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कानपुर के छोटे और मध्यम उद्योगों में अब एक नया बदलाव साफ दिखाई दे रहा है. जिस काम के लिए पहले अलग कर्मचारी रखना जरूरी समझा जाता था, वही काम अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए बेहद कम खर्च में पूरा हो रहा है. एमएसएमई सेक्टर के लिए यह तकनीक किसी बड़े सहारे से कम नहीं है.
छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या सीमित बजट और कम संसाधन होते हैं. हर छोटे-बड़े काम के लिए अलग स्टाफ रखना, उसे वेतन देना और पूरे काम की निगरानी करना आसान नहीं होता. खासकर डेटा एंट्री, स्टॉक मेंटेनेंस, बिलिंग, टैक्स से जुड़े रिकॉर्ड और रोजमर्रा के कागजी काम में काफी समय और पैसा खर्च हो जाता था. कई बार छोटी-सी गलती से नुकसान भी उठाना पड़ता था.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल से हुआ काम आसान
अब एआई टूल्स इन कामों को काफी आसान बना रहे हैं. डिजिटल सिस्टम के जरिए स्टॉक अपने आप अपडेट हो रहा है, बिल तुरंत तैयार हो रहे हैं और महीने भर की रिपोर्ट कुछ ही मिनटों में मिल जा रही है. इससे न सिर्फ खर्च कम हुआ है, बल्कि काम की रफ्तार भी बढ़ी है.
उद्यमी अब्दुल अली बताते हैं, “पहले हमें सिर्फ हिसाब-किताब और कागजी काम के लिए अलग कर्मचारी रखना पड़ता था. हर महीने वेतन और दूसरे खर्च मिलाकर बजट पर दबाव पड़ता था. अब एआई टूल्स से वही काम बेहद कम लागत में हो रहा है. जिस काम में पहले 100 रुपये तक खर्च हो जाता था, अब वही करीब 10 रुपये में पूरा हो रहा है. लगभग 90 प्रतिशत तक लागत कम हो गई है.”
हर चीज हुई डिजिटल
उद्यमियों का कहना है कि अब सबसे बड़ी राहत यह है कि घंटों फाइलें खंगालने की जरूरत नहीं पड़ती. सिस्टम खुद ही डेटा संभाल लेता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत रिपोर्ट दे देता है. इससे वे अपने कारोबार को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं.
उद्योगों को मिला फायदा
एआई के इस्तेमाल से छोटे उद्योगों को कई और फायदे भी मिल रहे हैं. मशीनें अब बिक्री का रिकॉर्ड देखकर भविष्य की मांग का अंदाजा लगा रही हैं. इससे कच्चा माल समय पर मंगाया जा रहा है और स्टॉक की कमी या अधिक स्टॉक की समस्या कम हो रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह तकनीक का उपयोग बढ़ता रहा, तो कानपुर का एमएसएमई सेक्टर आने वाले समय में बड़ी औद्योगिक इकाइयों की तरह प्रतिस्पर्धा कर सकेगा. कम लागत, तेज काम और बेहतर प्रबंधन की वजह से छोटे उद्योगों का मुनाफा बढ़ेगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है. यह तकनीक छोटे उद्यमियों के लिए भी ताकत बनती जा रही है. एआई ने सच में उद्योगपतियों का नया ‘डिजिटल मुंशी’ बनकर काम को आसान और सस्ता बना दिया है.
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