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UPSC 2025 Result: अलवर की कुनिका सिंह ने यूपीएससी 2025 में 342वीं रैंक हासिल की है. मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर सिविल सेवा को चुनने वाली कुनिका ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सहयोग और निरंतर पढ़ाई को दिया है. उन्होंने अभ्यर्थियों को रोजाना 5-6 घंटे की क्वालिटी स्टडी और सोशल मीडिया के सीमित उपयोग की सलाह दी है.
UPSC 2025 Result: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणामों में राजस्थान के अलवर जिले की कुनिका सिंह ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. कुनिका ने अखिल भारतीय स्तर पर 342वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे अलवर जिले का नाम रोशन किया है. कुनिका सिंह अलवर के सीनियर लेक्चरर महेंद्र सिंह चौहान की सुपुत्री हैं. शुक्रवार को जैसे ही परिणाम की जानकारी मिली, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. परिजनों और रिश्तेदारों ने कुनिका को फूलमालाएं पहनाकर और साफा बांधकर पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया. पूरे मोहल्ले में मिठाई बांटी गई और जश्न का माहौल देखा गया.
कुनिका सिंह की यह यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है. उनके पिता महेंद्र सिंह ने बताया कि कुनिका का चयन पहले मेडिकल क्षेत्र में हुआ था और वह डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही थीं. लेकिन मन में देश सेवा का जज्बा और प्रशासनिक सुधारों में योगदान देने की इच्छा के कारण उन्होंने मेडिकल की राह छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी करने का साहसिक निर्णय लिया. उनके पिता ने एक आदर्श अभिभावक की भूमिका निभाते हुए बेटी के इस फैसले का सम्मान किया और उसे फ्री हैंड दिया. कुनिका ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के मार्गदर्शन में अपनी नींव मजबूत की. हालांकि उन्हें पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने अपनी कमियों से सीखा और दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा व इंटरव्यू को पार करते हुए अंतिम सूची में जगह बनाई.
जॉइंट फैमिली का सपोर्ट और 10-12 घंटे की पढ़ाई का सच
अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए कुनिका ने बताया कि वह एक बड़े संयुक्त परिवार (Joint Family) में रहती हैं. अक्सर माना जाता है कि बड़े परिवारों में पढ़ाई के लिए एकांत मिलना मुश्किल होता है लेकिन कुनिका के मामले में यह उनकी ताकत बना. उनके माता-पिता, दादी, चाचा-चाची और भाई-बहनों ने पढ़ाई के दौरान उन पर कभी भी घर के कामों या सामाजिक आयोजनों का दबाव नहीं बनाया. कुनिका का मानना है कि यूपीएससी क्लियर करने के लिए रोजाना 10 से 12 घंटे किताबी कीड़ा बनना जरूरी नहीं है. उनके अनुसार यदि कोई अभ्यर्थी रोजाना 5 से 6 घंटे भी पूरी एकाग्रता और निरंतरता (Consistency) के साथ पढ़ाई करता है, तो वह इस कठिन परीक्षा को पास कर सकता है. केवल प्रीलिम्स परीक्षा के समय एक-दो महीने पहले पढ़ाई के घंटों को बढ़ाना पर्याप्त होता है.
सोशल मीडिया और भविष्य के अभ्यर्थियों को सलाह
आज के डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया युवाओं के लिए भटकाव का बड़ा कारण है, वहीं कुनिका ने इसे संतुलित तरीके से उपयोग करने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया का बहुत ही सीमित इस्तेमाल किया. जब कभी पढ़ाई के बोझ से दिमाग थक जाता था, तो वह मनोरंजन के लिए थोड़े समय के लिए इंटरनेट का सहारा लेती थीं लेकिन उन्होंने कभी भी इसे अपनी पढ़ाई पर हावी नहीं होने दिया. कुनिका ने आने वाले अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि वे अपनी पढ़ाई को छोटे-छोटे टास्क और डेली टारगेट में बांटें. इससे बड़े सिलेबस को समझना आसान हो जाता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है. देश सेवा के लक्ष्य के साथ कुनिका अब प्रशासनिक अधिकारी के रूप में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए तैयार हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें
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