12वीं पास का कमाल! 3 दिन की ट्रेनिंग से हर महीने छाप रहे नोट, होटलों में जबरदस्त डिमांड

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12वीं पास का कमाल! 3दिन की ट्रेनिंग से हर महीने छाप रहे नोट, होटलों में डिमांड

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Vermicompost Business Success Story: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के युवक कृपाल पाल ने केंचुआ खाद यानी वर्मी कंपोस्ट का बिजनेस शुरू कर अच्छी कमाई का रास्ता बना लिया है. सिर्फ तीन दिन की ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने इस काम की शुरुआत की और आज हर तीन महीने में 20 से 30 हजार रुपये तक कमा रहे हैं. वे 10 से 12 प्लास्टिक बेड में केंचुआ खाद तैयार करते हैं और इसे किसानों के साथ-साथ होटलों तक सप्लाई करते हैं. इसके अलावा मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी खाद की बिक्री कर रहे हैं. जानिए कैसे कम लागत में शुरू होने वाला यह वर्मी कंपोस्ट बिजनेस गांव के युवाओं के लिए शानदार कमाई का जरिया बन सकता है.

Vermi Compost Khad Business. अगर आप कम पैसे में ऐसा काम शुरू करना चाहते हैं जिससे गांव में रहकर भी अच्छी कमाई हो सके, तो वर्मी कंपोस्ट यानी केंचुआ खाद का बिजनेस आपके लिए बढ़िया विकल्प बन सकता है. इस काम की खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं होती. बस थोड़ा प्रशिक्षण और मेहनत चाहिए.

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के रहने वाले कृपाल पाल इसी बिजनेस से कमाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से वे केंचुआ खाद बनाकर बेच रहे हैं और इससे हर तीन महीने में अच्छी कमाई हो जाती है.

12वीं के बाद शुरू किया अपना काम
कृपाल पाल बताते हैं कि उन्होंने कृषि संकाय से 12वीं तक पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने आगे पढ़ाई तो नहीं की, लेकिन खेती से जुड़ा कुछ नया करने की इच्छा थी. इसी दौरान उन्हें वर्मी कंपोस्ट के बारे में पता चला. उन्होंने छतरपुर जिले के निवाड़ी गांव में प्रगतिशील किसान चितरंजन चौरसिया के यहां जाकर 3 दिन का प्रशिक्षण लिया. प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने खुद ही केंचुआ खाद बनाना शुरू कर दिया.

ऐसे तैयार होती है केंचुआ खाद
कृपाल बताते हैं कि केंचुआ खाद बनाने का काम बहुत मुश्किल नहीं है. इसे बनाने के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत भी नहीं पड़ती. आमतौर पर दो लोग मिलकर आसानी से यह काम कर सकते हैं. सिर्फ जब खाद को छानने का काम होता है, तब 3 से 4 लोगों की जरूरत पड़ती है. वे बताते हैं कि फिलहाल वे 10 से 12 प्लास्टिक बेड में केंचुआ खाद तैयार करते हैं. एक प्लास्टिक बेड में करीब 5 किलो केंचुए डाले जाते हैं. लगभग 3 महीने में खाद तैयार हो जाती है. एक प्लास्टिक बेड से करीब 6 से 6.5 क्विंटल केंचुआ खाद बन जाती है. इस तरह 3 महीने बाद कुल मिलाकर 20 से 30 क्विंटल अच्छी क्वालिटी की खाद तैयार हो जाती है.

होटलों और किसानों को करते हैं सप्लाई
कृपाल बताते हैं कि अब धीरे-धीरे किसान भी केंचुआ खाद के फायदे समझने लगे हैं. फिलहाल लगभग 20 से 25 फीसदी किसान ही इस खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनकी बनाई हुई खाद राजगढ़ के तीन होटलों में भी सप्लाई होती है. इसके अलावा वे मीशो प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर भी लेते हैं.

ऐसे होती है कमाई
कृपाल बताते हैं कि अगर वे खाद को फुटकर में बेचते हैं तो करीब 20 रुपये किलो के हिसाब से बेचते हैं. वहीं थोक में इसकी कीमत 15 से 20 रुपये किलो तक होती है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वे इसे 60 से 70 रुपये किलो तक बेचते हैं, क्योंकि इसमें ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और कई बार ऑर्डर कैंसिल होने का खर्च भी जुड़ जाता है.

कम खर्च में अच्छा मुनाफा
कृपाल के मुताबिक इस बिजनेस में सबसे बड़ा खर्च सिर्फ केंचुए खरीदने का होता है. एक बार काम शुरू हो जाए तो बाद में खर्च बहुत कम रह जाता है. वे बताते हैं कि हर तीन महीने में आसानी से 20 से 30 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है. उनका मानना है कि यह बिजनेस खासतौर पर गांव के युवाओं के लिए बहुत अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसे कम लागत में शुरू करके धीरे-धीरे बड़ा बनाया जा सकता है.

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Shweta Singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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