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रूस ने भारत को होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अहम फैसला लिया है. क्रेमलिन ने साफ कहा है कि भारत को भेजे जाने वाले तेल की मात्रा सार्वजनिक नहीं की जाएगी.रूस का कहना है कि कई देश उसके ऊर्जा व्यापार पर नजर रखे हुए हैं. पश्चिम एशिया संकट के बीच यह फैसला वैश्विक तेल बाजार में नई चर्चा का कारण बन गया है.
रूस ने कहा कि वो भारत को बेचे गए तेल के बारे में किसी को जानकारी नहीं देगा. (Image:AI)
नई दिल्ली. रूस ने भारत को किए जाने वाले कच्चे तेल के निर्यात को लेकर एक अहम फैसला लिया है. मॉस्को ने साफ कर दिया है कि वह भारत को भेजे जाने वाले तेल की मात्रा सार्वजनिक नहीं करेगा. रूस का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह जानकारी छिपाकर रखना जरूरी है, क्योंकि कई देश इस पर नजर रखे हुए हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
आंकड़े छिपाने के पीछे बताई खास वजह
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि भारत को निर्यात किए जाने वाले तेल के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे. उनके मुताबिक, दुनिया में ऐसे कई लोग और देश हैं जो रूस के ऊर्जा व्यापार को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. ऐसे में निर्यात से जुड़े आंकड़ों को गोपनीय रखना ही बेहतर है. पेसकोव का यह बयान उस समय आया है जब भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.
अमेरिका के बयान के बाद बढ़ी चर्चा
दरअसल, अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी गई है. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत को होने वाली रूसी तेल आपूर्ति पर कई तरह की रिपोर्ट सामने आने लगीं. इन्हीं रिपोर्टों में दावा किया गया कि रूस एक सप्ताह में भारत को करीब 2.2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करने की क्षमता रखता है. हालांकि रूस ने इन आंकड़ों की पुष्टि करने से इनकार कर दिया है.
समुद्र में दिखे तेल टैंकरों ने बढ़ाई हलचल
रूस के सरकारी टीवी चैनल ने हाल ही में एक मानचित्र जारी किया था, जिसमें अरब सागर से बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ते कई तेल टैंकर दिखाई दिए. रिपोर्ट के मुताबिक ये जहाज भारत के पूर्वी तट की रिफाइनरियों की तरफ जा रहे थे. इससे यह संकेत मिला कि रूस से भारत की ओर कच्चे तेल की सप्लाई जारी है. हालांकि रूस ने आधिकारिक तौर पर इसकी मात्रा बताने से दूरी बनाए रखी है.
भारत-चीन को बढ़ सकती है तेल आपूर्ति
रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने संकेत दिया है कि उनका देश भारत और चीन जैसे बड़े ग्राहकों को कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन में आई रुकावट के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. ऐसे में रूस एशियाई देशों के साथ अपने ऊर्जा व्यापार को मजबूत करने की रणनीति पर काम करता दिख रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग और गहरा हो सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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