[ad_1]
Last Updated:
हाल ही में उन्होंने RS Mother International School के हॉस्टल में पहुंचकर छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया. उनका मानना है कि नई पीढ़ी के मन और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें मोबाइल के आभासी संसार से निकालकर प्रकृति और पुस्तकों से जोड़ना आवश्यक है.
सीतामढ़ी: डिजिटल दौर में जहां बच्चों का बचपन मोबाइल स्क्रीन तक सिमटता जा रहा है, वहीं बिहार के सीतामढ़ी जिले में ‘कला-संगम’ के बैनर तले एक सराहनीय सामाजिक पहल की शुरुआत हुई है. प्रख्यात कवि और गीतकार गीतेश पिछले तीन वर्षों से बच्चों और किशोरों को ‘नोमोफोबिया’ जैसी गंभीर समस्या से बचाने के अभियान में जुटे हैं. कड़ाके की ठंड और स्कूलों की छुट्टियों के बावजूद उनका मिशन लगातार जारी है. हाल ही में उन्होंने RS Mother International School के हॉस्टल में पहुंचकर छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया. उनका मानना है कि नई पीढ़ी के मन और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें मोबाइल के आभासी संसार से निकालकर प्रकृति और पुस्तकों से जोड़ना आवश्यक है.
मनोरंजक अंदाज में जागरूकता
गीतेश बच्चों से पारंपरिक भाषणों के बजाय गीत, कविताओं और रोचक संवादों के माध्यम से जुड़ते हैं. उनकी पंक्ति ‘बच्चे फूल होते हैं, खेलने के लिए धूप-हवा-पानी चाहिए. मोबाइल के मौसम से झुलस न जाएं, थोड़ी सी निगरानी चाहिए’ बच्चों के बीच लोकप्रिय हो चुकी है. वे छात्रों को प्रेरित करते हैं कि मोबाइल को जरूरत तक सीमित रखें, उसे जीवन का केंद्र न बनाएं. वे कहते हैं, मोबाइल दूर रखो और गूगल पर दूसरों को खोजने के बजाय खुद को इतना सक्षम बनाओ कि दुनिया तुम्हें खोजे. खास बात यह है कि वे स्वयं साधारण कीपैड फोन का उपयोग करते हैं, ताकि अपने संदेश को व्यवहार से भी साबित कर सकें.
नोमोफोबिया: बढ़ती चिंता
गीतेश बताते हैं कि ‘नोमोफोबिया’ यानी मोबाइल फोन पास न होने पर घबराहट और असुरक्षा की भावना, बच्चों में तेजी से बढ़ रही है. उनका मानना है कि इसका समाधान केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि साहित्य, संवाद और सकारात्मक मार्गदर्शन से संभव है. अब तक वे जिले के विभिन्न संस्थानों में 2500 से अधिक बच्चों को जागरूक कर चुके हैं. इनमें से लगभग 1000 बच्चों ने अपने स्क्रीन टाइम में कमी भी की है. वे केवल एक बार जागरूकता कार्यक्रम कर रुकते नहीं, बल्कि दोबारा जाकर बच्चों की प्रगति की समीक्षा भी करते हैं.
समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
स्कूल के संचालक सत्येंद्र सिंह ने कहा कि आज जब मोबाइल बच्चों की सबसे बड़ी लत बन गया है, ऐसे में गीतेश का प्रयास समाज के लिए प्रेरणास्रोत है. इस मुहिम से बच्चों में आत्मअनुशासन, एकाग्रता और रचनात्मकता बढ़ी है. सीतामढ़ी से शुरू हुआ यह अभियान अब एक व्यापक सामाजिक संदेश बनता जा रहा है बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें मोबाइल की लत से दूर कर खेल, प्रकृति और पुस्तकों की ओर लौटाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
About the Author
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
[ad_2]
Source link
