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ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-36 के निवासी कैलाश ने यूएई में बिताए उन आठ दिनों को याद करते हुए कहा कि वह समय उनकी जिंदगी के सबसे डरावने पलों में से एक था. सायरन, मिसाइल हमलों और आसमान में उड़ते ड्रोन के बीच उन्होंने और उनकी पत्नी ने कई दिन दहशत में गुजारे. हालांकि, भारत में मौजूद उनके परिवार को जब Local 18 पर उनकी खबर दिखाई दी, तो उन्हें काफी हिम्मत मिली और उनका मनोबल बढ़ा.
अबू धाबी पहुंचते ही गूंजने लगे सायरन
कैलाश ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ यूएई पहुंचे थे. जैसे ही वे अबू धाबी एयरपोर्ट पहुंचे, वहां से उन्हें बस के जरिए शहर की ओर जाना था. एयरपोर्ट से निकलते ही रास्ते में कई बार अलर्ट सायरन बजने लगे. उस समय तक उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि अबू धाबी और दुबई में किसी बड़े हमले की आशंका है. करीब एक घंटे की यात्रा के बाद वे अपने होटल पहुंचे. होटल पहुंचकर उन्होंने खाना खाया और थोड़ी देर आराम किया. लेकिन कुछ ही देर बाद वहां मौजूद लोगों से उन्हें पता चला कि शहर में हमला हो चुका है. कैलाश के अनुसार, आसपास के लोगों ने बताया कि कई जगह धमाके हुए हैं और कुछ होटलों के शीशे भी टूट गए हैं. इस खबर के बाद माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. इसी दौरान उनके गाइड ने उन्हें नीचे आने से मना कर दिया और कहा कि अबू धाबी में रहना फिलहाल सुरक्षित नहीं है. गाइड ने उन्हें सलाह दी कि वे तुरंत दुबई के लिए निकल जाएं. इसके बाद वे बस से दुबई के लिए रवाना हो गए.
दुबई में हमलों के अलर्ट से दहशत
कैलाश ने बताया कि दुबई पहुंचने से पहले ही उनके मोबाइल फोन पर कई अलर्ट आने लगे, जिनमें बताया जा रहा था कि दुबई के कई इलाकों में भी हमले हुए हैं और मिसाइलें दागी गई हैं. दुबई पहुंचने पर उन्होंने देखा कि शहर में असामान्य सन्नाटा पसरा हुआ है. इस स्थिति ने उनके मन में डर और बढ़ा दिया.
होटल में पहुंचने के बाद प्रशासन की ओर से लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही थी कि लोग ज्यादा बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें. कैलाश ने बताया कि जब भी वे बाहर जाने या होटल की छत पर जाने की कोशिश करते, तो उन्हें आसमान में ड्रोन दिखाई देते थे. कई बार दूर से धमाकों की आवाज सुनाई देती और कहीं-कहीं से धुआं उठता नजर आता था.
धमाकों के बीच तीन रातों तक नहीं आई नींद
उन्होंने बताया कि इन हालातों के कारण वे और उनकी पत्नी बेहद डरे हुए थे. लगातार तनाव और धमाकों की आवाजों के बीच उन्हें तीन दिन तक ठीक से नींद भी नहीं आई. हर धमाके के साथ ऐसा लगता था जैसे भूकंप आ गया हो. कैलाश के अनुसार, उनकी वापसी की फ्लाइट 3 तारीख को तय थी. लेकिन हमलों के कारण दुबई और अबू धाबी के एयरपोर्ट बंद कर दिए गए और उनकी फ्लाइट रद्द हो गई. इसके बाद उनकी चिंता और बढ़ गई, क्योंकि भारत में उनकी चार छोटी बेटियां थीं, जो लगातार उनके संपर्क में थीं और बेहद परेशान थीं.
आठ दिन बाद ली राहत की सांस
उन्होंने बताया कि वे हर दिन यही उम्मीद करते थे कि शायद अगले दिन फ्लाइट मिल जाएगी, लेकिन कई दिनों तक ऐसा नहीं हो पाया. इस दौरान उन्होंने अपने फोन में कई धमाकों की आवाजें भी रिकॉर्ड कीं और परिवार से लगातार संपर्क में बने रहे. करीब आठ दिन बाद उन्हें जानकारी मिली कि दुबई से करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित रास अल खैमाह के एक छोटे एयरपोर्ट से फ्लाइट मिल सकती है. इसके बाद वे वहां पहुंचे. कैलाश ने बताया कि उस दौरान भी कई बार उनके ऊपर ड्रोन उड़ते दिखाई दिए, जिससे डर का माहौल बना रहा.
फ्लाइट में बैठने के बाद भी बढ़ी बेचैनी
उन्होंने बताया कि फ्लाइट में बैठने और सीट बेल्ट लगाने के बाद भी एक बार फ्लाइट रद्द कर दी गई थी. करीब 45 मिनट तक यात्री विमान में ही बैठे रहे. बाद में अचानक पायलट ने घोषणा की कि विमान तुरंत उड़ान भरेगा और सभी यात्री सीट बेल्ट बांध लें. जब विमान ने आखिरकार उड़ान भरी, तब जाकर उन्हें भरोसा हुआ कि वे सुरक्षित अपने देश लौट रहे हैं.
बेटियां करती रहीं सुरक्षित वापसी की दुआ
कैलाश ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनका परिवार भारत में बेहद चिंतित था. उनकी चारों बेटियां लगातार उनके संपर्क में थीं और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रही थीं. उन्होंने बताया कि जब Local 18 पर उनकी स्थिति से जुड़ी खबर प्रसारित हुई और उनकी बेटियों की बात दिखाई गई, तो इससे परिवार को काफी हिम्मत मिली.
कंट्रोल रूम से लगातार मिलता रहा सहयोग
कैलाश ने कहा कि खबर प्रसारित होने के बाद आसपास के लोग भी उनके घर पहुंचे और बच्चों का मनोबल बढ़ाया. इससे उनके परिवार को यह महसूस हुआ कि वे इस मुश्किल समय में अकेले नहीं हैं. हालांकि कैलाश ने यह भी कहा कि यूएई में फंसे रहने के दौरान उनसे किसी एंबेसी या सरकार की ओर से सीधे तौर पर संपर्क नहीं किया गया. लेकिन ग्रेटर नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने मामले का संज्ञान लिया और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम से कई बार उन्हें फोन कर हालचाल पूछा गया. उन्होंने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कंट्रोल रूम की टीम लगातार संपर्क में रही और मदद का भरोसा देती रही. इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी मेधा रूपम और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया.
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