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झांसी की एक महिला समूह ने फलों के छिलकों को नया जीवन दे दिया है. आम, संतरा, नींबू और अनार के छिलकों से बने उनके ज्यूस और सॉस न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हैं, बल्कि कचरे को कम करने और घर की आय बढ़ाने का भी तरीका दिखाते हैं. इस स्टॉल पर लोग चखते ही हैरान रह जाते हैं कि यह सब छिलकों से बनाया गया है. समूह का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि लोगों को यह सिखाना है कि हर चीज का सही उपयोग हो सकता है.
झांसी. शहर में लगे एक्सपो में एक अलग सोच वाला समूह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. यह समूह फल के छिलकों से ज्यूस और सॉस बना रहा है. आम तौर पर हम फल खाते हैं छिलका फेंक देते हैं. हमें लगता है कि उसका कोई काम नहीं है. लेकिन इस समूह ने दिखाया कि जिस चीज को हम बेकार समझते हैं, उसी से स्वाद से भरा खाना तैयार हो सकता है. स्टॉल पर आम, संतरा, नींबू, अनार से बने ज्यूस सॉस रखे थे. इन सबका रंग, खुशबू, स्वाद लोगों को अपनी ओर खींच रहा था. जब लोग चखते तो हैरान रह जाते थे कि यह सब छिलकों से बना है. समूह की महिलाएं लोगों को समझा रही थी कि छिलके में भी पोषण होता है, बस सही तरीके से साफ कर सही ढंग से पकाना जरूरी है.
इस समूह ने बताया कि वे पहले छिलकों को अच्छे से धोते हैं. धूप में सुखाते हैं फिर देसी मसाले मिलाते हैं. तेल, नमक, हल्दी, मिर्च का संतुलन रखते हैं. सॉस बनाने के लिए छिलकों को पीस कर गाढ़ा रूप देते हैं. इसमें चीनी गुड़ का सही मेल रखते हैं, ताकि स्वाद मीठा खट्टा लगे बच्चों को भी यह स्वाद पसंद आ रहा है. सबसे खास बात यह है कि इस काम से कचरा कम हो रहा है. घर, होटल, मंडी से जो छिलके निकलते हैं उन्हें इकट्ठा किया जाता है इससे गंदगी भी घटती है. साथ ही कमाई का जरिया भी बनता है, समूह में गांव की महिलाएं जुड़ी हैं. घर बैठकर भी काम कर सकती हैं, इससे उनके घर की आय बढ़ रही है. इस समूह का स्वाद अब बुंदेलखंड से निकल कर पूरे यूपी के कई जिलों तक पहुंच चुका है. लोग इसे अपने घर, शादी, भोज, मेहमान नवाजी में उपयोग कर रहे हैं. दुकानदार भी इसे अपने स्टोर में जगह दे रहे हैं क्योंकि यह अलग है, नया है, सस्ता भी है.
लंबे समय तक चलता है
ज्यूस की खासियत यह है कि यह लंबे समय तक चलता है. इसमें कोई खराब चीज नहीं डाली जाती सब कुछ साफ सुथरा ढंग से बनाया जाता है. सॉस की खासियत यह है कि यह गाढ़ा है स्वाद में संतुलित है. इसमें फल की असली खुशबू रहती है. बच्चे इसे रोटी पर लगाकर खाते हैं बड़े लोग इसे पकवान के साथ लेते हैं. समूह का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ कमाई नहीं है वे लोगों को यह सिखाना चाहते हैं कि हर चीज का सही उपयोग हो सकता है. यदि हम सोच बदलें तो घर का कचरा भी धन बन सकता है. स्कूल कॉलेज में भी जाकर बच्चों को समझाते हैं कि भोजन की बर्बादी न करें. एक्सपो में आने वाले लोग इस स्टॉल से प्रेरणा लेकर जा रहे हैं. कई लोग पूछ रहे हैं कि यह काम कैसे शुरू करें, समूह उन्हें तरीका बता रहा है ताकि दूसरे भी जुड़ सकें इस तरह यह छोटा सा प्रयास अब एक बड़ा रूप ले रहा है. फल के छिलकों से बना यह ज्यूस, सॉस स्वाद के साथ साथ सोच में भी बदलाव ला रहा है. यह दिखा रहा है कि नई राह अपनाकर भी परंपरा का स्वाद जिंदा रखा जा सकता है, यही इस समूह की सबसे बड़ी पहचान है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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