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Agriculture News: मटर की फसल में इस समय फलियों में दाने भरने के साथ पॉड बोरर यानी फली छेदक कीट का खतरा बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. एन.पी. गुप्ता के अनुसार यह कीट फलियों में छेद कर दानों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसके नियंत्रण के लिए 100 ग्राम इमामेक्टिन को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी गई है. साथ ही दानों के बेहतर भराव के लिए खेत में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है.
शाहजहांपुर: मटर की फसल अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, जहां फलियों में दाने भरने लगे हैं. लेकिन इस समय पॉड बोरर यानि फली छेदक कीट का खतरा काफी बढ़ गया है, जो सीधे पैदावार और मुनाफे को कम कर सकता है. यह कीट दानों को खाकर उनकी गुणवत्ता और वजन कम कर देता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और सही कीटनाशक के साथ-साथ नमी प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी है. अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो मटर की चमक और बाजार मूल्य दोनों गिर सकते हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि इस समय मटर की खेती में पॉड बोरर कीट एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने बताया कि यह कीट फलियों के भीतर घुसकर दानों को नष्ट कर देता है, जिससे वजन और गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसके नियंत्रण के लिए इमामेक्टिन (Emamectin) का छिड़काव करें. 100 ग्राम दवा को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव कर दें. इसके अलावा दानों के अच्छे भराव के लिए खेत में हल्की नमी बनाए रखना चाहिए.
पॉड बोरर से सुरक्षा
मटर की खेती में फलियों को नुकसान पहुंचाने वाला सबसे मुख्य दुश्मन पॉड बोरर कीट है. यह कीट फलियों में छेद करके दानों को अपना आहार बनाता है. इससे न केवल दाने खोखले हो जाते हैं, बल्कि फसल की बाजार में मांग भी कम हो जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को अपनी फसल का नियमित निरीक्षण करना चाहिए और कीट के लक्षण दिखते ही तत्काल नियंत्रण के उपाय करने चाहिए ताकि आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.
सही कीटनाशक का चुनाव
पॉड बोरर के प्रभावी नियंत्रण के लिए डॉ. गुप्ता ने इमामेक्टिन दवा के छिड़काव का सुझाव दिया है. 100 ग्राम इमामेक्टिन को लगभग 150 लीटर पानी में मिलाकर एक समान घोल तैयार छिड़काव करें. इस घोल का खेत में अच्छी तरह छिड़काव करने से कीटों का नाश होता है. सही समय और सही मात्रा में कीटनाशक का प्रयोग ही मटर की फसल की गुणवत्ता और चमक बरकरार रखने में मददगार साबित होता है.
नमी और सिंचाई प्रबंधन
कीट नियंत्रण के साथ-साथ फसल के विकास के लिए नमी भी उतनी ही जरूरी है. जब फलियों में दाने बन रहे हों, तब खेत में हल्की नमी होना जरूरी है. पर्याप्त नमी से दानों का भराव बेहतर होता है, जिससे उनका वजन बढ़ता है और दानों में चमक आती है. यदि इस समय पानी की कमी होती है, तो दाने सिकुड़ सकते हैं. इसलिए किसान सिंचाई का प्रबंधन बहुत सावधानीपूर्वक करें.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें
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