रमजान में ‘रात को जागता, दिन में सोता’ बाड़मेर! सहरी से तरावीह तक बदली शहर की पूरी लाइफस्टाइल

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रमजान में ‘रात को जागता, दिन में सोता’ बाड़मेर, बदली शहर की लाइफस्टाइल

 

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Ramzan in Barmer : पवित्र रमजान का महीना शुरू होते ही बाड़मेर शहर की दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है. पाकिस्तान सीमा से सटे इस शहर में रोज़े के दौरान दिन और रात का माहौल बिल्कुल अलग नजर आता है. तड़के सहरी के समय घरों में रौनक और हलचल शुरू हो जाती है, जब लोग उठकर सहरी करते हैं और फज्र की नमाज अदा कर रोज़े की शुरुआत करते हैं. दिन भर रोज़ा रखने की वजह से बाजारों और सड़कों पर अपेक्षाकृत शांति रहती है और लोग आराम को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन जैसे ही शाम को इफ्तार का समय नजदीक आता है, शहर की रफ्तार अचानक तेज हो जाती है. बाजारों में खजूर, फल और इफ्तार के पकवानों की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है. इफ्तार के बाद मस्जिदों में नमाज और तरावीह की इबादत का सिलसिला चलता है, जबकि शहर के बाजार और चाय की थड़ियां देर रात तक गुलजार रहती हैं. इस तरह रमजान के दिनों में बाड़मेर की जिंदगी दिन में शांत और रात में पूरी तरह जीवंत नजर आती है.

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