‘बेगुनाहों की मौत और तबाही स्वीकार्य नहीं’, ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में पीएम मोदी का सख्‍त संदेश

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पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियन से फोन पर सीधी बात की है. इस बातचीत में पीएम मोदी ने बेहद सख्त और स्पष्ट लहजे में आम नागरिकों की मौत और नागरिक बुनियादी ढांचे को पहुंच रहे नुकसान पर कड़ा विरोध दर्ज कराया. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि किसी भी युद्ध में बेगुनाह लोगों और सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बनाना अस्वीकार्य है.

मोदी का ‘ईरानी’ संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में हिंसा के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे जैसे बिजली, पानी और परिवहन प्रणालियों को नष्ट करना वैश्विक संकट को और गहरा रहा है. पीएम ने जोर देकर कहा कि इस तनाव की सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुका रही है, जो कि चिंताजनक है. उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति से तुरंत हिंसा रोकने और ‘डिप्लोमेसी’ (कूटनीति) की मेज पर लौटने का आग्रह किया.

भारत के रुख का क्या है मतलब?
1.      मानवीय दृष्टिकोण (Humanitarian Stand): भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘नागरिक सुरक्षा’ की बात की है. पीएम मोदी का यह बयान न केवल ईरान, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष में शामिल सभी पक्षों (इजरायल और उसके समर्थकों) के लिए भी एक संकेत है कि युद्ध के दौरान मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए.

2.      बुनियादी ढांचे का महत्व: ‘सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर’ को होने वाले नुकसान का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. अगर इस क्षेत्र में तेल पाइपलाइनें, बंदरगाह या व्यापारिक मार्ग क्षतिग्रस्त होते हैं, तो दुनिया भर में ऊर्जा संकट (Energy Crisis) खड़ा हो सकता है, जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा.

3.      कूटनीतिक संतुलन: एक तरफ भारत इजरायल का सामरिक साझेदार है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ उसके ऐतिहासिक और व्यापारिक संबंध (चाबहार बंदरगाह आदि) हैं. नागरिकों की मौत पर चिंता जताकर पीएम मोदी ने भारत की उस ‘तटस्थ लेकिन सक्रिय’ (Neutral yet Active) भूमिका को पुख्ता किया है, जहाँ शांति और मानवता सर्वोपरि है.

सवाल-जवाब
पीएम मोदी ने नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) पर हमले का मुद्दा क्यों उठाया?

क्योंकि बुनियादी ढांचे पर हमले का सीधा असर आम लोगों के जीवन और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है. भारत के लिए चाबहार जैसे प्रोजेक्ट्स और ऊर्जा आपूर्ति मार्ग इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर हैं.

क्या पीएम मोदी की यह बातचीत किसी खास देश के खिलाफ थी?

नहीं, पीएम मोदी ने एक संतुलित रुख अपनाते हुए ‘नागरिकों की सुरक्षा’ की वैश्विक मांग दोहराई है. उनका संदेश संघर्ष में शामिल सभी पक्षों के लिए है कि वे हिंसा त्यागकर संवाद का रास्ता चुनें.

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