Srinagar Airport Expansion Map: समर टूरिज्म सीजन या स्नोफॉल के समय अगर श्रीनगर एयरपोर्ट से ट्रैवल किया है तो आपने लंबी लाइनों, क्राउडेड वेटिंग एरियाज और सिक्योरिटी चेक में लगने वाले एक्स्ट्रा टाइम का सामना जरूर किया होगा. श्रीनगर घूमने आने वाले टूरिस्ट्स हों, बिजनेस ट्रैवलर्स हों या फिर लोकल पैसेंजर्स, सभी के लिए यह एयरपोर्ट एक्सपीरियंस कई बार काफी तकलीफदेह बन जाता है. लेकिन अब यह तस्वीर बदलने वाली है.
दअरसल, केंद्र सरकार ने ₹1,677 करोड़ के मेगा एक्सपैंशन प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक रीजनल एयरपोर्ट नहीं, बल्कि नॉर्थ इंडिया का मॉडर्न एविएशन गेटवे बनने की दिशा में आगे बढ़ जाएगा. यह प्रोजेक्ट पैसेंजर ट्रैवल एक्सपीरियंस, कंफर्ट और फैसिलिटीज में बड़ा बदलाव लेकर आने वाला है. एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की तरह से किए जाने वाले इस एक्सपैंशन से जम्मू-कश्मीर के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई मिलेगी और रीजनल डेवलपमेंट को तेजी मिलेगी.
एक्सपेंशन के बाद श्रीनगर एयरपोर्ट पर क्या-क्या बदल जाएगा
- फिलहाल एयरपोर्ट का टर्मिनल बिल्डिंग एरिया लगभग 20,659 वर्गमीटर है, जो लगातार बढ़ती यात्री संख्या के सामने छोटा साबित हो रहा था. नए प्रस्ताव के तहत इसे बढ़ाकर 71,500 वर्गमीटर किया जाएगा.
- इस एक्सपैंशन का सीधा असर पैसेंजर कंजेशन पर पड़ेगा. अभी पीक ऑवर में एयरपोर्ट केवल 950 पैसेंजर्स को संभाल सकता है, जबकि नए टर्मिनल के बाद यह क्षमता बढ़कर 2,900 पैसेंजर्स प्रति घंटा हो जाएगी.
- टर्मिनल की पैसेंजर कैपेसिटी बढ़ने से चेक-इन, सिक्योरिटी और बोर्डिंग के दौरान लंबी कतारों से राहत मिलेगी. बता दें कि वर्तमान में एयरपोर्ट सालाना लगभग 3 मिलियन पैसेंजर्स को संभालता है. लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 10 मिलियन पैसेंजर्स प्रति वर्ष हो जाएगी.
- नए मास्टर प्लान में रनवे में किसी बदलाव का प्रस्ताव नहीं है. मौजूदा रनवे 3,658 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है, जो पहले से ही बड़े प्लेंस के ऑपरेशन के लिए सक्षम माना जाता है. रनवे बढ़ाने की बजाय पार्किंग बे और ग्राउंड हैंडलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जाएगा.
- मौजूदा समय में एयरपोर्ट पर 9 एप्रन बे हैं, जिनमें 1 कोड-E और 8 कोड-C श्रेणी के हैं. नए प्रस्ताव के तहत 6 अतिरिक्त पार्किंग बे (A-321 प्लेन के लिए) जोड़े जाएंगे. इससे एक साथ ज्यादा प्लेन्स की पार्किंग संभव होगी, जिससे फ्लाइट टर्नअराउंड टाइम कम होगा.
- पैसेंजर्स की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मल्टी-लेवल कार पार्किंग (MLCP) भी बनाई जाएगी. 35,872 वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाली यह सुविधा करीब 1,000 कारों और 10 बसों की पार्किंग क्षमता रखेगी.
- अभी तक एयरपोर्ट पर कोई गेट सिक्योरिटी प्लाजा मौजूद नहीं है, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत इंट्री गेट पर 1,775 वर्गमीटर क्षेत्र में अत्याधुनिक गेट सिक्योरिटी प्लाजा बनाया जाएगा. यहां वाहनों और पैसेंजर्स की शुरुआती सुरक्षा जांच होगी.
