Shahpur Kandi Dam Project | Indus Water Treaty : स‍िंधु का पानी रुकने से बेहाल पाक‍िस्‍तान का गला और सूखेगा, चालू होने जा रहा शाहपुर कंडी डैम

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दशकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है. भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली रावी नदी के पानी पर अब भारत पूरा कंट्रोल करने जा रहा है. शाहपुर कंडी डैम प्रोजेक्‍ट, जो पिछले 46 सालों से फाइलों और विवादों में दबा था, अब पूरी तरह तैयार है . केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, इस साल मार्च तक इसका अंतिम चरण पूरा कर लिया जाएगा . यह परियोजना न केवल जम्मू-कश्मीर और पंजाब के हजारों हेक्टेयर खेतों की प्यास बुझाएगी, बल्कि पाकिस्तान की ओर जा रहे मुफ्त के पानी पर भी लगाम लगाएगी . मोदी सरकार के संकल्प से दोबारा शुरू हुई इस योजना ने अब पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि अप्रैल से रावी का अतिरिक्त पानी सरहद पार जाना लगभग बंद हो जाएगा.

सवाल-जवाब में समझें शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट कैसे पाक‍िस्‍तान को खून के आंसू रुलाएगा

शाहपुर कंडी बांध परियोजना असल में क्या है और यह कहां स्थित है?

शाहपुर कंडी बांध हाइड्रोपावर और सिंचाई प्रोजेक्‍ट है, जो पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर रावी नदी पर बनाई गई है . यह मशहूर रणजीत सागर बांध से लगभग 11 किलोमीटर नीचे (डाउनस्ट्रीम) स्थित है . इसका मुख्य उद्देश्य रावी नदी के उस पानी को रोकना और सहेजना है जो अब तक बिना किसी रोक-टोक के बहकर पाकिस्तान चला जाता था . इस बांध के जरिए पानी को नहरों में मोड़कर भारत के अपने खेतों की सिंचाई की जाएगी और बिजली का उत्पादन भी होगा.

इसे पूरा होने में 46 साल क्यों लग गए?

इस परियोजना की कल्पना सबसे पहले 1979 में चौधरी चरण सिंह के समय की गई थी और 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था . योजना के मुताबिक इसे 6 साल में यानी 1988 तक पूरा हो जाना चाहिए था . लेकिन पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच पानी के बंटवारे और अन्य राजनीतिक खींचतान के कारण यह दशकों तक अधर में लटका रहा . पिछली सरकारों की कथित ‘गैर-गंभीरता’ की वजह से भारत के हक का पानी पाकिस्तान बहता रहा, जिसे मोदी सरकार ने 2018 में दोबारा गति दी .

भारत के किन इलाकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?

इस बांध के चालू होने पर मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों की किस्मत बदल जाएगी . इसके अलावा पंजाब के सीमावर्ती इलाकों को भी भरपूर पानी मिलेगा . जितेंद्र सिंह के अनुसार, इससे लगभग 37,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि की सिंचाई हो सकेगी . अकेले जम्मू-कश्मीर में 32,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन को पानी मिलेगा, जिससे वहां के किसानों की आय बढ़ेगी और खेती का विस्तार होगा .

पाकिस्तान को कितना बड़ा नुकसान होने वाला है?

पाकिस्तान के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है क्योंकि उसकी करीब 80% खेती सिंधु नदी प्रणाली पर टिकी है . अब तक भारत में पर्याप्त भंडारण व्यवस्था न होने के कारण रावी का जो फालतू पानी बहकर पाकिस्तान जाता था, वह अब बंद हो जाएगा . इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की कृषि, खाद्य सुरक्षा और लाहौर जैसे बड़े शहरों की जलापूर्ति पर सीधा बुरा असर पड़ेगा. पाकिस्तान की जीडीपी में खेती का हिस्सा 25% है, जो इस पानी की कमी से लड़खड़ा सकती है .

क्या भारत का यह फैसला इंडस वॉटर ट्रीटी का वायलेशन है?

