[ad_1]
Last Updated:
Bahraich Ground Report: स्थानीय लोगों का कहना है कि नेशनल हाईवे द्वारा बनाया गया डिवाइडर मरी माता मंदिर के पहले मुख्य द्वार तक है. जिसे आगे तक बढ़ाने की आवश्यकता है. डिवाइडर कम होने के कारण आधी आबादी वनवे से ही सफर करती है. इसके अलावा यहां दिशा सूचक चिन्ह और लिखावट की भी आवश्यकता है. बिना सूचना के लोग गलत रास्ते पर चले जाते है. जिससे उन्हें वापस लौटने में परेशानी होती है.
बहराइच: शहर के किनारे स्थित मार्ग गोलवा घाट, जहां से गुजरने वाला हाईवे लोगों को भ्रमित कर देता है. यहां से शहर जाने के लिए एक डिवाइडर बनाया गया है. लेकिन यह डिवाइडर स्पष्ट नहीं है. जिससे लोग असमंजस में पड़ जाते है. न तो कोई दिशा सूचक बोर्ड और न ही कोई सूचना दी गई है, जिसके चलते अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती है. जानिए इस रिपोर्ट में क्या है असली समस्या.
बहराइच शहर के किनारे स्थित गोलवा घाट के उस पार मरी माता मंदिर के किनारे से होते हुए एक रोड सीधे लखीमपुर और रुपईडीहा हाईवे से जुड़ती है. इस रोड पर बीच में डिवाइडर बनाया गया है. जिसे एक तरफ से जाने वालों और दूसरी तरफ से आने वालों के लिए खोला गया है. लखनऊ की ओर से आने वाले लोग इसी डिवाइडर से होकर बहराइच शहर की ओर गोलवा घाट पुल के ऊपर से जाते है. लेकिन कई लोग समझ नहीं पाते कि डिवाइडर से जाया जाए या शहर के मार्ग से. इससे कई लोग डिवाइडर से और कई लोग आने वाले रास्ते से जाते है.
क्यों फेल हो जाता है लोगों का दिमाग?
लखनऊ से आने वाले लोगों को समझ नहीं आता कि शहर की ओर जाने के लिए कौन सा रास्ता अपनाया जाए. आधे लोग हाईवे से डिवाइडर के बीच से शहर की ओर जाते है, जबकि बाकी वनवे से… इसमें आने-जाने वालों की भी गलती नहीं है, क्योंकि यहां न तो लोकल प्रशासन और न ही नेशनल हाईवे ने कोई दिशा सूचक बोर्ड लगाया है. कई बार डिवाइडर से जाने वाले लोगों के सामने तेज रफ्तार में आ रही गाड़ी से दुर्घटना हो जाती है. आए दिन यहां ऐसे हादसे होते रहते है.
स्थानीय लोगों ने बताई समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि नेशनल हाईवे द्वारा बनाया गया डिवाइडर मरी माता मंदिर के पहले मुख्य द्वार तक है. जिसे आगे तक बढ़ाने की आवश्यकता है. डिवाइडर कम होने के कारण आधी आबादी वनवे से ही सफर करती है. इसके अलावा यहां दिशा सूचक चिन्ह और लिखावट की भी आवश्यकता है. बिना सूचना के लोग गलत रास्ते पर चले जाते है. जिससे उन्हें वापस लौटने में परेशानी होती है. कई बार तो लोग चक्कर खा जाते है और दुर्घटनाएं हो जाती है. अगर प्रशासन ने जल्द ध्यान नहीं दिया तो ये घटनाएं बढ़ती रहेंगी.
[ad_2]
Source link
