गुलमर्ग में बर्फ से ढकी वादियों के बीच आज खेलो इंडिया विंटर गेम्स का दूसरा दिन भी उत्साह और रोमांच से भरा रहा. कड़ाके की ठंड और करीब चार हजार फीट की ऊंचाई पर नन्हे खिलाड़ी जिस आत्मविश्वास के साथ स्कीइंग करते दिखे, उसने हर किसी को हैरान कर दिया.
सुबह से ही गुलमर्ग की ढलानों पर बच्चों की चहल-पहल शुरू हो गई थी. छोटे-छोटे स्की सूट पहने बच्चे, आंखों पर गॉगल्स और हाथों में पोल लिए बर्फीली ढलानों पर फिसलते नजर आए. ठंडी हवाएं जरूर तेज थीं, लेकिन बच्चों के हौसले उससे कहीं ज्यादा मजबूत दिखे.
माता-पिता का सपना, बच्चों का जुनून
यहां ऐसे कई खिलाड़ी हैं जिनके माता-पिता खुद कभी विंटर गेम्स में हिस्सा लेते थे. अब उम्र या परिस्थितियों की वजह से वे प्रतियोगिता में नहीं उतर सकते, लेकिन अपने अधूरे सपनों को बच्चों के जरिए पूरा होते देखना चाहते हैं.
एक अभिभावक ने कहा, हम पहले खेलते थे, अब हमारे बच्चे खेल रहे हैं. हमारा अनुभव और उनका जोश मिलकर उन्हें आगे ले जाएगा.
मुश्किल हालात, लेकिन मजबूत इरादे
गुलमर्ग की बर्फीली ढलानें जितनी खूबसूरत हैं, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी. कम तापमान और ऊंचाई पर सांस लेना भी आसान नहीं होता. इसके बावजूद बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया.
कोचों का कहना है कि इस बार प्रतिभा पहले से ज्यादा निखरकर सामने आई है. नियमित अभ्यास और बेहतर सुविधाओं का असर साफ दिखाई दे रहा है.
भविष्य के चैंपियनों की झलक
खेलो इंडिया जैसे मंच ने देश के दूर-दराज इलाकों के बच्चों को भी मौका दिया है. यहां सिर्फ मेडल की दौड़ नहीं, बल्कि भविष्य के चैंपियन तैयार हो रहे हैं.
गुलमर्ग की बर्फीली वादियों में आज जो छोटे-छोटे खिलाड़ी स्कीइंग कर रहे हैं, वही कल अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं. बर्फ के बीच बच्चों की मुस्कान और आत्मविश्वास यही संदेश दे रहा है विंटर गेम्स का यह कारवां अब रुकने वाला नहीं है.


