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न्यूज18 मलयालम
Kerala News: केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपना चुनावी नैरेटिव सेट करना शुरू कर दिया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केरल के लिए ‘5 गारंटी’ का ऐलान कर दिया है. यह वही मॉडल है जिसे कांग्रेस ने कर्नाटक और तेलंगाना में चुनावी हथियार बनाया था. सवाल अब यही है कि क्या वही फॉर्मूला केरल में भी काम करेगा? राहुल गांधी ने पुथु युग यात्रा के समापन कार्यक्रम में महिलाओं, छात्रों, युवाओं और बुजुर्गों को सीधे संबोधित करने वाली घोषणाएं कीं. कांग्रेस का मकसद साफ दिखता है कि वोटरों के बड़े सामाजिक समूहों को सीधे जोड़ना. लेकिन केरल की राजनीति अलग है. यहां लेफ्ट बनाम कांग्रेस की सीधी लड़ाई है और हर वादा राजनीतिक जांच के दायरे में आता है.
राहुल गांधी ने जिन 5 गारंटी की घोषणा की है, उनमें महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा, कॉलेज छात्राओं को हर महीने 1000 रुपए की सहायता, सामाजिक कल्याण पेंशन बढ़ाकर 3000 रुपए करना, ओमन चांडी हेल्थ इंश्योरेंस योजना के तहत 25 लाख रुपए तक का मेडिकल कवर और युवाओं के लिए 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त लोन शामिल है. इसके साथ ही बुजुर्गों के कल्याण के लिए एक अलग विभाग बनाने का वादा भी किया गया है. कांग्रेस की रणनीति साफ है कि कल्याणकारी वादों के जरिए बड़ा सामाजिक गठबंधन बनाना. लेकिन सवाल यह भी है कि क्या केरल के वोटर इस मॉडल को उतनी ही आसानी से स्वीकार करेंगे जितना कर्नाटक या तेलंगाना में हुआ था.
कांग्रेस ने कर्नाटक और तेलंगाना में ‘गारंटी मॉडल’ के जरिए चुनावी सफलता हासिल की थी. (फोटो PTI)
कर्नाटक-तेलंगाना मॉडल की झलक: महिलाओं और युवाओं पर फोकस
- इससे साफ लगता है कि कांग्रेस इस बार केरल में चुनाव को पूरी तरह वेलफेयर बनाम गवर्नेंस के फ्रेम में ले जाना चाहती है. महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा का वादा उसी मॉडल का हिस्सा है जो कर्नाटक में काफी लोकप्रिय हुआ था. छात्राओं को आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी सीधे युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश मानी जा रही है. वहीं सामाजिक कल्याण पेंशन बढ़ाने का वादा बुजुर्ग और गरीब वर्ग को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है.
- हालांकि केरल की राजनीति में यह भी देखा जाता है कि मतदाता सिर्फ घोषणाओं पर भरोसा नहीं करते. यहां वादों की वित्तीय व्यवहार्यता पर भी चर्चा होती है. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) पहले से ही कई सामाजिक योजनाएं चला रहा है. ऐसे में कांग्रेस की चुनौती यह होगी कि वह मतदाताओं को यह भरोसा दिला सके कि उसकी गारंटी सिर्फ चुनावी घोषणा नहीं बल्कि लागू करने योग्य योजना है.
राहुल गांधी की ‘5 गारंटी’ में क्या-क्या शामिल है?
राहुल गांधी ने केरल के लिए जिन 5 गारंटी की घोषणा की है, उनमें महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा, कॉलेज छात्राओं को हर महीने 1000 रुपए की सहायता, सामाजिक कल्याण पेंशन को बढ़ाकर 3000 रुपए करना, ओमन चांडी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत परिवारों को 25 लाख रुपए तक का मेडिकल कवर देना और युवाओं के लिए 5 लाख रुपए तक का ब्याज मुक्त लोन शामिल है. इसके अलावा बुजुर्गों के कल्याण के लिए एक अलग विभाग बनाने की भी घोषणा की गई है.
क्या यह कर्नाटक और तेलंगाना वाला चुनावी मॉडल है?
कांग्रेस ने कर्नाटक और तेलंगाना में ‘गारंटी मॉडल’ के जरिए चुनावी सफलता हासिल की थी. वहां मुफ्त बस यात्रा, वित्तीय सहायता और सामाजिक योजनाओं के वादे काफी प्रभावी साबित हुए. केरल में भी उसी तरह की रणनीति दिखाई दे रही है. हालांकि केरल की राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए इसका असर अलग भी हो सकता है.
क्या इन वादों को लागू करना आसान होगा?
कई आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी बड़ी सामाजिक योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य सरकार को भारी वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी. केरल पहले से ही वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है. इसलिए अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इन योजनाओं के लिए बजट संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती हो सकता है.
केरल के चुनाव में इन घोषणाओं का कितना असर पड़ सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों को टारगेट करने वाली योजनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती हैं. लेकिन केरल के मतदाता अकसर शासन, आर्थिक स्थिति और विकास के मुद्दों को भी ध्यान में रखते हैं. इसलिए इन गारंटी का असर पूरी तरह चुनावी माहौल और विपक्ष की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा.
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