सावधान किसान! फलियां बनते समय सरसों में फैल रहा है फफूंद रोग, ऐसे करें अपनी फसल का बचाव

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उत्तर भारत में सरसों की फसल पर तना सड़न का खतरा, किसानों की चिंता बढ़ी

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शाहजहांपुर और उत्तर भारत के कई हिस्सों में सरसों की फसल अब पकने के दौर में है, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ा रही है ‘तना सड़न’ (Stem Rot) नामक फफूंद जनित रोग. विशेषकर छायादार और नमी वाले खेत इस बीमारी से प्रभावित होते हैं, जिससे पौधा गिर जाता है और पैदावार में भारी नुकसान होता है. कृषि विशेषज्ञ समय पर उचित फंगीसाइड छिड़काव की सलाह दे रहे हैं.

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शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में सरसों की फसल अब पकने की अवस्था में है. फलियां बन चुकी हैं और किसान अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे हैं. हालांकि, इस नाजुक मोड़ पर ‘तना सड़न’ (Stem Rot) नामक फफूंद जनित रोग किसानों की चिंता बढ़ा रहा है. विशेषकर छायादार क्षेत्रों और अधिक नमी वाले खेतों में यह बीमारी तेजी से फैलती है, जिससे पूरा पौधा गिर जाता है और पैदावार में भारी गिरावट आती है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय रहते उचित फंगीसाइड का छिड़काव करने की सलाह दी है.

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.सी. त्रिपाठी ने बताया कि सरसों की फसल में फलियां बनने के दौरान तना सड़न की समस्या आम है. यह रोग अक्सर उन स्थानों पर अधिक देखा जाता है जहां धूप कम पहुंचती है या खेत में नमी की मात्रा अधिक होती है. इससे पौधे का तना गलने लगता है और आखिर में पौधा कमजोर होकर जमीन पर गिर जाता है. इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को ‘कार्बेंडाजिम और मैंकोजेब’ के कॉम्बिनेशन का छिड़काव करना चाहिए. 400 ग्राम दवा को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से इस समस्या से निजात मिल सकती है.

रोग के लक्षण और प्रसार के कारण
सरसों में तना सड़न मुख्य रूप से ‘स्क्लेरोटिनिया’ नामक फंगस कि वजह से होता है. इसके शुरुआती लक्षणों में तने पर सफेद या मटमैले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे तने को घेर लेते हैं. डॉ. त्रिपाठी बताते हैं कि जिन खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है या जहां पेड़ों की छाया अधिक रहती है, वहां संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है. समय रहते पहचान न होने पर यह संक्रमण पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है.

उचित प्रबंधन और दवा का छिड़काव
इस बीमारी से बचाव के लिए संतुलित सिंचाई और सही फंगीसाइड का चुनाव जरूरी है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि खेत में तना सड़न के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत कार्बेंडाजिम + मैंकोजेब के मिश्रण का छिड़काव करें. छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि दवा का घोल समान रूप से पौधों के तनों तक पहुंचे. इसके अलावा, खेत की साफ-सफाई और खरपतवार नियंत्रण भी इस बीमारी के प्रसार को रोक जा सकता है.

सावधानियां और भविष्य की रणनीति
किसानों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह या शाम के समय ही दवाओं का छिड़काव करें ताकि बेहतर परिणाम मिलें. साथ ही, आगामी सीजन के लिए फसल चक्र अपनाना और बीज उपचार करना भी इस बीमारी के स्थायी समाधान के लिए जरूरी है. जागरूक रहकर और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकते हैं. सही समय पर किया गया उपचार न केवल पौधे को बचाता है, बल्कि तेल की गुणवत्ता भी बनाए रखता है.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें

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