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अक्सर नर्सरी या दुकानों में एक प्रभेद का नाम बताकर दूसरा पौधा दे दिया जाता है. इससे किसानों को बाद में नुकसान होता है. जब पेड़ फल देने लगता है तब बाद में मालूम होता है कि लगाया गया पौधा उसी किस्म का नहीं है जिसकी उम्मीद थी. इसलिए बागवानी में सही और प्रमाणित पौधा लेना किसानों के लिए बहुत जरूरी माना जाता है.
पलामू. झारखंड बिहार में वर्षों से किसान पारंपरिक खेती करते आ रहे है. वहीं कुछ किसान ऐसे भी है जो वक्त के साथ उन्नत प्रभेद को अपनाकर आधुनिक खेती करते है. इसके लिए सरकार द्वारा भी योजना चलाई जाती है. बागवानी की बात करें तो आम की बागवानी आज किसानों के लिए लाभकारी विकल्प है. कई किसान इसे लाभ भी ले रहे है. लेकिन एक समस्या किसानों के लिए यह भी आती है कि बाजार में सही प्रभेद के पौधे मिलना, अक्सर नर्सरी या दुकानों में एक प्रभेद का नाम बताकर दूसरा पौधा दे दिया जाता है. इसलिए बागवानी में सही और प्रमाणित पौधा लेना किसानों के लिए बहुत जरूरी माना जाता है.
पलामू जिले के चियांकी स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में किसानों को पूरी तरह प्रमाणित और उन्नत प्रभेद के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं. यहां के कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रमोद कुमार ने लोकल 18 को बताया कि सबसे बड़ी खासियत यह है कि जिस प्रभेद का नाम दिया जाता है, उसी किस्म का पौधा किसानों को मिलता है. यानी यहां से पौधा लेने पर किसानों को गुणवत्ता और विश्वसनीयता की पूरी गारंटी मिलती है. यही कारण है कि पलामू समेत आसपास के कई जिलों के किसान यहां से पौधे खरीदना पसंद करते हैं.
यहां आम के इतने प्रभेद
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक के अनुसार यहां आम के करीब 12 उन्नत प्रभेद उपलब्ध हैं. जिसमें आम्रपाली, मल्लिका, सुंदर लंगड़ा, लंगड़ा और हिमसागर जैसे लोकप्रिय और अधिक उत्पादन देने वाले प्रभेद शामिल हैं. ये सभी पौधों को विशेष रूप से वैज्ञानिक पद्धति से तैयार जाता है. अगर कोई किसान बागवानी कर व्यावसायिक रूप से आम की खेती करना चाहता है तो यहां से पौधे लेकर अपनी शुरुआत कर सकते है.
बाजार से सस्ते दाम में पौधे
उन्होंने बताया कि यहां पौधों की कीमत भी किसानों के लिए काफी किफायती दर पर उपलब्ध है. अनुसंधान केंद्र में आम के पौधे मात्र 90 रुपये प्रति पौधा की दर से उपलब्ध हैं. जहां की खास बात यह है कि यह कीमत बाजार में मिलने वाले आम के पौधों के दर से भी कम है. बाजार में कई बार महंगे दाम पर भी सही किस्म के पौधे नहीं मिलते, जबकि यहां कम कीमत में उन्नत और प्रमाणित पौधे मिल जाते हैं.
2.5 एकड़ में विकसित है नर्सरी
उन्होंने कहा कि चियांकी स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में करीब 2.5 एकड़ क्षेत्र में नर्सरी विकसित है. जहां आम के अलावा नींबू, अमरूद, मौसमी, संतरा और कीनू समेत कई प्रकार के फलदार पौधे तैयार किए जाते हैं. जो कि पलामू और आसपास के क्षेत्रों की जलवायु के अनुसार उपयुक्त हो सकता है.
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