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Vastu Tips For New Home Direction: अपना सपनों का आशियाना बनाते समय केवल ईंट-पत्थर ही नहीं, बल्कि सही दिशाओं का चयन भी अनिवार्य है. सनातन परंपरा में वास्तुशास्त्र का विशेष महत्व है, क्योंकि दिशाहीन निर्माण मानसिक अशांति और नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है. मधुबनी के ज्योतिषाचार्य अर्जुन झा के अनुसार, घर की बनावट आपकी प्रगति और स्वास्थ्य को सीधे प्रभावित करती है. वास्तु के नियमों के अनुसार, घर के हर हिस्से के लिए एक निश्चित कोना निर्धारित है. रसोई घर हमेशा आग्नेय कोण (पूर्व और दक्षिण के मध्य) में बनाना चाहिए. दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार या रसोई अशुभ मानी जाती है. देवालय या घर का मंदिर हमेशा ईशान कोण (पूर्व और उत्तर के मध्य) में होना चाहिए. जहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. शौचालय के लिए दक्षिण और पश्चिम के मध्य का कोना सबसे उपयुक्त है. उत्तर और पश्चिम के मध्य भाग में बेडरूम या जल स्रोत बनाना शुभ फलदायी होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करना या बैठना जीवन में तेज और शक्ति लाता है. हालांकि वास्तु का पालन व्यक्तिगत श्रद्धा का विषय है, लेकिन सुख-शांति के लिए इन ‘गोल्डन रूल्स’ को अपनाना फायदेमंद साबित हो सकता है.
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