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El Nino Effect In India: ठंडा ला नीना कमजोर पड़ रहा है और साल के आखिर तक गरम एल नीनो लौट सकता है. यूनाइटेड नेशंस (UN) की संस्था वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) ने एक बेहद डराने वाली रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र को ठंडा करने वाला ‘ला नीना’ प्रभाव अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. इसकी जगह अब ‘एल नीनो’ (El Nino) अपनी दस्तक देने की तैयारी में है. यह खबर भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. एल नीनो का सीधा मतलब है कम बारिश, भीषण गर्मी और सूखे जैसे हालात. अगर यह भविष्यवाणी सच साबित होती है, तो साल 2026 रिकॉर्ड तोड़ गर्म साल बन सकता है. (File Photos : Reuters)
एल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका सबसे बुरा असर भारत के मानसून पर पड़ता है. जब भी एल नीनो एक्टिव होता है, भारत में मानसून की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. इससे देश के कई हिस्सों में सामान्य से बहुत कम बारिश होती है.
खेती-किसानी पूरी तरह मानसून पर टिकी है, ऐसे में अगर बारिश कम हुई तो फसलों की पैदावार गिर जाएगी. अनाज की कमी होने से मार्केट में महंगाई आसमान छूने लगेगी. जानकारों का मानना है कि जुलाई से सितंबर के बीच एल नीनो के एक्टिव होने की 60 परसेंट संभावना है, जो मानसून का पीक सीजन होता है.
WMO की चीफ सेलेस्टे साउलो का कहना है कि 2023-24 का एल नीनो इतिहास के पांच सबसे खतरनाक दौर में से एक था. इसी वजह से साल 2024 अब तक का सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है. अब अगर 2026 के अंत तक यह फिर से लौटता है, तो गर्मी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो सकते हैं.
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भारत के मैदानी इलाकों में हीटवेव यानी लू का प्रकोप और ज्यादा बढ़ जाएगा. मार्च से मई के बीच ही तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान है. इसका सीधा असर लोगों की सेहत और बिजली की डिमांड पर पड़ेगा. शहरों में पानी का संकट गहरा सकता है क्योंकि नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से नीचे गिरेगा.
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का बहुत बड़ा रोल है. एल नीनो की वजह से अगर सूखा पड़ता है, तो चावल, दलहन और गन्ने जैसी फसलों को भारी नुकसान होगा. कम पैदावार का मतलब है किसानों की आमदनी में भारी गिरावट. इसके अलावा, चारे की कमी से डेयरी सेक्टर भी प्रभावित होगा.
सरकार के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि उसे बफर स्टॉक और महंगाई को कंट्रोल करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे. इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि एल नीनो की वजह से होने वाला नुकसान करोड़ों डॉलर में जा सकता है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान की गलतियों की वजह से हो रहा क्लाइमेट चेंज इन प्राकृतिक घटनाओं को और ज्यादा हिंसक बना रहा है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुद्र का तापमान पहले ही बढ़ा हुआ है, ऊपर से एल नीनो का आना जलती आग में घी डालने जैसा है.
यह कॉम्बिनेशन जंगलों में आग, चक्रवात और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं को जन्म देता है. भारत को अब अपनी वाटर मैनेजमेंट पॉलिसी और डिजास्टर मैनेजमेंट को और भी मजबूत करना होगा. हमें सूखे से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू करनी होगी, वरना देर हो सकती है.
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