महिला दिवस पर झांसी से ग्वालियर तक चली नारी शक्ति की ट्रेन, लोको पायलट से लेकर टिकट की जिम्मेदारी महिलाओं के हाथ

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महिला दिवस पर झांसी से ग्वालियर तक चली नारी शक्ति की ट्रेन, महिला के हाथ कमान

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर एक बहुत खास नजारा देखने को मिला. वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही अलग सा माहौल था.स्टेशन पर खड़े लोग एक खास पल का इंतजार कर रहे थे.यह पल था बुंदेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन के रवाना होने का. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की मौके पर इस बार इस ट्रेन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं को दी गई.इंजन से लेकर यात्रियों की देखभाल तक हर काम महिलाओं ने संभाला.

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झांसीः अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर एक बहुत खास नजारा देखने को मिला. वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही अलग सा माहौल था.स्टेशन पर खड़े लोग एक खास पल का इंतजार कर रहे थे.यह पल था बुंदेलखंड एक्सप्रेस ट्रेन के रवाना होने का. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की मौके पर इस बार इस ट्रेन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं को दी गई.इंजन से लेकर यात्रियों की देखभाल तक हर काम महिलाओं ने संभाला.

जैसे ही ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई.वैसे ही लोगों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई.लोगों ने ताली बजाकर इस टीम का हौसला बढ़ाया.यह सफर झांसी से ग्वालियर तक का था लेकिन यह सिर्फ एक सफर नहीं था.यह नारी शक्ति की एक मजबूत पहचान का पल था.स्टेशन पर मौजूद हर व्यक्ति को गर्व महसूस हो रहा था.

महिला पायलट के हाथ ट्रेन की कमान

लोग एक दूसरे से यही कह रहे थे कि आज का दिन सच में खास बन गया.इस ट्रेन की कमान मुख्य लोको पायलट कौशल्या देवी ने संभाली.उनके साथ सहायक लोको पायलट दीप्ति भी पूरी लगन के साथ मौजूद रहीं. दोनों ने पूरे आत्म विश्वास के साथ इंजन की जिम्मेदारी संभाली.ट्रेन को सही समय पर सही दिशा में आगे बढ़ाना उनका काम था.ट्रेन के पीछे से सुरक्षा और संकेत की जिम्मेदारी ट्रेन मैनेजर अंजलि परमार ने संभाली.ट्रेन के हर पल पर उनकी नजर बनी रही.यह पूरी टीम अपने काम को बहुत ध्यान से करती नजर आई.जब ट्रेन धीरे धीरे स्टेशन से आगे बढ़ी तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखते रहे.कई लोग हाथ हिलाकर उनका हौसला बढ़ा रहे थे.

जिम्मेदारी निभा रहीं महिलाएं

उस समय हर किसी के मन में एक ही बात थी कि महिलाएं किसी भी जिम्मेदारी को अच्छे से निभा सकती हैं.ट्रेन के अंदर भी पूरा माहौल बहुत अच्छा था.यात्रियों की मदद और टिकट जांच का काम भी महिलाओं के हाथ में था.इस जिम्मेदारी को वंदना मिश्रा, प्रगति यादव भारती वर्मा और नाजिया निशा ने संभाला.ये सभी मुस्कुराते हुए यात्रियों से बात करती नजर आईंकोई यात्री सीट के बारे में पूछ रहा थाकोई टिकट दिखा रहा थाहर सवाल का जवाब शांति से दिया जा रहा था.यात्री भी खुश नजर आए.कई लोगों ने इन सभी महिलाओं को बधाई दी.

लोगों ने मोबाइल से फोटो और वीडियो भी बनाए

पूरे डिब्बे में खुशी और गर्व का माहौल था.यह सफर लोगों के लिए यादगार बनता जा रहा था.यह पहल भारतीय रेल की तरफ से एक मजबूत संदेश लेकर आई.संदेश यह था कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं.चाहे इंजन चलाना हो चाहे ट्रेन की सुरक्षा संभालना हो या यात्रियों की मदद करना हो.हर काम महिलाएं पूरे भरोसे और मेहनत के साथ कर रही हैं.झांसी की धरती हमेशा से वीरता के लिए जानी जाती है. यही वह जगह है जहां से रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी की कहानियां पूरे देश में फैली थीं.

आज उसी धरती से नारी शक्ति की एक नई कहानी सामने आई. झांसी से ग्वालियर तक चला यह सफर कई लोगों के दिल में एक नई सोच छोड़ गय.यह पल यह दिन और यह हौसला लंबे समय तक याद किया जाएगा.लोगों को यह याद दिलाता रहेगा कि महिलाएं हर काम करने की ताकत रखती हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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