- नए टर्मिनल के बाह सिक्योरिटी प्लाजा बनने से टर्मिनल अंदरुनी क्षेत्र में भीड़ कम होगी और सुरक्षा प्रक्रिया अधिक तेज, व्यवस्थित और सुरक्षित बन सकेगी. इससे एयरपोर्ट के बाहर लगने वाले ट्रैफिक जाम में भी कमी आने की उम्मीद है.
| फैसेलिटीज | मौजूदा टर्मिनल | प्रस्तावित टर्मिनल |
| टर्मिनल बिल्डिंग एरिया | 20,659 वर्ग मीटर | 71,500 वर्ग मीटर |
| पीक ऑवर पैसेंजर क्षमता | 950 यात्री प्रति घंटा | 2,900 यात्री प्रति घंटा |
| सालाना यात्री क्षमता (MPPA) | 3 मिलियन यात्री प्रति वर्ष | 10 मिलियन यात्री प्रति वर्ष |
| रनवे | 3658 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा | नए प्रस्ताव में रनवे में कोई बदलाव नहीं |
| एप्रन (विमान पार्किंग एरिया) | 9 पार्किंग बे (कोड-E और 8 कोड-C) | A-321 विमानों के लिए 6 अतिरिक्त पार्किंग बे |
| मल्टी लेवल कार पार्किंग (MLCP) | कोई सुविधा नहीं | 35,872 वर्ग मीटर क्षेत्र में MLCP1000 कारों की पार्किंग10 बसों के लिए सर्फेस पार्किंग |
| गेट सिक्योरिटी प्लाजा | कोई व्यवस्था नहीं | एयरपोर्ट एंट्री पर 1,775 वर्ग मीटर का सिक्योरिटी प्लाजा |
| AAI कर्मचारियों के लिए आवास | कुल 54 क्वार्टर हैं, जिनमें 6 गेस्ट हाउस के रूप में और 1 मेस के रूप में इस्तेमाल हो रहा है | 48 सिंगल रूम क्वार्टर48 डबल रूम क्वार्टर64 गेस्ट हाउस ब्लॉक (G+8 / S+8 इमारतें) |
| CISF बैरक | अस्थायी आवास, एयरपोर्ट परिसर और आसपास अलग-अलग जगहों पर | 2 टावर (G+8) — 1184 पुरुष जवानों के लिए1 टावर (G+4) — 160 महिला जवानों के लिए9 डॉग्स के लिए डॉग केनल |
अभी श्रीनगर एयरपोर्ट पर पैसेंजर्स को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
श्रीनगर एयरपोर्ट इस समय हर साल लगभग 44.7 लाख पैसेंजर्स को हैंडल कर रहा है, जबकि इसकी मौजूदा क्षमता इससे काफी कम है. करीब 28,500 एयरक्राफ्ट मूवमेंट्स और 10,000 मीट्रिक टन कार्गो ऑपरेशन के कारण एयरपोर्ट लगातार व्यस्त रहता है. खासकर टूरिस्ट सीजन के दौरान स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाती है. पैसेंजर्स को बोर्डिंग से पहले लंबा इंतजार करना पड़ता है, सिक्योरिटी चेक पर भारी भीड़ रहती है और अराइवल एरिया में कंजेशन आम समस्या बन चुकी है. पार्किंग की कमी और सीमित स्पेस के कारण पैसेंजर्स का ट्रैवल एक्सपीरियंस प्रभावित होता रहा है. यही कारण है कि एयरपोर्ट विस्तार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
नए विस्तार प्रोजेक्ट के बाद पैसेंजर क्षमता और ट्रैवल एक्सपीरियंस में क्या बदलाव आएगा?
नई योजना के लागू होने के बाद श्रीनगर एयरपोर्ट की पैसेंजर हैंडलिंग क्षमता चार गुना तक बढ़ जाएगी. अभी जहां सालाना क्षमता करीब 2.5 से 3 मिलियन पैसेंजर्स की है, उसे बढ़ाकर 10 मिलियन पैसेंजर्स तक किया जाएगा. पीक ऑवर में वर्तमान 950 पैसेंजर्स की क्षमता बढ़कर लगभग 2,900 पैसेंजर्स तक पहुंच जाएगी. इसका सीधा फायदा पैसेंजर्स को कम भीड़, तेज चेक-इन प्रक्रिया और स्मूथ बोर्डिंग के रूप में मिलेगा. पूरा ट्रैवल फ्लो अधिक व्यवस्थित होगा, जिससे एयरपोर्ट पर बिताया जाने वाला समय कम होगा और यात्रा ज्यादा आरामदायक व सुविधाजनक बन सकेगी.
