हंसी का वो जादूगर, जिसने ‘उल्टे चश्मे’ से दिखाई दुनिया, घर-घर में मशहूर हुआ टीवी शो, दर्शकों का बन गया फेवरेट

Date:

[ad_1]

Last Updated:

दुनिया को उल्टे चश्मे से देखना सिखाने वाले मशहूर लेखक और साहित्यकार तारक जनुभाई मेहता की आज पुण्यतिथि है. उन्होंने अपनी कलम से न सिर्फ समाज की कमियों को उजागर किया, बल्कि हंसी-मजाक के जरिए गंभीर बातें कहने का एक नया अंदाज भी पेश किया. 1971 में शुरू हुए उनके कॉलम ‘दुनिया ने उंधा चश्मा’ ने लोकप्रियता के वो कीर्तिमान रचे कि 2008 में इस पर आधारित ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ शो शुरू हुआ, जो आज हर भारतीय घर की पहली पसंद बन चुका है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

तारक जनुभाई मेहता के कॉलम पर बना है फेमस टीवी शो.

नई दिल्ली. गुजराती साहित्य के हास्य सम्राट यानी तारक जनुभाई मेहता का नजरिया दुनिया को देखने का बिल्कुल अलग था. वह समाज की विसंगतियों को अपने ‘उल्टे चश्मे’ से देखते और उन पर ऐसा हल्का-फुल्का व्यंग्य करते थे, जिसमें कभी कड़वाहट नहीं होती थी. उनका स्पष्ट मानना था कि सच्चा हास्य वही है, जो मिठास के साथ सीधे दिल को छुए और होंठों पर मुस्कान लाते हुए इंसान को सोचने पर भी मजबूर कर दे. उनकी इसी मानवीय सोच और बेमिसाल लेखनी ने उन्हें हर उम्र के पाठकों और दर्शकों का चहेता बना दिया. आज 1 मार्च को उनकी पुण्यतिथि है.

तारक मेहता का जन्म 26 दिसंबर 1929 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ. उन्होंने अपनी लेखन यात्रा की शुरुआत गुजराती साहित्य और पत्रकारिता से की. मार्च 1971 में गुजराती साप्ताहिक ‘चित्रलेखा’ में उनका मशहूर कॉलम ‘दुनिया ने उंधा चश्मा’ पहली बार छपा. इस कॉलम में वह रोजमर्रा के सामाजिक, राजनीतिक और पारिवारिक मुद्दों को उल्टे चश्मे से देखते थे. हास्य के जरिए वह गंभीर बातें इतने प्यार से कहते थे कि पाठक हंसते-हंसते सोच में पड़ जाते थे.

तारक मेहता ने लिखीं 80 से ज्यादा किताबें

उनकी लेखनी में व्यंग्य था, लेकिन वह कभी तीखा या आहत करने वाला नहीं था. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैं मुद्दों को उल्टे चश्मे से देखता हूं ताकि लोग हंसते-हंसते सोचें. हास्य कटु नहीं, मिठास भरा होना चाहिए, जो दिल को छूए और बदलाव की प्रेरणा दे.’ यही उनकी लेखन शैली का मूल मंत्र था, जिसने उन्हें गुजराती हास्य साहित्य का चेहरा बनाया. तारक मेहता ने 80 से ज्यादा किताबें लिखीं. इनमें से ज्यादातर उनके कॉलम पर आधारित थीं, जबकि कुछ किताबें विभिन्न अखबारों में छपे लेखों का संकलन थीं. उन्होंने गुजराती थिएटर में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, कई हास्य नाटकों का अनुवाद किया और खुद नाटकों के जरिए हंसी के साथ संदेश पहुंचाया.

साल 2008 में शुरू हुआ ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’

साल 1958 में वह गुजराती नाट्य मंडल से जुड़े. इसके बाद दैनिक ‘प्रजातंत्र’ के डिप्टी एडिटर रहे. बाद में भारत सरकार के सूचना और प्रसारण विभाग में कंटेंट राइटर और अधिकारी के रूप में काम किया. इस दौरान भी उनकी हास्य लेखनी जारी रही. साल 2008 में असित कुमार मोदी ने उनके इसी कॉलम ‘दुनिया ने उंधा चश्मा’ पर आधारित धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ शुरू किया. सोनी सब पर प्रसारित यह शो भारत के सबसे लंबे चलने वाले कॉमेडी सीरियलों में शुमार है.

साहित्य के क्षेत्र में पद्म श्री से हुए थे सम्मानित

गोकुलधाम सोसायटी के किरदारों के माध्यम से रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी-छोटी बातों को हास्य के साथ दिखाया जाता है. शो में तारक मेहता का किरदार शैलेश लोढ़ा ने निभाया है. इस शो ने उनकी विरासत को पूरे देश तक पहुंचाया. तारक मेहता के योगदान को भारत सरकार ने भी सराहा. साल 2015 में उन्हें साहित्य के क्षेत्र में पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया. उनका निधन 1 मार्च 2017 को लंबी बीमारी के बाद अहमदाबाद में 87 वर्ष की आयु में हुआ, लेकिन उनकी कलम आज भी जिंदा है और ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के जरिए गुदगुदाती है.

About the Author

Kamta Prasad

साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related