आलू की खेती ने बिगाड़ा किसानों का गणित, बढ़ी कट्टों की कीमत, गिरे दाम, संकट में मजदूर और किसान

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बुलंदशहर: कौड़ियों के भाव बिक रहा ‘सफेद सोना’, लागत निकालना भी हुआ दूभर

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Bulandshahr Potato Farmers Crisis: बुलंदशहर की शिकारपुर तहसील में आलू किसान भारी संकट में हैं. ₹15,000 प्रति बीघा की लागत के बावजूद मंडियों में आलू मात्र ₹7 प्रति किलो बिक रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. साहूकारों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर की गई खेती अब गले की फांस बन गई है. खरीदार न मिलने से अगली फसल की बुवाई पर भी संकट मंडरा रहा है. किसान अब सरकार से आलू का न्यूनतम दाम तय करने की गुहार लगा रहे हैं.

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आलू किसानों पर आर्थिक संकट के बादल: 15 हजार की लागत और 7 हजार का घाटा (फोटो-AI)

Bulandshahr Potato Farmers Crisis: उत्तर प्रदेश के जनपद बुलंदशहर की शिकारपुर तहसील में इस बार ‘सफेद सोना’ यानी आलू किसानों के लिए गले की फांस बन गया है. हाड़तोड़ मेहनत के बाद फसल तो बंपर तैयार है, लेकिन उसे खरीदने वाला कोई नहीं. लागत से आधे दामों पर बिक रही फसल ने किसानों की कमर तोड़ दी है. भारी भरकम लगान और ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेकर बोई गई फसल अब किसानों के लिए गहरे आर्थिक संकट का सबब बन गई है. स्थिति यह है कि किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं और अगली फसल की बुवाई को लेकर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं.

लागत से कम मिल रहे दाम, प्रति बीघा भारी नुकसान
शिकारपुर तहसील क्षेत्र के गांवों में लगभग 90 प्रतिशत खेती आलू की होती है. किसानों ने 8 से 10 हजार रुपये बीघा तक लगान लेकर बुवाई की थी. खाद, बीज और कट्टों की बढ़ती कीमतों के कारण एक बीघा की लागत करीब 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है. लेकिन मंडी में आलू का भाव महज 7 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जिससे किसानों को सीधे तौर पर प्रति बीघा 7 हजार रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है.

कर्ज और ब्याज के जाल में फंसा अन्नदाता
खेती के लिए अधिकतर किसानों ने साहूकारों से 3 प्रतिशत मासिक ब्याज पर कर्ज लिया है. किसानों का कहना है कि अगर आलू का उचित दाम नहीं मिला, तो साहूकार का कर्ज चुकाना तो दूर, परिवार का पालन-पोषण करना भी मुश्किल हो जाएगा. पिछले साल जो कट्टा 11 रुपये का था, वह अब 18 रुपये का मिल रहा है, जबकि फसल के दाम आधे हो गए हैं.

खेत खाली न होने से अगली फसल पर संकट
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर आलू समय पर नहीं बिका, तो खेत खाली नहीं होंगे. इससे अगली फसल की बुवाई में देरी होगी. वहीं, कृषि पर निर्भर मजदूर वर्ग भी परेशान है, उनका कहना है कि जब किसान की जेब खाली होगी, तो उन्हें मजदूरी कहां से मिलेगी.

सरकार से न्यूनतम दाम तय करने की मांग
शिकारपुर के किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की तर्ज पर दाम तय किया जाए. किसानों के अनुसार, यदि आलू का रेट 12 से 14 रुपये प्रति किलो के बीच मिल जाए, तो वे अपनी लागत निकाल पाएंगे और इस संकट से उबर सकेंगे.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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