घातक ड्रोन: 1000 KM स्‍पीड, कावेरी इंजन की धारा, दुश्‍मन के रडार का काल है DRDO का यह अचूक हथियार

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आसमान में गूंजती मौत की आहट और रडार को ठेंगा दिखाती स्टील्थ तकनीक. भारतीय वायुसेना के तरकश में अब एक ऐसा घातक तीर शामिल होने जा रहा है जो दुश्मन के घर में घुसकर तबाही मचाएगा और उसे खबर तक नहीं होगी. रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने DRDO द्वारा विकसित किए जा रहे 60 घातक अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल्स (UCAVs) की खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है. यह महज एक ड्रोन नहीं बल्कि भारत का वो अदृश्य शिकारी है जो पायलटों की जान जोखिम में डाले बिना दुश्मन के रडार स्टेशनों और मिसाइल सिस्टम को मलबे के ढेर में तब्दील करने की ताकत रखता है. फ्लाइंग विंग डिजाइन वाला यह ड्रोन भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिन्होंने युद्ध के मैदान में हवा का रुख बदलने वाली तकनीक पर महारत हासिल की है.

घातक की प्रमुख खासियतें और डिजाइन
घातक कोई साधारण ड्रोन नहीं है बल्कि एक फ्लाइंग-विंगकॉन्फ़िगरेशन पर आधारित अत्याधुनिक लड़ाकू मशीन है.

·         स्टील्थ क्षमता: इसका डिजाइन लो रडार क्रॉस-सेक्शन के लिए तैयार किया गया है जिससे यह दुश्मन के रडार की नजरों से बचकर गहरे हमले कर सकता है.

·         हथियार वहन: इसमें हथियारों को अंदरूनी हिस्से में रखने की व्यवस्था है जो इसकी स्टील्थ क्षमता को और बढ़ाता है.

·         स्वदेशी तकनीक: यह हल्के कार्बन कंपोजिट मटेरियल से बना है और इसमें स्वास्थ्य निगरानी के लिए विशेष सेंसर लगाए गए हैं.

·         स्वायत्त लैंडिंग: यह बिना किसी ग्राउंड रडार या मानवीय हस्तक्षेप के ऑटोनॉमस लैंडिंग करने में सक्षम है.

मिशन और सैन्य उपयोग
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमन प्रीत सिंह के अनुसार घातक जैसे मानवरहित सिस्टम उन जगहों पर काम करेंगे जहां मानवीय जीवन को जोखिम में नहीं डाला जा सकता.

·         डीप-स्ट्राइक: यह दुश्मन के भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र में घुसकर हाई वैल्यू वाले लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है.

·         दुश्मन के एयर डिफेंस को तबाह करना: इसका उपयोग रडार स्टेशनों और मिसाइल प्रणालियों को नष्ट करने के लिए किया जाएगा.

·         सहयोग: यह स्वायत्त रूप से या मानवयुक्त विमानों के साथ मिलकर काम कर सकता है.

ड्रोन श्रेणी में तुलना और भविष्य
घातक की तुलना दुनिया के चुनिंदा स्टील्थ ड्रोन्स जैसे अमेरिका के RQ-170 या रूस के S-70 Okhotnik से की जा सकती है. भारत अब उन एलिट क्लब के देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने फ्लाइंग-विंग तकनीक पर महारत हासिल की है. हालांकि इसकी सटीक रेंज और कीमत अभी आधिकारिक तौर पर गोपनीय है, लेकिन 60 इकाइयों की खरीद का प्रस्ताव इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर ले जा रहा है. दिसंबर 2023 में ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर का सफल परीक्षण इस बात का प्रमाण है कि ‘घातक’ जल्द ही भारतीय वायु सेना के ‘विज़न 2047’ का एक अभिन्न हिस्सा बनेगा.

घातक UCAV: ताकत और तकनीक के प्रमुख बिंदु
·         घातक ड्रोन का प्रकार: यह एक स्टील्थ अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV) है. इसका ‘फ्लाइंग विंग’ डिजाइन इसे रडार की नजरों से बचाए रखता है, जिससे यह दुश्मन के हवाई क्षेत्र में बिना पहचान में आए घुस सकता है.

·         घातक ड्रोन की कीमत: रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एक ‘घातक’ ड्रोन की कीमत ₹600 करोड़ से ₹750 करोड़ ($70-90 मिलियन) के बीच होने की संभावना है. इसकी तुलना में अमेरिका का प्रीडेटर ड्रोन ₹300-350 करोड़ का है, लेकिन उसमें घातक जैसी ‘स्टील्थ’ तकनीक मौजूद नहीं है.

·         घातक ड्रोन की मारक क्षमता: इसका कॉम्बैट रेडियस 1,000 किमी से अधिक है. इसका मतलब है कि यह भारत से उड़ान भरकर दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने और वापस लौटने की जबरदस्त क्षमता रखता है.

·         घातक ड्रोन क्षमता: यह अपने ‘इंटरनल वेपन बे’ (अंदरूनी हिस्से) में लगभग 1.5 से 2 टन तक के वजनी हथियार ले जा सकता है. इसमें घातक मिसाइलें और सटीक निशाना लगाने वाले ‘प्रिसिजन गाइडेड बम’ शामिल होंगे.

·         घातक ड्रोन की स्‍पीड: यह High-Subsonic गति यानी लगभग 900 से 1000 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है, जो इसे हमलों के दौरान बेहद तेज और आक्रामक बनाता है.

·         घातक ड्रोन का स्वदेशी इंजन: इसमें स्वदेशी रूप से विकसित ‘कावेरी ड्राई इंजन’ (KDE) का उपयोग किया जाएगा. यह इंजन इसे 46-52 kN का शक्तिशाली थ्रस्ट (धक्का) प्रदान करता है, जिससे यह भारी हथियारों के साथ भी ऊंचाई पर आसानी से उड़ सकता है.

सवाल-जवाब

घातक UCAV का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य पायलटों को जोखिम में डाले बिना दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसकर गहरी स्ट्राइक करना और उनके एयर डिफेंस को तबाह करना है.

क्या यह पूरी तरह से स्वदेशी है?

हाँ, इसे DRDO की वैमानिकी विकास स्थापना (ADE) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसमें स्वदेशी कार्बन कंपोजिट सामग्री का उपयोग किया गया है.

क्या घातक लड़ाकू विमानों की जगह लेगा?

नहीं, वायु सेना के अनुसार ये लड़ाकू विमानों की जगह नहीं लेंगे, बल्कि उनके साथ मिलकर काम करेंगे और जोखिम वाले इलाकों में आगे रहेंगे.

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