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गेहूं की फसल में फूल आने के समय यह रोग तेजी से सक्रिय होता है और दानों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. लूज स्मट से प्रभावित बालियां सामान्य से पहले पकती हुई दिखाई देती हैं लेकिन उनमें दानों की जगह काले चूर्ण जैसा पदार्थ भरा रहता है. हवा चलने पर यह पाउडर उड़कर अन्य पौधों को संक्रमित कर देता है. यदि समय पर रोकथाम न की जाए.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती करते हैं जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है.वही अचानक मौसम में हुए परिवर्तन के साथ-साथ कीटों का भी प्रकोप बढ़ता जा रहा है थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण फसल के उत्पादन में कमी आ सकती है जिस कारण किसान बेहद परेशान है.
वही इस समय गेहूं की फसल में फूल आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव तापमान में उतार चढाव और नमी की स्थित फसल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है जिससे फसल उत्पादन में कमी आती है वही इस दौरान सबसे अधिक खतरा गेहूं की फसल में लूट स्मट नामक बीमारी गेहूं की फसल को पूरी तरीके से बर्बाद कर सकती है.
लूज स्मट रोग गेहूं की फसल में इतना प्रभावित होता है जब अचानक मौसम में परिवर्तन दिखाई देने लगता है अगर सही समय पर इस रोग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो फसल उत्पादन में कमी भी आ सकती है. वहीं कुछ किसान घरों में रखा पुराना गेहूं का बीज की खेतों में बुवाई कर देते हैं जिस कारण इस रोग का प्रकोप बढ़ जाता है.बुवाई से पहले बीजों को 2 ग्राम बाविस्टिन या 1 ग्राम टेबुकोनाज़ोल प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए. जिससे इस रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
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कृषि वैज्ञानिक प्रदीप बिसेन ने जानकारी देते हुए बताया कि मार्च के महीने में गेहूं की फसल में सिंचाई बहुत ही उपयोगी मानी जाती है ध्यान रहे की खेत में जब नमी बनी रहेगी तब रोगों का प्रकोप कम रहेगा और फसल का उत्पादन भी बेहतर होगा. ऐसे में रोगों से छुटकारा पाने के लिए किसान इस समय.Lambdacyhalothrin4.9%Cs का छिड़काव खेतों में कर सकते हैं. 1 एकड़ में करीब 6 से 7 टंकी स्प्रे कर सकते हैं.सुबह या शाम के समय छिड़काव करें, जब तापमान कम हो.
फसल पकने के समय बालियों में दानों की जगह काले रंग का पाउडर दिखाई देने लगता है. यह दरअसल फफूंद के बीजाणु होते हैं, जो हवा के माध्यम से अन्य स्वस्थ पौधों तक फैल जाते हैं. इस बीमारी का प्रमुख कारण स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस नामक फफूंद है, जो बीज के अंदर छिपकर रहता है और पौधे के बढ़ने के साथ सक्रिय हो जाता है.
गेहूं की फसल में फूल आने के समय यह रोग तेजी से सक्रिय होता है और दानों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. लूज स्मट से प्रभावित बालियां सामान्य से पहले पकती हुई दिखाई देती हैं लेकिन उनमें दानों की जगह काले चूर्ण जैसा पदार्थ भरा रहता है. हवा चलने पर यह पाउडर उड़कर अन्य पौधों को संक्रमित कर देता है. यदि समय पर रोकथाम न की जाए, तो यह रोग 20 से 30 प्रतिशत तक उत्पादन घटा सकता है.
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