[ad_1]
Last Updated:
सुल्तानपुर में एक ऐतिहासिक लकड़ी का दरवाजा है, जो 50 साल से भी अधिक पुराना है. नीम और आम की लकड़ी से बना यह दरवाजा 24 कोठियों, 6 मछली की आकृतियों और बारीक नक्काशी के साथ सजाया गया है. चांदी रंगी पी और कलश-फूल की डिज़ाइन इसे और भी अद्भुत बनाती हैं.
सुल्तानपुर. हमारे आसपास कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जो दिखने में साधारण होती हैं लेकिन उसके पीछे जो काम किया गया रहता है. वह बहुत बड़ा होता है एक ऐसी ही वस्तु है उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में जो एक व्यक्ति के मकान में दरवाजे के रूप में लगी हुई है. यह लकड़ी का दरवाजा है और इसकी लंबाई और चौड़ाई काफी बड़ी है. इसके साथ ही इसमें कलश और नक्काशी की हुई है. मछलियों का निशान बना हुआ है. मछलियों के निशान कोई एक दो नहीं बल्कि 6 हैं.24 कोठा बनाए गए हैं और कई अन्य खासियत भी हैं तो आईए जानते हैं इस दरवाजे के बनने के पीछे का क्या इतिहास है और यह किस लकड़ी का बनाया गया है.
इस लकड़ी का बना है दरवाजा
मकान मालिक राजेंद्र कुमार मिश्रा ने लोकल 18 से बताया कि यह दरवाजा 50 वर्षों से भी अधिक पुराना हो चुका है. इसमें दो लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है. दरवाजे के फ्रेम को नीम की लकड़ी से बनाया गया है, वहीं इसके पल्ले को आम की लकड़ी से तैयार किया गया है. यह लकड़ी काफी मजबूत है यही वजह है कि आज तक इसमें ना तो कोई दीमक लगा है और ना ही किसी प्रकार का कोई घुन लगा है या जैसे 50 साल पहले थी वैसे आज भी है.
बनी है कई आकृतियां
इस ऐतिहासिक दरवाजे में कई आकृतियां बनी है जिसमें 24 लकड़ी के छोटे-छोटे कोठी बनाए गए हैं. 6 मछली की आकृति बनाई गई है और इसमें छोटे-छोटे नुकीले पी लगाए गए हैं. जिनको चांदी के रंग में रंग गया है इसके साथ ही इसमें 12 कड़ियों वाली जंजीर भी लगाई गई है. दरवाजे के बाजू में कलश और फूलों की आकृतियां बनी है, बारीक नक्काशियों से तैयार यह दरवाजा अपने आप में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कल का परिचय दे रहा है.
इतना है दाम
राजेंद्र कुमार ने बताया कि इस दरवाजे को बनाने के लिए दो मिस्त्री लगे हुए थे पहले मिस्त्री जायस क्षेत्र के थे और दूसरे छोटेपुर गांव के शीतला प्रसाद विश्वकर्मा ने इसे नक्काशी से तैयार किया था आज के 50 साल पहले इस दरवाजे की कीमत लगभग ₹12000 थे और वर्तमान में इसकी कीमत 70000 रुपए से भी अधिक है लेकिन आम और नीम की लकड़ी से बनाया गया दरवाजा अपने आप में अद्भुत है.
About the Author
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
[ad_2]
Source link
