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सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) की अगुवाई वाली बेंच वॉट्सऐप और उसकी मूल कंपनी मेटा द्वारा यूजर डेटा साझा करने के मामले में अहम सुनवाई करने जा रही है. सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर पिछली सुनवाई के दौरान बेहद सख्त चेतावनी दी थी. कोर्ट ने साफ कहा था कि डेटा शेयरिंग के नाम पर देश के नागरिकों की निजता के अधिकार से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही है, जिसमें जस्टिस जे बागची भी शामिल हैं. अदालत ने कहा था कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं किए गए तो वॉट्सऐप को यूजर डेटा साझा करने से रोका भी जा सकता है.
‘निजता के अधिकार से कोई खिलवाड़ नहीं’
इस मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के व्यावसायिक हितों के लिए भारतीय नागरिकों के निजता के अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अदालत वॉट्सऐप को एक भी जानकारी किसी अन्य कंपनी के साथ साझा करने की अनुमति नहीं देगी.
कोर्ट ने यह भी कहा कि सहमति या ‘ऑप्ट-आउट’ जैसे तंत्र के नाम पर यूजर डेटा साझा करना स्वीकार्य नहीं है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह की जटिल भाषा आम लोगों की समझ से बाहर होती है और अधिकांश यूजर्स यह समझ ही नहीं पाते कि उनका डेटा कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है.
‘निजी जानकारी की चोरी जैसा’
सुनवाई के दौरान अदालत ने डेटा साझा करने की मौजूदा व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह निजी जानकारी की ‘सभ्य तरीके से चोरी’ जैसा प्रतीत होता है. अदालत ने कहा कि देश में निजता के अधिकार को बहुत गंभीरता से संरक्षित किया गया है और इसे किसी भी हालत में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा.
कोर्ट ने वॉट्सऐप की उस दलील पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि उपयोगकर्ताओं को डेटा साझा करने से बाहर निकलने (opt-out) का विकल्प दिया गया है. अदालत ने कहा कि वास्तविकता यह है कि अधिकांश लोग इन जटिल शर्तों को समझ ही नहीं पाते.
जस्टिस बागची ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा कि कई बार ऐसे विकल्पों की जानकारी केवल अखबारों के विज्ञापनों के जरिए दी जाती है, जिन्हें बहुत कम लोग पढ़ते हैं. उन्होंने पूछा कि क्या वास्तव में उपयोगकर्ताओं को इस प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी जाती है.
CCI के जुर्माने को लेकर भी सुनवाई
दरअसल यह मामला भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की तरफ से वॉट्सऐप और मेटा पर लगाए गए 213 करोड़ रुपये के जुर्माने से जुड़ा है. आयोग ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने ओटीटी मैसेजिंग बाजार में अपने प्रभुत्व का दुरुपयोग किया. बाद में एनसीएलएटी ने भी इस जुर्माने को बरकरार रखा था, जिसके खिलाफ मेटा और वॉट्सऐप ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की है.
मेटा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि कंपनी ने जुर्माने की पूरी राशि जमा कर दी है, हालांकि यह अंतिम फैसले के अधीन रहेगी. अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक यह राशि वापस नहीं ली जा सकती.
कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने उन लोगों की स्थिति पर भी चिंता जताई जो डिजिटल प्रणाली से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि देश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले कई लोग ऐसे हैं जो इस पूरी व्यवस्था से अनजान रहते हैं और ‘मूक उपभोक्ता’ बनकर रह जाते हैं.
अदालत ने दोहराया कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि को देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की कीमत पर आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्देशों पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं.
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