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खीरा कम समय में तैयार होने वाली फसल है. बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. गर्मियों में डिमांड बढ़ जाती है. खीरे की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे सही है. लोकल 18 से बाराबंकी के सहेलियां गांव के रहने वाले किसान प्रदीप कुमार बताते हैं कि इस बार उन्होंने करीब ढाई बीघे में खीरा उगाया है. एक फसल पर 60 से 70 हजार रुपये मुनाफा आराम से हो जाता है. लागत 10 रुपये तक आती है. इसकी खेती वे मल्च विधि से करते हैं. इससे खीरे की पैदावार अधिक होती है.
बाराबंकी. सब्जियों की खेती किसानों की किस्मत बदल रही है. पारंपरिक फसलों में मौसम और बीमारियों का खतरा बना रहता है, जिससे किसानों को कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है. इसी के चलते अब किसान खीरे जैसी फसलों की खेती पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. खीरे की खेती कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी हमेशा बनी रहती है. खासकर गर्मियों के मौसम में खीरे की डिमांड काफी बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अच्छी कीमत मिलती है. बाराबंकी जिले के कई किसान अब बड़े पैमाने पर खीरे की अगेती खेती कर रहे हैं. इससे उनकी आमदनी में तगड़ा इजाफा हो रहा है.
खीरे की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. इसकी अच्छी पैदावार लेने के लिए अच्छी जल निकास वाली भूमि होनी चाहिए. जनपद बाराबंकी के सहेलियां गांव के रहने वाले किसान प्रदीप कुमार पारंपरिक फसलों की जगह खीरे की खेती की शुरू की. इसमें उन्हें अच्छा फायदा देखने को मिला. आज वह करीब ढाई बीघे में खीरा उगा रहे हैं. एक फसल पर 60 से 70 हजार रुपये मुनाफा आराम से हो जाता है.
लोकल 18 से किसान प्रदीप कुमार ने बताया कि वे सीजन में होने वाली फसलों की अगेती खेती ज्यादा करते हैं. इस समय मेरे पास करीब ढाई बीघा में खीरा लगा है. लागत एक बीघे में 10 से 15 हजार रुपये आती है. मुनाफा 60 से 70 रुपये तक हो जाता है. गर्मियों के दिनों में इसकी डिमांड भी अधिक रहती है और दाम भी अच्छे मिलते हैं. इसे एक बार लगाने के बाद दो से तीन महीने तक फसल मिलती रहती है. इसकी खेती हम मल्च तकनीक से करते हैं. इससे खीरे की पैदावार अधिक होती है.
कैसे उगाते हैं
किसान प्रदीप के मुताबिक, इसकी खेती काफी आसान है. पहले खेत की गहरी जुताई की जाती है. फिर खेत में मेड़ बनाकर उसपर पन्नी बिछाई जाती है. पन्नी में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छेद करके खीरे के बीज की बुआई करते हैं. जब पौधा थोड़ा बड़ा हो जाता है फिर इसमें हम बांस को लगा कर डोरी तार के सहारे खीरे के पौधे को बांध देते हैं. इससे खीरे की बेल डोरी पर फैल जाती है और फसल की अधिक पैदावार होती है. रोग लगने का खतरा कम रहता है. बुवाई करने के दो महीने बाद फसल निकलना शुरू हो जाती है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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