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फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्जेंडर स्टब 4 मार्च से भारत के चार दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं. वे नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 11वें ‘रायसीना डायलॉग 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति स्टब के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी.
फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब. (Photo : Reuters)
नई दिल्ली: भारत की राजधानी एक बार फिर दुनिया की कूटनीति का केंद्र बनने जा रही है. फिनलैंड के राष्ट्रपति डॉ. अलेक्जेंडर स्टब 4 से 7 मार्च तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे. राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाता है. इस यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण 11वां ‘रायसीना संवाद’ (Raisina Dialogue 2026) होगा, जहां राष्ट्रपति स्टब बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर वैश्विक चुनौतियों पर अपना विजन रखेंगे. उनके साथ फिनलैंड के मंत्रियों और बिजनेस लीडर्स का एक बड़ा डेलिगेशन भी आ रहा है, जो भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने की कोशिश करेगा.
पीएम मोदी और अलेक्जेंडर स्टब के बीच क्या होगी बड़ी चर्चा?
राष्ट्रपति स्टब के इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सम्मान में एक विशेष भोज का आयोजन करेंगे. दोनों नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत में टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर फोकस रहेगा. फिनलैंड और भारत के रिश्ते हमेशा से ही लोकतांत्रिक मूल्यों पर टिके रहे हैं. इस मीटिंग में क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का साथ देने जैसे अहम मुद्दों पर भी बात होगी. राष्ट्रपति स्टब अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे.
मुंबई का दौरा और व्यापारिक संबंधों को नई धार देने की तैयारी?
दिल्ली के कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति स्टब मुंबई के लिए रवाना होंगे. वहां वे महाराष्ट्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे. मुंबई में उनका मुख्य उद्देश्य भारत-फिनलैंड बिजनेस प्रोग्राम में हिस्सा लेना है. वे भारतीय व्यापारियों के साथ चर्चा करेंगे ताकि फिनिश कंपनियों के लिए भारत में निवेश के नए रास्ते खुल सकें. इसके अलावा, वे मुंबई यूनिवर्सिटी के छात्रों को भी संबोधित करेंगे, जिससे दोनों देशों के युवाओं के बीच सीधा संवाद बढ़ेगा. गौरतलब है कि फरवरी 2026 में ही फिनलैंड के पीएम पेटेरी ओर्पो भी भारत आए थे, जिससे साफ है कि फिनलैंड भारत को यूरोप में अपना सबसे मजबूत पार्टनर मान रहा है.
ट्रंप के दूत और अमेरिकी डेलिगेशन की मौजूदगी के क्या हैं मायने?
हैरानी की बात यह है कि इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन भी दिल्ली में मौजूद रहेगा. उपविदेश सचिव क्रिस्टोफर लैंडौ रायसीना डायलॉग में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व करेंगे. अमेरिका की ‘इंडिया फर्स्ट’ पॉलिसी के तहत जरूरी मिनरल्स, काउंटरनारकोटिक्स और फ्री हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चर्चा की जाएगी. वहीं, अमेरिकी सहायक सचिव एस. पॉल कपूर पहले से ही दिल्ली में सुरक्षा मुद्दों पर भारतीय अधिकारियों से मिल रहे हैं. फिनलैंड के राष्ट्रपति और अमेरिकी दूतों की एक साथ मौजूदगी साफ करती है कि भारत जियोपॉलिटिक्स का सबसे अहम खिलाड़ी बनकर उभरा है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें
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