[ad_1]
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे के दौरान हुए प्रोटोकॉल उल्लंघन का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. गृह मंत्रालय ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से रिपोर्ट मांगी थी और रविवार शाम तक सारे सवालों का जवाब तलब किया था. खबर है कि बंगाल सरकार ने गृह मंत्रालय की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरणों का जवाब दिया है. हालांकि इस रिपोर्ट की विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है.
दरअसल राष्ट्रपति मुर्मू को शुक्रवार दोपहर उत्तरी बंगाल पहुंचना था. हालांकि कुछ कारणों से यह दौरा स्थगित कर दिया गया. राष्ट्रपति शनिवार सुबह 11:30 बजे बागडोगरा हवाई अड्डे पर उतरीं. उन्हें दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी के पास फांसिदेवा क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के एक कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन बाद में कार्यक्रम स्थल को बदलकर गोसाईपुर कर दिया गया.
कार्यक्रम स्थल में हुए बदलाव को लेकर राष्ट्रपति मुर्मू ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई. इसके बाद वे फांसिदेवा गईं, जहां मूल रूप से कार्यक्रम होना था. वहां से राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल बदलने को लेकर राज्य प्रशासन की आलोचना भी की. राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि राज्य के दौरे के दौरान न तो मुख्यमंत्री और न ही उनके मंत्रिमंडल के किसी सहयोगी ने उनसे मुलाकात की, जो राष्ट्रपति के किसी स्थान के दौरे के दौरान स्थापित परंपराओं और प्रोटोकॉल के खिलाफ है.
केंद्र सरकार ने इसे भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के स्वागत के लिए निर्धारित ‘ब्लू बुक’ प्रोटोकॉल का ‘गंभीर उल्लंघन’ माना. ब्लू बुक के नियमों के मुताबिक, राष्ट्रपति के राज्य आगमन पर वहां की मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी को उनका स्वागत करना चाहिए था, लेकिन वहां केवल सिलीगुड़ी के महापौर मौजूद थे. कोई मंत्री भी नहीं भेजा गया.
इस मामले पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर रविवार शाम 5 बजे तक जवाब मांगा था. पत्र में पूछा गया:
- मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी स्वागत के लिए क्यों नहीं पहुंचे?
- कार्यक्रम स्थल और मार्ग की व्यवस्था ब्लू बुक के अनुसार क्यों नहीं की गई?
- वॉशरूम में पानी की कमी और कचरे वाले रूट की जिम्मेदारी किसकी बनती है?
केंद्र ने इसे प्रोटोकॉल, सुरक्षा और गरिमा का मामला बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर नाराजगी जताई. हालांकि ममता बनर्जी ने जवाब दिया कि यह ‘निजी कार्यक्रम’ था और राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और निजी आयोजक जिम्मेदार हैं. ममता ने दावा किया कि प्रोटोकॉल का कोई उल्लंघन नहीं हुआ और केंद्र राजनीतिक रूप से बंगाल को निशाना बना रहा है.
क्या होता है ब्लू बुक?
भारत में जब राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो उनकी सुरक्षा, स्वागत-सत्कार और हर छोटी-बड़ी व्यवस्था एक दस्तावेज़ के मुताबिक होती है. इस दस्तावेज़ को ‘ब्लू बुक’ कहा जाता है. यह कोई आम किताब नहीं, बल्कि गृह मंत्रालय की ओर से तैयार किया गया अत्यंत गोपनीय प्रोटोकॉल मैनुअल है, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उनके परिवारों से जुड़े सुरक्षा व शिष्टाचार के सख्त नियम लिखे होते हैं. हर प्रति को अलग-अलग नंबर दिया जाता है और इसे केवल जरूरी अधिकारियों को ही सौंपा जाता है.
