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बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. 2025 के चुनाव में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के मात्र 4 महीने बाद नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है. यह कदम राज्य में सत्ता हस्तांतरण का संकेत माना जा रहा है. नीतीश कुमार ने अचानक सीएम पद छोड़ने का फैसला किया. उनका यह मास्टरस्ट्रोक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है. उनके राजनीतिक सफर में जेपी आंदोलन, रेल मंत्री का अनुभव, महिला वोट बैंक की ताकत और शराबबंदी जैसी चर्चित नीतियां शामिल हैं. 2010 में नरेंद्र मोदी के साथ उनके विवाद और अब उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री भी बिहार के राजनीतिक समीकरण बदल सकती है. सवाल यह है कि अब बिहार की अगली मुख्यमंत्री कुर्सी किसके हाथ में जाएगी. राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम बिहार में नए गठबंधन और रणनीतियों का रास्ता खोल सकता है. जनता और पार्टियों की निगाहें अब अगले राजनीतिक फैसलों पर टिकी हैं.
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