चावल के आटे की लोई में गुड़-नारियल की भरावन…ऐसे बनता है झारखंड का ट्रेडिशनल राइस डम्बु, भाप में बनी देसी मिठाई

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Rice Dambu Jharkhand Special Mithai: राइस डम्बु, झारखंड की पारंपरिक मिठाई है जो चावल के आटे, गुड़ और नारियल से बनती है. इसे भाप में पकाया जाता है, जिससे यह पौष्टिक और स्वादिष्ट होती है. बिना घी-तेल के तैयार यह मिठाई हेल्थ के लिहाज से भी अच्छी मानी जाती है.

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पलामू. हमारे देश में खान–पान की परंपरा जितनी विविध है, उतनी ही समृद्ध भी है. हर इलाके की अपनी खास रसोई और अलग पहचान होती है. गांवों में आज भी कई ऐसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जो स्वाद के साथ-साथ संस्कृति की खुशबू भी समेटे रहते हैं. यही कारण है कि देशी व्यंजन केवल भोजन नहीं बल्कि हमारी विरासत का हिस्सा माने जाते हैं. इन व्यंजनों में स्थानीय अनाज, घरेलू सामग्री और पारंपरिक विधि का इस्तेमाल होता है, जिससे इनका स्वाद भी अलग और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी होता है. ऐसे ही एक खास और पारंपरिक देशी मिठाई है राइस डम्बु, जिसे चावल के आटे से तैयार किया जाता है.

बहुत स्वादिष्ट, पारंपरिक मिठाई
सखी मंडल की दीदी उर्मिला देवी बताती हैं कि राइस डम्बु गांवों में बनने वाली बेहद स्वादिष्ट और पारंपरिक मिठाई है. इसे बनाने की विधि भी काफी सरल और घरेलू है. सबसे पहले चावल को पीसकर उसका बारीक आटा तैयार किया जाता है. इसके बाद इस आटे को हल्के गर्म पानी से अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है, जिससे यह मुलायम और चिकना बन जाता है.

आटे के लड्डू में गुड़-नारियल की फिलिंग
जब आटा तैयार हो जाता है तो उससे छोटे-छोटे गोल आकार के गोले बनाए जाते हैं. इन गोलों के बीच में हल्का सा खाली स्थान बनाकर उसमें गुड़ और नारियल का बुरादा भरा जाता है. गुड़ की मिठास और नारियल की खुशबू इस व्यंजन को खास स्वाद देती है. इसके बाद इन गोलों को सावधानी से बंद कर दिया जाता है ताकि अंदर भरी सामग्री बाहर न निकले.

नॉन फ्राइड, स्टीम्ड मिठाई
इसके बाद तैयार किए गए राइस डम्बु को इडली के सांचे में रखा जाता है और भाप में पकाया जाता है. लगभग 15 से 20 मिनट तक भाप में उबालने के बाद यह पूरी तरह पक जाता है. जब इसे सांचे से निकाला जाता है तो इसकी खुशबू और नरम बनावट हर किसी का मन मोह लेती है. यह मिठाई खाने में हल्की, पौष्टिक और बेहद स्वादिष्ट होती है.

जिले के अधिकारी भी खाते हैं नाश्ते में
उन्होंने कहा कि इस व्यंजन को जिले के अधिकारियों को भी नाश्ते में दिया जाता है. वहीं गांवों में आज भी ऐसे कई पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. राइस डम्बु भी उन्हीं में से एक है.

यह न केवल स्वाद का आनंद देता है बल्कि हमारी लोक परंपरा और ग्रामीण रसोई की समृद्ध पहचान को भी जीवित रखता है. जरूरत है कि ऐसे देशी व्यंजनों को आगे बढ़ाया जाए, ताकि नई पीढ़ी भी अपने पारंपरिक स्वाद और संस्कृति से जुड़ी रहे.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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