spinach farming profit | Palak ki Kheti se Munafa | पालक की खेती से मुनाफा | किसानों के लिए फायदेमंद खेती |

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पालक बनी किसानों की कमाई का जरिया, ढाई हजार की लागत में एक फसल दे रही मुनाफा

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Palak ki Kheti se Munafa: बाराबंकी में अगेती पालक की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है. कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल गर्मियों में किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है. जिले के किसान मंगल मौर्या करीब डेढ़ बीघे में पालक उगाकर एक फसल से 30 से 40 हजार रुपये तक कमा रहे हैं. बाजार में सालभर रहने वाली मांग के कारण पालक की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनती जा रही है.

बाराबंकी: आज के समय में पारंपरिक फसलों के बजाय सब्जियों की खेती किसानों के लिए एक फायदे का सौदा साबित हो रही है. कम लागत और कम मेहनत में तैयार होने वाली पालक की फसल ने बाराबंकी जिले के किसानों की किस्मत बदल दी है. पालक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. आयरन और विटामिन से भरपूर होने के कारण हर घर में इसकी खपत होती है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता.

बाराबंकी जिले के बडेल गांव के रहने वाले किसान मंगल प्रसाद मौर्या पिछले 10-15 सालों से साग-सब्जियों की खेती कर रहे हैं. मंगल बताते हैं कि पहले वे धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, लेकिन उनमें मेहनत ज्यादा और मुनाफा बहुत कम नजर आ रहा था. इसके बाद उन्होंने सब्जियों की ओर रुख किया और पालक की खेती शुरू की. आज वे करीब डेढ़ बीघे खेत में पालक उगा रहे हैं और हर फसल पर 30 से 40 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं.

40 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
पालक की खेती करना बहुत ही आसान और समय बचाने वाला काम है. इसकी प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहले खेत की अच्छी तरह जुताई की जाती है और फिर उसे समतल करके बीजों की बुवाई कर दी जाती है. जैसे ही पौधे थोड़े बड़े होते हैं, उनकी सिंचाई कर दी जाती है. बुवाई के मात्र 35 से 40 दिनों के भीतर फसल कटने के लिए तैयार हो जाती है. एक बार फसल निकलनी शुरू हो जाए, तो यह करीब एक महीने तक लगातार चलती रहती है, जिससे किसान को लंबे समय तक आमदनी होती है.

कम देखभाल में ज्यादा फायदा
अन्य फसलों की तुलना में पालक की देखभाल की ज्यादा जरूरत नहीं होती. इसमें न तो बहुत ज्यादा पानी की खपत है और न ही महंगे कीटनाशकों का बोझ. यही कारण है कि बाराबंकी के बडेल गांव के अन्य किसान भी मंगल मौर्या की सफलता को देखकर अब सब्जियों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल न केवल खेत खाली रखती है, बल्कि किसान की जेब भी हमेशा भरी रखती है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें

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