्रमण अन्य स्वस्थ पौधों तक न फैले.
अधिकतम उपज के लिए सही समय पर कटाई भी जरूरी है. जब 80% से 85% फलियां भूरी होकर सूख जाएं, तब कटाई शुरू कर देनी चाहिए. बहुत अधिक सूखने का इंतजार न करें, वरना फलियां खेत में ही चटक सकती हैं और दाने बिखर सकते हैं. कटाई के बाद फसल को खलिहान में अच्छी तरह सुखाएं और फिर गहाई करके दानों को सुरक्षित करें.
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