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गाजीपुर पीजी कॉलेज में इंग्लिश लिटरेचर के पाठ्यक्रम में एन्वायरमेंटल लिटरेचर को शामिल किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्र साहित्य के माध्यम से इंसान और प्रकृति के रिश्ते को बेहतर समझ पाएंगे और पर्यावरण के प्रति उनकी सोच और जिम्मेदारी में बदलाव आएगा.
गाजीपुर. अब तक इंग्लिश लिटरेचर को लोग सिर्फ कविताओं, कहानियों और क्लासिक किताबों तक सीमित मानते थे, लेकिन अब यह पढ़ाई प्रकृति और पर्यावरण से भी सीधे जुड़ने जा रही है. गाजीपुर के पीजी कॉलेज में एन्वायरमेंटल लिटरेचर के जुड़ने से छात्र यह समझ पाएंगे कि साहित्य केवल कल्पना नहीं, बल्कि इंसान और प्रकृति के रिश्ते को समझने का जरिया भी है. यही वजह है कि इंग्लिश लिटरेचर में पर्यावरण की एंट्री को सोच में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. बीएचयू के पर्यावरण विशेषज्ञ प्रोफेसर पी.सी. अभिलाष ने बताया कि साहित्य में पर्यावरण की एंट्री कोई नई बहस नहीं है. उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे Silent Spring नाम की किताब ने पहली बार दुनिया को चौंका दिया था. इस किताब में बताया गया था कि डीडीटी जैसे रसायनों के इस्तेमाल से चिड़ियां मर रही थी और प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा था. प्रोफेसर अभिलाष के मुताबिक, यही वह मोड़ था जब साहित्य ने पर्यावरण संकट को शब्द दिए और समाज को सोचने पर मजबूर किया.
प्रकृति बनाम इंसान की सोच
उन्होंने कहा कि दुनिया के जीव दो तरह के होते हैं—एक, जो प्रकृति के नियमों के साथ चलते हैं, और दूसरे, जो प्रकृति को अपने फायदे के हिसाब से बदलना चाहते हैं. इंसान दूसरी कैटेगरी में आता है, लालच और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल की आदत ने पर्यावरण को आज के संकट तक पहुंचा दिया है.
लिटरेचर पढ़ेंगे, तो नजरिया बदलेगा
प्रोफेसर अभिलाष का मानना है कि जब पर्यावरण से जुड़ी कहानियां और किताबें लिटरेचर का हिस्सा बनती हैं, तो वे सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि सोच बदलती हैं. छात्र यह समझने लगते हैं कि प्रकृति केवल इंसान के लिए नहीं बनी है, बल्कि इंसान भी प्रकृति का हिस्सा है. यही सोच आगे चलकर व्यवहार में बदलती है.
क्लासरूम से बाहर तक असर
उन्होंने कहा कि एन्वायरमेंटल लिटरेचर छात्रों को सवाल पूछना सिखाता है. हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं और इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर क्या होगा. अगर इंसान खुद पर थोड़ा नियंत्रण करे और प्रकृति को उसके तरीके से काम करने दे, तो कई समस्याएं अपने आप कम हो सकती हैं. कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर राघवेंद्र पांडेय ने भी कहा कि इंग्लिश लिटरेचर में पर्यावरण का जुड़ना सिर्फ सिलेबस का बदलाव नहीं है, बल्कि सोच और जिम्मेदारी का बदलाव है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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