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आयुर्वेद में ‘वज्र भस्म’ के नाम से मशहूर हीरा भस्म न केवल शरीर को मजबूती देती है, बल्कि कैंसर, मधुमेह और हृदय रोगों जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी सक्षम है. शुद्ध हीरे से 14 बार शोधित होकर तैयार होने वाली इस औषधि के चमत्कारी लाभ हैरान करने वाले हैं.
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कई प्रकार की धातु और रत्नों से बनने वाली भस्मों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें विशेष प्रक्रिया से तैयार किया जाता है. इन्हीं में से एक अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली औषधि है वज्र भस्म, जिसे सामान्य भाषा में हीरा भस्म भी कहा जाता है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार यह औषधि शरीर को मजबूती देने के साथ-साथ कई गंभीर रोगों में सहायक मानी जाती है.
काफी दुर्लभ और महंगी होती है यह औषधि
जानकार बताते हैं कि वज्र भस्म शुद्ध हीरे को विशेष आयुर्वेदिक प्रक्रिया से कई बार शोधित और संस्कारित करके तैयार की जाती है. पारंपरिक ग्रंथों के अनुसार हीरे को लगभग 14 बार शोधन और विशेष अग्नि प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तब जाकर यह भस्म औषधि के रूप में उपयोग योग्य बनती है. इस जटिल प्रक्रिया के कारण यह औषधि काफी दुर्लभ और महंगी भी होती है.
सामान्य दवाओं की तरह नहीं होता उपयोग
मुगलसराय के आयुर्वेद डॉक्टर पल्लव प्रजापति ने बताया कि आयुर्वेद में कई प्रकार की भस्मों का उपयोग किया जाता है, जैसे स्वर्ण भस्म, रजत भस्म और वज्र भस्म. ये सभी औषधियां विशेष परिस्थितियों में दी जाती हैं और इनका उपयोग सामान्य दवाओं की तरह नहीं किया जाता. जब कई उपचारों के बाद भी रोग में अपेक्षित लाभ नहीं मिलता, तब आयुर्वेदिक चिकित्सक रोगी की स्थिति के अनुसार इन विशेष भस्मों का प्रयोग करते हैं.
कुछ जटिल रोगों में किया जाता है उपयोग
आगे उन्होंने कहा कि वज्र भस्म का उपयोग कुछ जटिल और दीर्घकालिक रोगों में किया जाता है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह शरीर की शक्ति और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकती है. कुछ आयुर्वेद चिकित्सक इसे हृदय संबंधी समस्याओं, कमजोरी, मधुमेह और गंभीर रोगों में सहायक औषधि के रूप में भी उपयोग करते हैं. हालांकि यह दवा रोगी की प्रकृति, पाचन शक्ति और रोग की स्थिति को ध्यान में रखकर ही दी जाती है.
गलत तरीके से लेने पर हो सकता है नुकसान
डॉ. प्रजापति ने कहा कि इतनी शक्तिशाली औषधि होने के कारण वज्र भस्म का सेवन बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए. यह दवा हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती और इसकी मात्रा भी बहुत कम होती है. गलत तरीके से लेने पर नुकसान भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसी महंगी और प्रभावशाली भस्मों को बाजार से खुद खरीदकर सेवन करने से बचें. यदि आवश्यकता हो तो केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही इसका उपयोग करना चाहिए. सही तरीके से और सही रोगी को दी जाने पर वज्र भस्म को आयुर्वेद की अत्यंत प्रभावशाली औषधियों में गिना जाता है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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