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Gen Z Want Obeyed Wife: 14 से 15 साल का हुआ नहीं कि रोमांस शुरू. फिर डेटिंग का चश्का और खुलमखुल्ला प्यार. हर चीज में आजादी को तलाशने वाले आज के लड़के जितने प्रगतिशील है, अपनी पत्नी के मामलों में उनकी सोच उतने ही दकियानूस हैं. एक ताजा सर्वे में इन जेन जी (1995 से 2010 के बीच पैदा लेने वाले) लड़कों की कलई खुल गई है. वे अपने मामलों खुद तो आजाद ख्याल रहेंगे लेकिन बीवी उन्हें आज्ञाकारी चाहिए. ऐसे 31 प्रतिशत जेन जी के लड़के हैं जिनका ख्याल है कि पत्नी ऐसी होनी चाहिए जो पति का हुकूम मानने वाली हो.
जेन जी की विचारधारा में विरोधाभाष.
Gen Z Want Obeyed Wife: आज का जमाना डिजिटल है. यहां सब कुछ इंस्टेंट होता है. 20-25 सेकेंड की रील्स में ही सब कुछ दिख जाना चाहिए. 14 से 15 साल की उम्र में ही रोमांस शुरू हो जाता है. तुर्रा ये कि इसमें मां-बाप का भी दखल पसंद नहीं. इन्हें अपनी मर्जी से हर कुछ चाहिए. खुलमखुल्ला प्यार करने से इन्हें तिनका भर गुरेज नहीं. गर्लफ्रेंड भी आजाद ख्याल का हो. जब चाह हो, मां-बाप को नजरअंदाज कर उसके साथ आ जाए. लेकिन जैसे ही शादी हुई वीवी हुकूम मानने वाली होनी चाहिए चाहिए. जी हां, आजकल के लड़के जिसे आप जेन जी कहते हैं, उनका ख्याल ऐसा ही है. किंग्स कॉलेज लंदन द्वारा कराए गए एक सर्वे में जेन जी पीढ़ी के 31 प्रतिशत लड़कों का यही मानना है.
अंतिम निर्णय पति का हो
ग्लोबल इंस्टीट्यूट फॉर वूमेंस लीडरशिप की यह रिपोर्ट इंटरनेशनल वूमेंस डे से ठीक पहले जारी की गई है जिसके नतीजे चौंका रहे हैं. आज की पीढ़ी रील्स वाली पीढ़ी है. रिपोर्ट बताती है कि जेन जी पीढ़ी के अधिकांश पुरुष रिश्तों और लैंगिक भूमिकाओं को लेकर पुराने मर्दों से भी ज्यादा पारंपरिक या कट्टर सोच रखते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि भले ही यह पीढ़ी सोशल मीडिया और आधुनिक विचारों से जुड़ी हुई दिखाई देती हो, लेकिन शादी और रिश्तों के मामले में इनके विचार पुराने या दकियानूस नजर आते हैं. कुछ मामलों में वे ऐसी पत्नी की उम्मीद रखते हैं जो अधिक आज्ञाकारी हो और पारंपरिक भूमिकाएं निभाए. इस अध्ययन में 29 देशों के करीब 23,000 लोगों ने हिस्सा लिया. रिपोर्ट के अनुसार जेन Z के 31% पुरुषों का मानना है कि पत्नी को हमेशा अपने पति की बात माननी चाहिए. इससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि 33% लोगों का कहना है कि शादी में किसी भी महत्वपूर्ण फैसले पर अंतिम निर्णय पति का होना चाहिए. यह आंकड़े दिखाते हैं कि आधुनिक और डिजिटल दौर की यह पीढ़ी भी रिश्तों और शादी के मामले में कितनी कट्टर सोच रखती है.
