kishanganj girl juhi das upsc rank 649 father death before interview

Date:

[ad_1]

Last Updated:

UPSC Success Story: किशनगंज की जूही दास ने संघर्षों की नई इबारत लिखते हुए यूपीएससी में 649वीं रैंक हासिल की है. इंटरव्यू से ठीक पहले पिता को खोने के बावजूद जूही ने हिम्मत नहीं हारी. सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए पिता का अंतिम संस्कार किया. सीमित संसाधनों और कठिन समय में मिली यह जीत पूरे बिहार को गौरवान्वित कर रही है.

Zoom

जूही की यह कामयाबी इसलिए असाधारण है.

किशनगंजः विपत्तियां इंसान को तोड़ने नहीं, बल्कि उसकी आंतरिक शक्ति को जगाने के लिए आती हैं. इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है किशनगंज के खगड़ा की रहने वाली जूही दास ने. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों में जूही ने 649वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है. लेकिन जूही की इस सफलता के पीछे एक ऐसी हृदयविदारक दास्तां है. जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हैं.

पिता की मौत भी नहीं डिगा पाई हौसला
जूही की यह कामयाबी इसलिए असाधारण है. क्योंकि उनके साक्षात्कार से ठीक पहले उनके सिर से पिता का साया उठ गया. घर की बड़ी बेटी होने के नाते जूही के कंधों पर दोहरा बोझ आ पड़ा. एक तरफ देश की सबसे कठिन परीक्षा का आखिरी और निर्णायक चरण था, तो दूसरी तरफ पिता का अंतिम संस्कार. जूही ने विचलित होने के बजाय साहस का परिचय दिया. उन्होंने बड़ी बेटी का फर्ज निभाते हुए पिता का क्रिया-कर्म संपन्न किया. उसी मानसिक स्थिति में इंटरव्यू देकर सफलता का इतिहास रच दिया.

सीमित संसाधनों में संघर्ष
शहर के खगड़ा निवासी स्व.निवारन दास की पुत्री जूही शुरू से ही मेधावी रही हैं. घर की आर्थिक स्थिति और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प को कभी कम नहीं होने दिया. आज जब उनका चयन यूपीएससी में हुआ है, तो उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा है.

मां की आंखों में खुशी और गम के आंसू
जूही की माँ ने रुंधे गले से बताया कि बेटी की सफलता पर गर्व तो बहुत है. लेकिन उसके पिता की कमी बहुत खल रही है. अगर आज वे अपनी आंखों से बेटी को अफसर बनते देखते तो शायद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं होता. वहीं जूही ने अपनी इस सफलता का श्रेय दिवंगत पिता के आशीर्वाद, अपनी मां के सहयोग और गुरुजनों के मार्गदर्शन को दिया है.

युवाओं को संदेश-बाधाओं से न डरें
अपनी सफलता पर जूही दास ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि पढ़ाई को बोझ समझकर नहीं, बल्कि दिल से करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जीवन में बाधाएं आएंगी, लेकिन मेहनत और परिश्रम से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए. यदि आप दृढ़ संकल्पित हैं तो कोई भी दुख या बाधा आपको लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.

ये भी पढ़ेंः

About the Author

Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related