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बहुजन समाज पार्टी ने सभी जिलों की कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि 15 मार्च को लखनऊ पहुंचे और विशाल कार्यक्रम में न सिर्फ अपनी सहभागिता पेश करें बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गांव-गांव जाकर कैडर को और ज्यादा मजबूत करने की कवायद में जुट जाएं.
15 मार्च को सपा-बसपा का प्रोग्राम.
लखनऊः उत्तर प्रदेश में इस साल पंचायत चुनाव और अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में सभी राजनीतिक दल एक बार फिर से अपनी जोर आजमाइश करने में लगे हुए हैं. लेकिन इन सबके बीच जो पार्टी सबसे अधिक अपने आप को ताकतवर बनाने की कोशिश कर रही है, वह है बहुजन समाज पार्टी यानी कि मायावती वाली बसपा. पिछले कुछ विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को देखते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती नई रणनीति के साथ इस बार मैदान में उतर रही हैं. यही वजह है कि किसी भी कार्यक्रम को वह बड़े स्तर पर करा रही हैं.
लखनऊ कूच से क्या हासिल होगा बसपा को
इस बीच सवाल यह उठता है कि आगामी 15 मार्च को बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम की जयंती के अवसर पर लखनऊ कूच करने से बसपा क्या करना चाहती है हासिल ? कांशीराम स्मारक स्थल पर विशाल कार्यक्रम आयोजित करने के पीछे का क्या है सियासी मकसद. कार्यकर्ताओं से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान क्यों किया गया है.
15 मार्च को सभी जिलों से कार्यकर्ता आएंगे लखनऊ
2027 का विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है बहुजन समाज पार्टी लगातार सक्रिय होती हुई नजर आ रही है. बहुजन समाज पार्टी के दलित चिंतकों के जन्मदिन और पुण्य तिथि को पार्टी बहुत विशाल स्तर पर मनाने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम की जयंती को वृहद स्तर पर मनाने का फैसला बहुजन समाज पार्टी ने किया है.
बहुजन समाज पार्टी ने सभी जिलों की कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि 15 मार्च को लखनऊ पहुंचे और विशाल कार्यक्रम में न सिर्फ अपनी सहभागिता पेश करें बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए गांव-गांव जाकर कैडर को और ज्यादा मजबूत करने की कवायद में जुट जाएं. साफ तौर से बहुजन समाज पार्टी कांशीराम के बताए हुए रास्ते पर चलने की बात करते हुए अपने वोट बैंक में एक बार फिर से और ज्यादा जोश भरने की कोशिश कर रही है.
15 मार्च को पीडीए दिवस मनाएगी सपा
वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद जहां बहुत ज्यादा उत्साहित दिखाई दे रही है वहीं दूसरी तरफ उसका दवा है कि दलित वोट बैंक उसके साथ खड़ा हुआ है. इस दावे पर काम करते हुए समाजवादी पार्टी 15 मार्च को PDA दिवस के रूप में मनाने जा रही है और मान्यवर कांशीराम के जन्मदिन पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है. ऐसे में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक दूसरे के आमने-सामने खड़े हो गए हैं.
दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश
इस सबमें सबसे खास बात यह होने वाली है कि आखिर दलित वोट बैंक 20270के विधानसभा चुनाव में किस तरह का फैसला लेने वाला है. हालांकि समाजवादी पार्टी ने अपना दावा इस वोट बैंक पर ठोक करके बहुजन समाज पार्टी के सामने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें
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