नए टर्मिनल बिल्डिंग में क्या खास बदलाव देखने को मिलेंगे?
मौजूदा टर्मिनल का एरिया लगभग 20,659 स्क्वायर मीटर है, जिसे बढ़ाकर 71,500 स्क्वायर मीटर का आधुनिक टर्मिनल बनाया जाएगा. यह सिर्फ आकार में बड़ा नहीं होगा, बल्कि पैसेंजर्स को बेहतर सुविधाएं भी देगा. इसमें स्पेशियस वेटिंग लाउंज, आधुनिक बैगेज हैंडलिंग सिस्टम, ज्यादा बोर्डिंग गेट्स और अराइवल-डिपार्चर मूवमेंट के लिए बेहतर डिजाइन शामिल होगा. खास बात यह है कि टर्मिनल में कश्मीरी संस्कृति की झलक भी दिखाई देगी. पारंपरिक वुडवर्क, स्थानीय कारीगरी और क्षेत्रीय आर्किटेक्चर के एलिमेंट्स शामिल किए जाएंगे ताकि पैसेंजर्स को एयरपोर्ट पर उतरते ही कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान महसूस हो.
नई योजना में सुरक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत किया जाएगा?
एयरपोर्ट सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अहम बदलाव किए जा रहे हैं. अभी सीआईएसएफ कर्मियों के लिए अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन नए प्लान के तहत पुरुष और महिला कर्मियों के लिए अलग-अलग आधुनिक बैरक्स बनाए जाएंगे. साथ ही के-9 स्क्वॉड के लिए विशेष डॉग केनेल भी तैयार किया जाएगा. इससे सुरक्षा निगरानी अधिक प्रभावी होगी और किसी भी इमरजेंसी स्थिति में प्रतिक्रिया समय बेहतर होगा. मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का सीधा फायदा पैसेंजर्स को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा अनुभव के रूप में मिलेगा.
इस एयरपोर्ट विस्तार का जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह परियोजना केवल इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड नहीं बल्कि आर्थिक विकास से भी सीधे जुड़ी है. फिलहाल पर्यटन राज्य की जीएसडीपी में लगभग 7 प्रतिशत योगदान देता है, जो बेहतर कनेक्टिविटी के बाद 10 से 12 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. अभी हर साल करीब 1.7 करोड़ पर्यटक आते हैं और अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 2.7 से 3 करोड़ तक पहुंच सकती है. ज्यादा फ्लाइट्स और बेहतर एयरपोर्ट सुविधाएं होटल, ट्रैवल, बिजनेस और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा देंगी, जिससे स्थानीय रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे.
कार्गो और स्थानीय कारोबारियों को इस परियोजना से क्या लाभ मिलेगा?
बेहतर कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए कश्मीर के स्थानीय उत्पाद जैसे सेब, केसर, ड्राई फ्रूट्स, हैंडीक्राफ्ट और हैंड-नॉटेड कार्पेट को देश और विदेश के बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा. एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने से लॉजिस्टिक्स समय कम होगा और उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी. इससे किसानों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा और स्थानीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जम्मू-कश्मीर के विकास के संकल्प और अनुच्छेद 370 हटने के बाद श्रीनगर एयरपोर्ट जम्मू और कश्मीर के नए विकास और बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा है. पिछले साल मैंने खुद श्रीनगर एयरपोर्ट जाकर वहां चल रहे विस्तार कार्यों की समीक्षा की थी. अगले दो वर्षों में श्रीनगर में एक आधुनिक और अत्याधुनिक टर्मिनल बनाया जाएगा. इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी, स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और पूरे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी. – किंजरापु राम मोहन नायडू, सिविल एविएशन मिनिस्टर


