औषधि से भरपूर महुआ, हड्डियों की मजबूती और शरीर की ताकत के लिए है वरदान

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Mahua Benefits: आयुर्वेद में महुआ को बेहद लाभकारी और औषधीय गुणों से भरपूर फल माना गया है. आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह शरीर में आयरन, कैल्शियम, जिंक और पोटैशियम जैसे आवश्यक तत्वों की पूर्ति कर हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. एनीमिया, मेनोपॉज, जोड़ों के दर्द और माताओं में दूध की कमी जैसी समस्याओं में भी महुआ लाभदायक बताया जाता है. हालांकि इसकी तासीर गर्म होने के कारण इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए और किसी भी औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है. रिपोर्ट- आशीष कुमार

महुआ एक ऐसा फल है, जिसे आयुर्वेद में बेहद लाभकारी और औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह फल शरीर में आयरन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट, जिंक और पोटैशियम जैसे तत्वों की पूर्ति करता है. साथ ही मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती देता है.

माताओं में दूध की कमी, पुरुषों में शारीरिक कमजोरी, कमजोर हड्डियां और हिलते दांत जैसी कई समस्याओं में महुआ लाभदायक साबित हो सकता है. आज हम आपको आयुर्वेदाचार्य के हवाले से महुआ के इन गुणों और इसके उपयोग के तरीकों की जानकारी दे रहे हैं.

आयुर्वेद में महुआ को औषधि माना गया है. पिछले 45 वर्षों से आयुर्वेदाचार्य के रूप में कार्य कर रहे बेतिया के डॉ. भुवनेश पांडे बताते हैं कि महुआ को जितनी पहचान नशा बढ़ाने वाले फल के रूप में मिली है, उससे कहीं अधिक पहचान एक औषधि के रूप में भी है. एनीमिया, मेनोपॉज, जोड़ों के दर्द और ब्रेस्ट मिल्क की कमी से परेशान महिलाओं के लिए यह अमृत समान है. स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका सेवन पूरी, खीर या हलवा सहित अन्य तरीकों से किया जा सकता है.

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फागुन-चैत में पेड़ की पत्तियां झड़ जाने के बाद महुआ के पेड़ पर सफेद रंग के फूल लगते हैं. जिन्हें इसके गुणों की जानकारी होती है, वे महुआ के पेड़ की छाल को दवा के रूप में और फलों को भोजन के रूप में उपयोग करते हैं.

आयुर्वेदाचार्य के अनुसार जिन महिलाओं में एनीमिया की समस्या अधिक है, वे महुआ का सेवन कर सकती हैं. इसके अलावा ब्रेस्ट मिल्क की कमी से जूझ रही महिलाओं को भी महुआ का सेवन करना चाहिए. यह माताओं में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होता है.

चूंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. फल के रूप में इसका सेवन सुबह और शाम दूध के साथ ढाई से पांच ग्राम तक की मात्रा में करना चाहिए. इसी प्रकार यदि आप इसका सेवन खीर, हलवा या पूरी के रूप में करते हैं, तो ध्यान रहे कि इनमें इसकी मात्रा 10 से 25 ग्राम तक ही होनी चाहिए. बताई गई मात्रा के अनुसार नियमित रूप से सेवन करने से एक महीने के भीतर माताओं में दूध का उत्पादन बढ़ने लगता है.

यहां बतायी गई दवा, औषधि और स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी जानकारी एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं है. हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है, इसलिए किसी भी चीज का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें. इससे नुकसान से बचा जा सकता है.

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