बहराइच के गोलवा घाट पर ‘मौत का खेल’, सुरक्षा इंतजाम न होने से बढ़ रही आत्महत्या की घटनाएं

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Bahraich News: बहराइच शहर के गोलवा घाट की, जहां सरयू नदी का पानी बहता है. इस घाट पर आए दिन कोई न कोई कूदकर अपनी जान दे देता है. कई बार तो जान बच जाती है, लेकिन ज्यादातर लोग मौत के आगोश में समा जाते है. क्योंकि यहां पर न तो कोई गोताखोर रहता है और न ही पुलिसकर्मी, जिससे कूदने वाले को बचाया जा सके. पानी भी इतना गहरा है कि कूदने के बाद तुरंत लोगों की जान चली जाती है. प्रशासन को इसमें जाल लगवाने की जरूरत है.

बहराइच: बहराइच शहर का गोलवा घाट इन दिनों चिंता का विषय बना हुआ है. सरयू नदी के किनारे स्थित इस घाट पर आए दिन लोगों के कूदकर जान देने की घटनाएं सामने आती रहती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां पानी काफी गहरा है और सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है. न तो स्थायी रूप से गोताखोर तैनात है और न ही पुलिसकर्मियों की मौजूदगी रहती है. ऐसे में जब कोई व्यक्ति नदी में कूद जाता है, तब तक मदद पहुंचने में देर हो जाती है और कई बार उसकी जान नहीं बच पाती. लोगों का कहना है कि अगर यहां जाल लगवाने, गोताखोर तैनात करने और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएं, तो कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.

लोकल 18 की टीम ने जब इस मामले की तह तक जाकर गोलवा घाट पर गुजरने वाले स्थानीय लोगों और राहगीरों से बात की तब लोगों ने कहा कि महीने में एक-दो बार कोई न कोई कूदकर अपनी जान दे ही देता है. जब तक पुलिस या कोई बचाने के लिए पानी में उतरता है, तब तक उसकी जान जा चुकी होती है. ऐसा लंबे समय से चला आ रहा है. लेकिन प्रशासन ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया. प्रशासन चाहे तो नीचे पानी में और ऊपर गोलवा घाट पर दोनों तरफ से जाल घिरा सकता है. इसके अलावा 12-12 घंटे की गोताखोरों की ड्यूटी भी इसी स्थान पर एक छोटी सी चौकी बनाकर लगानी चाहिए. जिससे अगर किसी तरह से कोई कूद भी जाए तो गोताखोर उसे बचा लें.

कितनी है इस गोलवा घाट की गहराई!
गोलवा घाट में सरयू नदी का पानी बहता है. जिसका इतिहास बहराइच बसने से पहले का है. गोलवा घाट वह स्थान है. जहां कई धार्मिक कार्यक्रम भी होते है. लेकिन इसकी गहराई का अंदाजा आज तक कोई नहीं लगा सका. कहते है कि अगर हाथी भी डाल दिया जाए, तो वह भी डूब जाएंगे. शायद यही वजह है कि लोग कूदते ही मौत के आगोश में समा जाते है. अगर प्रशासन चाहे तो घाट से कुछ दूरी तक अंदर ही अंदर जाल डलवा सकता है. जिससे कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके.

लोग इस घाट में कूद कर देते हैं जान
दरअसल, आए दिन इस घाट में किसी न किसी के कूदने की खबर आती रहती है, जिससे वे लोग भी प्रभावित होते है जो अपनी जिंदगी या किसी कारणवश परेशान रहते है और फिर वे भी इस तरह का कदम उठा लेते है. हालांकि, उन्हें यह नहीं पता होता है कि किसी मुसीबत से लड़ना मौत नहीं है. मौत को तो कायर लोग गले लगाते है. हिम्मती वही होता है जो अपनी परेशानियों से लड़कर आगे बढ़ता है. यहां पर आवागमन तो बराबर रहता है, लेकिन शहर का किनारा होने के कारण यहां पर लोगों का ठहराव नहीं रहता है. इसलिए यहां पर बहुत ज्यादा लोग मौजूद नहीं होते है और शायद इसी का फायदा उठाकर लोग इसमें कूद जाते है. दूर-दराज के मछुआरे कई बार शोर मचाते है तब लोग इकट्ठा होते है और कूदे हुए लोगों को बचाते है.

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