ब्लू बुक की उत्पत्ति ब्रिटिश काल से चली आ रही है, लेकिन स्वतंत्र भारत में इसे गृह मंत्रालय ने आधुनिक रूप दिया. यह ‘वॉरंट ऑफ प्रेसिडेंस’ (अधिकारियों की वरीयता सूची) से लेकर हवाईअड्डे पर स्वागत, मार्ग की सफाई, वॉशरूम की व्यवस्था, झंडा लगाने, राष्ट्रगान बजाने और यहां तक कि आपातकालीन प्लान तक सब कुछ तय करता है. ब्लू बुक में राष्ट्रपति को नंबर-1 और उपराष्ट्रपति को नंबर-2 स्थान दिया गया है. इनके दौरे को ‘स्टेट विजिट’ माना जाता है, भले ही कार्यक्रम निजी हो.
ब्लू बुक में राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के मुख्य नियम
1. रिसेप्शन और सी-ऑफ: राष्ट्रपति जब किसी राज्य में पहुंचते हैं, तो राज्यपाल और मुख्यमंत्री (या उनके नामित मंत्री) को हवाईअड्डे पर स्वागत के लिए उपस्थित रहना चाहिए. ब्लू बुक के अनुसार, मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को मौजूद रहना अनिवार्य माना जाता है. यही नियम सी-ऑफ (विदाई) के लिए भी लागू होता है.
2. सुरक्षा और रूट: मार्ग पूरी तरह साफ-सुथरा, गार्ड ऑफ ऑनर, सिक्योरिटी चेक और कंटिंजेंसी प्लान तैयार रहना चाहिए. राष्ट्रपति के लिए बने वॉशरूम में बुनियादी सुविधाएं (पानी, साबुन आदि) अनिवार्य हैं.
3. झंडा और सम्मान: राष्ट्रपति के आने पर राज्य सरकार को उनका झंडा लगाना पड़ता है. कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रगान बजाना और प्रोटोकॉल के मुताबिक सीटिंग अरेंजमेंट करना जरूरी है.
4. वरीयता और शिष्टाचार: ब्लू बुक में स्पष्ट है कि राज्य के मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से मिलने (कॉल ऑन) के लिए जाना चाहिए. अगर राष्ट्रपति किसी कार्यक्रम में जा रहे हैं, तो स्थानीय प्रशासन (DM, SP) को ब्लू बुक के हिसाब से व्यवस्था करनी पड़ती है.
ये नियम सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि संवैधानिक गरिमा और सुरक्षा से जुड़े हैं. उल्लंघन को गंभीर माना जाता है क्योंकि राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक है.
क्या ब्लू बुक का पालन अनिवार्य है?
ब्लू बुक कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह ‘कन्वेंशन और शिष्टाचार’ का दस्तावेज़ है. गृह मंत्रालय इसे अपडेट करता रहता है. कई राज्यों में पहले भी विवाद हुए हैं, लेकिन राष्ट्रपति के मामले में इसे बहुत गंभीर माना जाता है क्योंकि राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख हैं.
ब्लू बुक के अन्य महत्वपूर्ण पहलू
- उपराष्ट्रपति के लिए भी वही नियम: उपराष्ट्रपति का दर्जा राष्ट्रपति के बाद आता है. उनके दौरे में भी मुख्यमंत्री या नामित अधिकारी को स्वागत करना पड़ता है.
- फ्लैग प्रोटोकॉल: राष्ट्रपति के आने पर राज्यपाल भवन पर राष्ट्रपति का झंडा लगता है.
- सुरक्षा: SPG नहीं, लेकिन राज्य पुलिस को ब्लू बुक के अनुसार प्लान बनाना पड़ता है.
- अन्य VVIP: प्रधानमंत्री के लिए भी यही बुक लागू होती है.
ब्लू बुक सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता और गरिमा का प्रतीक है. जब कोई मुख्यमंत्री इसे नजरअंदाज करता है, तो सवाल उठता है कि क्या संवैधानिक पदों का सम्मान नहीं किया जा रहा? ममता बनर्जी का यह मामला अब केंद्र-राज्य टकराव का नया अध्याय बन गया है. केंद्र ने रिपोर्ट मांगी है, लेकिन ममता ने साफ इनकार कर दिया है कि कोई उल्लंघन हुआ.
[ad_2]
Source link
