AMCA से आगे बढ़ी बात! मिनी 6th जेन जेट तैयार, 114 राफेल के साथ ही एयरफोर्स में शामिल होंगे!

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India 6th Gen Platform/Fighter Jet: भारतीय एयरफोर्स चीन और पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंद्वियों से घिरे होने के बावजूद फाइटर जेट्स की रेस में पिछड़ा हुआ है. इस बात को स्वीकार करना कोई गुनाह नहीं है. लेकिन, ऐसा नहीं है कि भारत के नीति निर्माता और एयरफोर्स इस चीज को नहीं जानते हैं. भारत फाइटर जेट्स की इस कमी को पूरा करने के लिए एक साथ कई मोर्चे पर काम कर रहा है. इमसें थोड़ी देरी हुई है. लेकिन, आने वाले वक्त में इस कमी को पूरा कर लिया जाएगा. भारत फाइटर जेट्स की इस कमी को पूरा करने के साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी अपनी तैयारी में जुटा है. आने वाला वक्त अब पांचवीं नहीं बल्कि छठी पीढ़ी के जेट्स और एरियल वेहिल्क का है. इसी क्रम में भारत ने एक बड़ी छलांग लगाई है. भारत का पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोग्राम एम्का तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसके 2035 तक एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है. इसके साथ ही भारत फ्रांस से 114 राफेल विमानों की डील कर रहा है. उसने पहले ही तेजस विमानों का सौदा कर रखा है.

छठी पीढ़ी के मिनी जेट

लेकिन अब समय पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स से भी आगे निकल चुका है. चीन और अमेरिका जैसे देश छठी पीढ़ी के जेट्स बनाने में लगे हैं. इस बीच भारत भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है. भारत के पास अमेरिका और चीन के तरह बेतहाशा संसाधन नहीं हैं लेकिन, वह अपने सीमित संसाधन में काफी कुछ करने की क्षमता रखता है. इसी कड़ी में भारत ने छठी पीढ़ी के मिनी फाइटर जेट्स पर काम शुरू कर दी है. एयरफोर्स के लिए ऐसे 60 प्लेटफॉर्म खरीदे जाएंगे. रक्षा मंत्रालय ने की रक्षा खरीद परिषद ने इसकी मंजूरी दे दी है. इस एक प्लेटफॉर्म की कीमत करीब 600 से 700 करोड़ रुपये बीच है.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं घातक एरियल वेहिकल सिस्टम की. यह कोई आम ड्रोन नहीं है. बल्कि इसे छठी पीढ़ी के मिनी जेट बताया जा रहा है. कीमत में घातक भारत के देसी 4.5 जेन फाइटर जेट तेजस मार्क-1ए से महंगा है. ऐसे में अब आप इसको ड्रोन समझने की भूल नहीं करेंगे. एयरफोर्स को 60 घातक खरीदने की मंजूरी मिल गई है. इसकी डिलिवरी 2029-30 से शुरू होने वाली है. यानी उसी समय 114 राफेल विमान डील की डिलिवरी भी शुरू होगी. रिपोर्ट के मुताबिक यह बेहद एडवांस सिस्टम है. इसमें कोई इंसान नहीं होगा. इसलिए इसको एक ड्रोन सिस्टम कहा जा रहा है. लेकिन, इसका जो काम है वह एक छठी पीढ़ी के फाइटर जेट वाला है.
भारत फ्रांस से 114 राफेल विमान खरीद रहा है.

घातक की 6th जेन वाली खासियतें

  • घातक एक पूरी तरह स्टेल्थ प्लेटफॉर्म है. इसकी डिजाइन टेललेस है. स्टेल्थ होने की वजह से इसको रडार सिस्टम इंटरसेप्ट नहीं कर सकता.
  • यह प्लेटफॉर्म कई तरह के हथियारों से लैस है. यह एक बार में 1500 किलो का पेलोड ले जा सकता है.
  • इसमें कावेरी डेरिवैटिव ड्राई टर्बोफैन इंजन लगा है. जो शानदार थर्स्ट के साथ लगातार अपनी ताकत बनाए रखता है. भारत के हिमालय क्षेत्र में भी यह ताकत बनाए रखता है. जबकि चीन का इंजन इस मामले में आज भी परेशानी का सामना कर रहा है.
  • यह दुश्मन के इलाके में बेहद डीप स्ट्राइक करने की क्षमता रखता है. इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है और इसका वजन करीब 13 टन है.
  • इस एरियल वेहिलक की तकनीक बेहद एडवांस है. यह भारत की पांचवीं पीढ़ी के एम्का जेट और 4.5 पीढ़ी के तेजस मार्क-2 के साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करेगा. इसी साल इसके प्रोटोटाइप को मंजूरी मिलने की संभावना है.

घातक क्यों है मिनी 6th जेन फाइटर जेट?

दरअसल, दुनिया में अभी तक छठी पीढ़ी का कोई फाइटर जेट मौजूद नहीं है. लेकिन, इसका जो कंसेप्ट है उसके मुताबिक पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स को तकनीकी तौर पर अपग्रेड कर उसे बेहद इंटेलिजेंट बनाने की योजना है. जहां तक घातक की बात है तो यह इन सभी पैमाने पर एक परफेक्ट प्लेटफॉर्म है.

एक छठी पीढ़ी प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत उसकी डिजाइन होती है. यह टेल लेस डिजाइन पर आधारित प्लेटफॉर्म है. पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 और चीनी जे-20 जैसे बेहद एडवांस फाइटर जेट भी इस डिजाइन को फॉलो नहीं करते. जबकि भारत का घातक पूरी तरह टेल लेस डिजाइन वाला प्लेटफॉर्म है. टेल नहीं होने की वजह से किसी विमान या एरियल वेहिकल को हवा में संतुलित करना एक सबसे बड़ी चुनौती होती है. लेकिन, भारत के इंजीनियरों ने इस चुनौती को पार कर लिया है. किसी भी एरियल वेहिकल में टेल होने की वजह से उसे रडार द्वारा डिटेक्ट होने की संभावना बनी रहती है. घातक की डिजाइन की यह सफलता भारत के जेट सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. घातक की पूरी तकनीक करीब-करीब छठी पीढ़ी वाली है. ऐसे में भारत के लिए भविष्य में एम्का प्रोजेक्ट और फिर छठी पीढ़ी के जेट बनाने में इससे बड़ी सहायता मिलेगी.
भारत पांचवीं पीढ़ी के एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग

छठी पीढ़ी के एरियल वेहिकल की यही सबसे बड़ी ताकत है. जंग के मैदान में एक सिंगल फाइटर जेट की तरह काम नहीं करता. बल्कि यह एक टीम की तरह काम करता है, जो खुद मल्टीपल टार्गेट की पहचान कर उसको अपने हिसाब से हिट करता है.

चीन की तुलना में कहां है भारत

ऐसा नहीं है कि भारत का घातक प्लेटफॉर्म अपनी तरह का दुनिया का पहला प्लेटफॉर्म है. चीन ने 2013 में करीब-करीब ऐसी ही प्लेटफॉर्म जीजे-11 को डेवलप कर लिया था. मौजूदा वक्त में चीन की सेना में इसे शामिल किया जा चुका है. लेकिन, जीजे-11 कई मामले में भारत के घातक की तुलना में तकनीकी रूप से पीछे है. भारत ने घातक को एआई से लैस कर इसे और घातक बनाने की योजना बनाई है.

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