पुराने मर्दों से ज्यादा तंग दिमाग
अध्ययन में जब बेबी बूमर के विचारों से तुलना की गई तो नतीजा और भी चौंकाने वाला आया. बेबी बूमर यानी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1965 के बीच पैदा लिए मर्दों की सोच भी आज के लड़कों की तरह इतनी तंग नहीं है. इस अध्ययन में बेबी बूमर वाले सिर्फ 17 प्रतिशत मर्दों का ही कहना था कि औरतों को अपने पति की बात माननी चाहिए और 17 प्रतिशत पुरुषों का कहना था कि घर के महत्वपूर्ण फैसलों में अंतिम निर्णय पति का होना चाहिए. यानी हैरानी की बात यह है कि नई और आधुनिक मानी जाने वाली युवा पीढ़ी के पुरुष रिश्तों और शादी के मामलों में पहले की पीढ़ियों से भी ज्यादा कट्टर सोच रखते हैं.
लेकिन पत्नी चाहिए कैरियर वाली
इस जेनरेशन के लड़कों के दिमाग में इतना विरोधाभास है कि वे खुद भी नहीं समझ पाते कि वे कर क्या रहे हैं. एक तरफ तो उन्हें बीवी हुकूम मानने वाली चाहिए, दूसरी ओर उनकी पत्नी ऐसी भी हो जो नौकरी करें. उनका आकर्षण ऐसी महिलाओं में ज्यादा है. अध्ययन के मुताबिक करीब 41 प्रतिशत जेन Z पुरुषों ने कहा कि सफल करियर वाली महिलाएं ज्यादा आकर्षक लगती हैं, जबकि बेबी बूमर पीढ़ी में ऐसा मानने वाले पुरुषों की संख्या सिर्फ 27% है. शोधकर्ताओं के अनुसार यह Gen Z की सोच में मौजूद एक तरह की दोहरी मानसिकता को दिखाता है. यानी एक ओर वे महत्वाकांक्षी और सफल महिलाओं की सराहना करते हैं, लेकिन दूसरी ओर घर में पारंपरिक भूमिकाओं की उम्मीद भी रखते हैं. Ipsos UK और आयरलैंड की चीफ एग्जीक्यूटिव केली बीवर ने इसे जेंडर रोल्स की नई तरह से तय होने वाली प्रक्रिया बताया. उनका कहना है कि जेन Z के विचारों में एक दिलचस्प दोहरापन दिखता है. वे सफल महिलाओं को आकर्षक मानते हैं, लेकिन साथ ही यह भी मानते हैं कि पत्नी को हमेशा पति की बात माननी चाहिए.
आधुनिकता का मुखौटा
यह शोध जेन जी के आधुनिकता के मुखौटे को उजागर करता है. साथ ही यह दोहरा चरित्र को दर्शाता है. एक तरफ तो उन्हें सफल बीवी का आकर्षण चाहिए तो दूसरी तरफ पत्नियों पर हुक्म चलाने की चाहत भी है. यह जेन-जी की अधूरी आधुनिकता का सच है. इस सर्वे का सैंपल छोटा है, इसलिए हमें यह तो नहीं पता कि इस पीढ़ी के सारे मर्दों की यही सोच है. इनमें से अधिकांश की अभी शादी भी नहीं हुई होगी पर इतना तो तय है कि आज की जेन जी पीढ़ी मेंटल पैराडॉक्स की विचित्र समस्या से जूझ रही हैं. उनकी बौद्धिक गहराई इतनी उथली है कि एक ही पल में पिंक कलर को अपना फेवरेट मानने लगती है तो अगले ही पल में ब्लू इस कैटगरी में आ जाता है. भविष्य एआई का है जो पूरी दुनिया बदलने वाली है. संभवतः जेन जी का इसमें कोई भूमिका नहीं है. इसका आविष्कार किसी और ने किया वह उपभोग करने वाली पीढ़ी है. इसे आगे कहां तक ले जाएगा ये तो भविष्य ही तय करेगा लेकिन जेन जी को भी अभी दिमागी परिपक्वता के लिए समय देने की दरकार है.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें
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