बिल्कुल नहीं. 1960 की सिंधु जल संधि के तहत तीन पूर्वी नदियों सतलुज, ब्यास और रावी के पानी पर भारत का पूरा अधिकार है . पाकिस्तान का अधिकार केवल तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चेनाब पर है . शाहपुर कंडी रावी नदी पर बना है, इसलिए भारत अपने हक का एक-एक बूंद पानी रोकने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र है . पाकिस्तान चाहकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रोजेक्ट के खिलाफ कोई कानूनी आपत्ति नहीं जता सकता.

’उझ बांध’ के बारे में क्या कहा और वह क्यों जरूरी है?

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि शाहपुर कंडी के बाद अब ‘उझ बांध’ का निर्माण भी जल्द शुरू किया जाएगा . सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस बांध की सलाह दी है क्योंकि उझ नदी का क्षेत्र आतंकियों की घुसपैठ का एक प्रमुख रास्ता रहा है . बांध बनने से वहां सुरक्षा चौकसी बढ़ेगी और साथ ही यह रावी की सहायक नदी उझ के पानी को भी पाकिस्तान जाने से रोकेगा, जिससे भारत की जल सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी.

क्या भारत अब पाकिस्तान की ओर जाने वाली सभी नदियों का पानी रोकने की तैयारी में है?

भारत केवल उन्हीं नदियों का पानी रोक रहा है जिन पर उसका कानूनी हक है . हालांकि, हाल के वर्षों में आतंकी हमलों के बाद भारत ने अपना रुख सख्त किया है. सिंधु जल संधि के तहत मिलने वाली रियायतों पर भारत अब कड़ाई बरत रहा है . झेलम पर वुलर बैराज और चेनाब पर कई जलविद्युत परियोजनाओं को तेज कर दिया गया है . रणनीति साफ है: भारत अब अपने पानी का इस्तेमाल अपने लोगों के लिए करेगा और आतंकवाद को शह देने वाले देश को मुफ्त पानी नहीं देगा.

इस प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन में कितना इजाफा होगा और इससे किसे लाभ मिलेगा?

सिंचाई के साथ-साथ शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट बिजली उत्पादन के लिए भी डिजाइन किया गया है. इसमें करीब 206 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता है . यह बिजली मुख्य रूप से पंजाब और जम्मू-कश्मीर के ग्रिड को दी जाएगी, जिससे सीमावर्ती इलाकों में उद्योगों और घरों को निर्बाध बिजली मिल सकेगी. यह ग्रीन एनर्जी होगी, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर है और इलाके के आर्थिक विकास में इंजन का काम करेगी.

पाकिस्तान इस बांध को लेकर इतना डरा हुआ क्यों है, क्या वहां सूखे जैसी स्थिति बन सकती है?

पाकिस्तान पहले से ही पानी की भारी कमी वाला देश घोषित हो चुका है. रावी का पानी उसके लाहौर और आसपास के इलाकों के भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद करता था . जब यह पानी रुकेगा, तो वहां कुएं और नलकूप सूखने लगेंगे. गर्मियों के दिनों में जब फसल को सबसे ज्यादा पानी चाहिए होता है, तब रावी का प्रवाह बंद होना पाकिस्तान के किसानों के लिए तबाही जैसा होगा, जिससे वहां अनाज का संकट भी पैदा हो सकता है.

क्या इस बांध के पूरा होने के बाद भारत रावी नदी के 100% जल का उपयोग कर पाएगा?

हां, शाहपुर कंडी बांध रावी नदी पर भारत के अधिकार वाले अंतिम बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है. इसके और उझ बांध के पूरा होने के बाद भारत रावी नदी के जल के हर कतरे का उपयोग करने की स्थिति में होगा . अब तक भारत अपनी असमर्थता के कारण लगभग 5-10% पानी पाकिस्तान जाने देता था, लेकिन अब आधुनिक इंजीनियरिंग के जरिए उस ‘सरप्लस’ पानी को भी स्टोरेज में लाया जा सकेगा, जो एक बड़ी कूटनीतिक जीत है.

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