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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है. विभाग द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर वसूले गए लाखों रुपये उपभोक्ताओं के वापस किए जाएंगे. आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि एक अप्रैल,2025 के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे लिए गए हैं.
यूपी में 3 लाख 67 हजार लोगों के पैसे किए जाएंगे वापस.
लखनऊः उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है. विभाग द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर वसूले गए लाखों रुपये उपभोक्ताओं के वापस किए जाएंगे. आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि एक अप्रैल,2025 के बाद जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त पैसे लिए गए हैं, उनके पैसे बिजली बिलों में समायोजित यानी कि एडजस्ट करके लौटाई जाए. बता दें कि यह अतिरिक्त रासि 127 करोड़ रुपये है.
पहले फेज पर 316 रुपये अधिक वसूले गए
यह आदेश आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह ने उपभोक्ता परिषद की याचिका पर सुनवाई करते वक्त दिया. आयोग अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को करेगा और उसी दिन पॉवर कॉर्पोरेशन के निदेशक को भी उपस्थित होने को कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद ने बताया कि बिजली वितरण कंपनियों ने नए बिजली कनेक्शन देते वक्त सिंगल फेज कनेक्शन पर 6016 रुपये और थ्री फेज कनेक्शन पर 11341 रुपये वसूले थे. वसूली गई राशि में सिंगल फेज पर करीब 3216 रुपये और थ्री फेज पर करीब 7241 रुपये अधिक वसूले गए थे. बता दें कि नए बिजली कनेक्शन के लिए 10 सितंबर 2025 से स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य कर दिए गए थे.
3 लाख 67 हजार उपभोक्ता हुए प्रभावित
बता दें कि यूपीपीसीएल और डिस्कॉम कंपनियां पुरानी 2019 की किताब (कॉस्ट डाटा बुक) के हिसाब से पैसे ले रही थीं. लेकिन ये नए स्मार्ट मीटर थे, जिनकी कोई मंजूर दर नहीं थी. इसलिए यह वसूली गैरकानूनी थी. इससे करीब 3.67 लाख नए उपभोक्ता प्रभावित हुए. तुरंत वापस करने वाली राशि लगभग 127 करोड़ रुपये बताई गई है. यूपीईआरसी के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह ने खुद इस मामले पर ध्यान दिया. उन्होंने पाया कि बिजली कंपनियां बिना आयोग की मंजूरी के ज्यादा पैसे नहीं ले सकतीं. यह विद्युत अधिनियम 2003 के खिलाफ था. आयोग ने इसे गलत बताया और सख्ती दिखाई है.
आयोग ने क्या दिया आदेश
आयोग ने यूपीपीसीएल को निर्देश दिया है कि प्रभावित उपभोक्ताओं के लंबित बिजली बिलों को अतिरिक्त राशि के साथ एडजस्ट किया जाए. आदेश में कहा गया है, “यदि समायोजन के बाद कोई शेष राशि बचती है, तो उसे 1 अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी बिलों में जमा किया जाना चाहिए, जब तक कि पूरी अतिरिक्त राशि वापस नहीं कर दी जाती. प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए, अतिरिक्त राशि उनके खातों में क्रेडिट के रूप में दिखाई जानी चाहिए.”
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें
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