बनना था एमबीबीएस डॉक्टर लेकिन एक सोच ने बना दिया वेटरनरी डॉक्टर, जानें इस बेटी की कहानी

Date:

[ad_1]

Last Updated:

Chhatarpur News: पूजा मंडलोई ने लोकल 18 से कहा, ‘दिसंबर 2025 में मेरी पोस्टिंग छतरपुर के लवकुश नगर के भड़ार गांव में पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के तौर पर हुई. मैंने कभी नहीं सोचा था कि छतरपुर के एक छोटे से गांव में पशुओं की सेवा करने का मौका मिलेगा. पहले मुझे अजीब लगा लेकिन फिर सब सामान्य जैसा लगने लगा.’

छतरपुर. आज हम आपको मध्य प्रदेश की एक ऐसी बेटी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने हौसलों को उड़ान दी और आज वह बतौर पशु चिकित्सक सेवाएं दे रही है. बड़वानी की पूजा मंडलोई को पशुओं से इतना लगाव था कि वह MBBS डॉक्टर का सपना छोड़ वेटरनरी डॉक्टर बन गईं. पूजा एक किसान परिवार से आती हैं. वह बड़े शहरों में तो पढ़ाई नहीं कर पाईं लेकिन कुछ बनकर दिखाना था, तो अपने हौसले को उड़ान दी और आज सैकड़ों किमी दूर छतरपुर में पशु क्षेत्र चिकित्सा अधिकारी के तौर पर सेवाएं दे रही हैं.

पूजा मंडलोई ने लोकल 18 से बातचीत में कहा, ‘भले ही मेरी परवरिश गांव के माहौल में हुई है लेकिन मेरा सपना डॉक्टर बनने का ही था, इसलिए मैंने बायो स्ट्रीम से ही 12वीं पास की. इसके बाद मैंने नीट एग्जाम भी दिया लेकिन उसमें अच्छे मार्क्स नहीं आए थे. रिजल्ट से खुश नहीं थी, तो इसके बाद ग्रेजुएशन (बीएससी) कर लिया. इसके बाद कुछ समझ नहीं आ रहा था, तो एक बार दिल ने फिर कहा कि तुझे तो डॉक्टर बनना था. तू कर क्या रही है. इसके बाद मैंने एनिमल हसबेंडरी एंट्रेंस एग्जाम दिया, जिसमें डिप्लोमा कोर्स करने के लिए एडमिशन मिलता है.’

बचपन से था पशुओं से लगाव
उन्होंने कहा, ‘मेरे घर में पशु रहे हैं, तो मुझे इनकी सेवा का भी जुनून था. पशुओं से लगाव होने की वजह से भी मैंने वेटरनरी डॉक्टर बनने का सोचा. गांव में देखती थी कि जब हमारे घर या गांव में कोई जानवर बीमार पड़ जाता था, तो इनके इलाज के लिए कोई नहीं रहता था. ये बेचारे बिना इलाज के ही मर जाते थे. ये पीड़ा भी मन में थी, इसलिए पशु चिकित्सक बनने का ख्याल आता रहता था.’

एग्जाम क्रैक कर बनीं वेटरनरी डॉक्टर
पूजा ने आगे कहा, ‘एमपी में 5 वेटरनरी कॉलेज हैं. मुझे रीवा का कॉलेज मिला, जहां से मैंने दो साल का डिप्लोमा कोर्स कंप्लीट किया. इसके बाद पशु विभाग की तरफ से सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी की वैकेंसी आ गई. मैंने तैयारी की, एग्जाम भी दिया लेकिन पहली बार में सिलेक्शन नहीं हो पाया. हालांकि मैंने हार नहीं मानी और दूसरी बार एक बार फिर से एग्जाम दिया और इस बार मुझे सफलता मिल गई. मुझे पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के तौर पर पशुओं की सेवा करने का मौका मिला है.’

छतरपुर में पिछले साल हुई पोस्टिंग
पूजा ने कहा, ‘मैंने नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई खरगोन के प्राइवेट स्कूल से की है. इसके बाद ग्रेजुएशन भी खरगोन से ही किया है. हालांकि मेरी पोस्टिंग छतरपुर जिले में हुई है. पिछले साल दिसंबर में ही मेरी पोस्टिंग छतरपुर के लवकुश नगर के भड़ार गांव में पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के तौर पर हुई है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि बड़वानी से छतरपुर के एक छोटे से गांव में पशुओं की सेवा करने का मौका मिलेगा. पहले मुझे अजीब लग रहा था लेकिन फिर सब सामान्य जैसा लगने लगा.’

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related