रुई वाले गद्दे पर मिलेगी आरामदायक नींद, कमर और रीढ़ की हड्डी को भी मिलेगी आराम, अपना लें ये ट्रिक

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रुई वाले गद्दे पर मिलेगी आरामदायक नींद, कमर और रीढ़ की हड्डी को भी मिलेगी आराम

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अगर आप भी कमर दर्द या खराब नींद से परेशान हैं, तो पुराने रुई के गद्दे को फेंकने की बजाय उसकी धुनाई करवाकर दोबारा तैयार करवाना एक अच्छा और किफायती विकल्प हो सकता है. इससे न सिर्फ पैसे की बचत होगी बल्कि आपको सुकून भरी नींद भी मिलेगी.

जमशेदपुर. आज के समय में लोगों की जीवन शैली बदलने के साथ-साथ सोने के तरीके भी बदल गए हैं. बाजार में स्प्रिंग और फोम के कई महंगे मैट्रेस उपलब्ध हैं, लेकिन आज भी बहुत से लोग पारंपरिक रुई वाले गद्दे को ही सबसे आरामदायक मानते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से बनाया गया और समय-समय पर साफ किया गया रुई का गद्दा शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है.

गद्दा बनाने और उसकी मरम्मत का काम करने वाले एक्सपर्ट मंसूर मोहम्मद बताते हैं कि कई लोगों को कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं सिर्फ इसलिए हो जाती हैं क्योंकि वे पुराने और दबे हुए गद्दे पर लंबे समय तक सोते रहते हैं. कई घरों में रुई का गद्दा वर्षों तक बिना साफ किए इस्तेमाल किया जाता है. धीरे-धीरे रुई सख्त हो जाती है और गद्दे में गड्ढे पड़ जाते हैं, जिससे सोते समय शरीर को सही सपोर्ट नहीं मिल पाता.
मंसूर मोहम्मद के अनुसार रुई वाले गद्दे को हर चार से पांच साल में एक बार जरूर खुलवाकर उसकी धुनाई करवानी चाहिए. धुनाई से रुई फिर से फूली हुई और मुलायम हो जाती है. इससे गद्दे में मौजूद धूल, बैक्टीरिया और जकड़न भी निकल जाती है. इसके बाद जब उसी रुई से गद्दा दोबारा बनाया जाता है तो वह पहले की तरह नरम और आरामदायक हो जाता है.

गद्दे के लिए कौन सी रुई होती है अच्छी
आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि रुई का गद्दा मैट्रेस से ज्यादा सुकून भरी नींद देता है. इसका कारण यह है कि रुई शरीर के आकार के अनुसार खुद को ढाल लेती है, जिससे पीठ और रीढ़ की हड्डी को संतुलित सहारा मिलता है. यही वजह है कि कई बुजुर्ग और पारंपरिक परिवार आज भी रुई वाले गद्दे को ही प्राथमिकता देते हैं.
अगर रुई की किस्मों की बात करें तो बाजार में कई प्रकार की रुई मिलती है. देसी कपास की रुई सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि यह ज्यादा मुलायम और टिकाऊ होती है. इसके अलावा मिल की प्रोसेस्ड रुई भी मिलती है, जो थोड़ी सस्ती होती है लेकिन उसकी उम्र कम होती है. कई जगह मिक्स रुई का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें कपास के साथ सिंथेटिक फाइबर मिलाया जाता है ताकि गद्दा ज्यादा समय तक आकार बनाए रखे.

समय पर करवाए धुनाई
विशेषज्ञ बताते हैं कि गद्दा बनवाते समय अच्छी क्वालिटी की रुई चुनना बेहद जरूरी है. सही तरीके से धुनी हुई रुई का गद्दा न केवल ज्यादा समय तक चलता है बल्कि नींद की गुणवत्ता भी बेहतर करता है. खर्च की बात करें तो आज के समय में स्टैंडर्ड साइज का रुई वाला गद्दा लगभग 4000 से 5000 रुपये में आराम से बन जाता है. अगर समय-समय पर इसकी देखभाल और धुनाई करवाई जाए तो यह गद्दा कई वर्षों तक आरामदायक बना रहता है.

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Mohd Majid

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